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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

91. सूरह अस-शम्स – 1-15

सूरह शम्स के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है, इस में 15 आयतें हैं।

  • इस सूरह की प्रथम आयत में “शम्स” (सूर्य) की शपथ ली गई है, इसी लिये इस का यह नाम रखा गया है।
  • इस की आयत 1 से 10 तक सूर्य-चाँद और रात-दिन तथा धरती और आकाश की उन बड़ी निशानियों की ओर ध्यान दिलाया गया है जो इस विश्व के पैदा करने वाले की पूर्ण शक्ति तथा गुणों का ज्ञान कराती है। और फिर मनुष्य की आत्मा की गवाही को अच्छे तथा बुरे कर्मफल के समर्थन में प्रस्तुत किया गया है।
  • आयत 11 से 13 तक में इस की एतिहासिक गवाही प्रस्तुत की गई है और आद तथा समूद जाति की कथा संक्षेप में बता कर उन के कुकर्मों के शिक्षाप्रद परिणाम लोगों की शिक्षा के लिये प्रस्तुत किये गये है ताकि वह कुन तथा इस्लाम के नबी का विरोध न करें।

सूरह अस-शम्स | Surah Shams in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا ‎ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

वश शम्सि व दुहाहा

हिंदी अनुवाद

सूर्य तथा उसकी धूप की शपथ है!

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وَالْقَمَرِ إِذَا تَلَاهَا ‎ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

वल क़मरि इज़ा तलाहा

हिंदी अनुवाद

और चाँद की शपथ, जब उसके पीछे निकले!

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‏ وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا ‎ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

वन नहारि इज़ा जल लाहा

हिंदी अनुवाद

और दिन की शपथ, जब उसे (अर्थात सूर्य को) प्रकट कर दे!

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وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا ﴾ 4 ﴿

Transliteration

वल लैलि इज़ा यगशाहा

हिंदी अनुवाद

और रात्रि की सौगन्ध, जब उसे (सूर्य को) छुपा ले!

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وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا ‎ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

वस समाइ वमा बानाहा

हिंदी अनुवाद

और आकाश की सौगन्ध तथा उसकी जिसने उसे बनाया!

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وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا ﴾ 6 ﴿

Transliteration

वल अरदि वमा तहाहा

हिंदी अनुवाद

तथा धरती की सौगन्ध और जिसने उसे फैलाया![1] 1. (1-6) इन आयतों का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार सूर्य के विपरीत चाँद, तथा दिन के विपरीत रात है, इसी प्रकार पुण्य और पाप तथा इस संसार का प्रति एक दूसरा संसार परलोक भी है। और इन्हीं स्वभाविक लक्ष्यों से परलोक का विश्वास होता है।

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وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا ‎ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

व नफ्सिव वमा सव वाहा

हिंदी अनुवाद

और जीव की सौगन्ध, तथा उसकी जिसने उसे ठीक ठीक सुधारा।

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فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا ﴾ 8 ﴿

Transliteration

फ़ अल्हमाहा फुजूरहा व तक्वाहा

हिंदी अनुवाद

फिर उसे दुराचार तथा सदाचार का विवेक दिया है।[1] 1. (7-8) इन आयतों में कहा गया है कि अल्लाह ने इन्सान को शारीरिक और मान्सिक शक्तियाँ दे कर बस नहीं किया, बल्कि उस ने पाप और पुण्य का स्वभाविक ज्ञान दे कर नबियों को भी भेजा। और वह़्यी (प्रकाशना) द्वारा पाप और पुण्य के सभी रूप समझा दिये। जिस की अन्तिम कड़ी क़ुर्आन, और अन्तिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं।

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‏ قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا ﴾ 9 ﴿

Transliteration

क़द अफ्लहा मन ज़क्काहा

हिंदी अनुवाद

वह सफल हो गया, जिसने अपने जीव का शुध्दिकरण किया।

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وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّاهَا ‎ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

वक़द खाबमन दस्साहा

हिंदी अनुवाद

तथा वह क्षति में पड़ गया, जिसने उसे (पाप में) धंसा दिया।[1] 1. (9-10) इन दोनों आयतों में यह बताया जा रहा है कि अब भविष्य की सफलता और विफलता इस बात पर निर्भर है कि कौन अपनी स्वभाविक योग्यता का प्रयोग किस के लिये कितना करता है। और इस प्रकाशना, क़ुर्आन के आदेशों को कितना मानता और पालन करता है।

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كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَاهَا ﴾ 11 ﴿

Transliteration

कज्ज़बत समूदु बितग वाहा

हिंदी अनुवाद

"समूद" जाति ने अपने दुराचार के कारण (ईशदूत) को झुठलाया।

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إِذِ انبَعَثَ أَشْقَاهَا ﴾ 12 ﴿

Transliteration

इज़िम बअसा अश क़ाहा

हिंदी अनुवाद

जब उनमें से एक हत्भागा तैयार हुआ।

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فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ نَاقَةَ اللَّهِ وَسُقْيَاهَا ﴾ 13 ﴿

Transliteration

फ़ क़ाल लहुम रसूलुल लाहि नाक़तल लाहि व सुक्याहा

हिंदी अनुवाद

(ईशदूत सालेह ने) उनसे कहा कि अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी की रक्षा करो।

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فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنبِهِمْ فَسَوَّاهَا ﴾ 14 ﴿

Transliteration

फ़ कज्ज़बूहु फ़ अक़रूहा फ़दमदमा अलैहिम रब्बुहुम बिज़म बिहिम फ़सव्वाहा

हिंदी अनुवाद

किन्तु, उन्होंने नहीं माना और उसे वध कर दिया, जिसके कारण उनके पालनहार ने यातना भेज दी और उन्हें चौरस कर दिया।

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وَلَا يَخَافُ عُقْبَاهَا ‎ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

वला यख़ाफु उक्बाहा

हिंदी अनुवाद

और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।[1] 1. (11-15) इन आयतों में समूद जाति का ऐतिहासिक उदाहरण दे कर दूतत्व (रिसालत) का महत्व समझाया गया है कि नबी इस लिये भेजा जाता है ताकि भलाई और बुराई का जो स्वभाविक ज्ञान अल्लाह ने इन्सान के स्वभाव में रख दिया है उसे उभारने में उस की सहायता करे। ऐसे ही एक नबी जिन का नाम सालेह था समूद की जाति की ओर भेजे गये। परन्तु उन्होंने उन को नहीं माना, तो वे ध्वस्त कर दिये गये। उस समय मक्का के मूर्ति पूजकों की स्थिति समूद जाति से मिलती जुलती थी। इस लिये उन को सालेह नबी की कथा सुना कर सचेत किया जा रहा है कि सावधान कहीं तुम लोग भी समूद की तरह यातना में न घिर जाओ। वह तो हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की इस प्रार्थना के कारण बच गये कि हे अल्लाह! इन्हें नष्ट न कर। क्योंकि इन्हीं में से ऐसे लोग उठेंगे जो तेरे धर्म का प्रचार करेंगे। इस लिये कि अल्लाह ने आप सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम को सारे संसारों के लिये दयालु बना कर भेजा था।

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