सूरह क्रियामा के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है. इस में 40 आयतें हैं।
- इस की प्रथम आयत में क्यामत (प्रलय) की शपथ ली गई है जिस से इस का नाम सूरह कियामाः है।
- इस में प्रलय के निश्चित होने का वर्णन करते हुये संदेहों को दूर किया गया है। और उस की कुछ स्थितियों को प्रस्तुत किया गया है।
- इस में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को वह्मी ग्रहण करने के विषय में कुछ निर्देश दिये गये हैं।
- आयत 20 से 25 तक विरोधियों को मायामोह पर चेतावनी देते हुये, प्रलय के दिन सदाचारियों की सफलता तथा दुराचारियों की विफलता दिखाई गई है।
- आयत 26 में मौत की दशा दिखाई गई है।
- आयत 31 से 35 तक प्रलय को न मानने वालों की निन्दा की गई है।
- अन्त में फिर जीवित किये जाने के प्रमाण प्रस्तुत किये गये हैं।
सूरह अल-कियामा | Surah Al Qiyamah in Hindi
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
لَا أُقْسِمُ بِيَوْمِ الْقِيَامَةِ ﴾ 1 ﴿
ला उक्सिमु बि यौमिल क़ियामह
मैं शपथ लेता हूँ क़्यामत (प्रलय) के दिन[1] की! 1. किसी चीज़ की शपथ लेने का अर्थ होता है उस का निश्चित् होना। अर्थात प्रलय का होना निश्चित् है।
وَلَا أُقْسِمُ بِالنَّفْسِ اللَّوَّامَةِ ﴾ 2 ﴿
वला उक्सिमु बिन्नफ्सिल लौ वामह
तथा शपथ लेता हूँ निन्दा[1] करने वाली अन्तरात्मा की। 1. मनुष्य के अन्तरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उस की निन्दा करती है।
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَلَّن نَّجْمَعَ عِظَامَهُ ﴾ 3 ﴿
अ यह्सबुल इंसानु अल्लन नज’म अ अिजामह
क्या मनुष्य समझता है कि हम एकत्र नहीं कर सकेंगे दोबारा उसकी अस्थियों को?
بَلَىٰ قَادِرِينَ عَلَىٰ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُ ﴾ 4 ﴿
बला क़ादिरीना अला अन नु स्वविया बनानह
क्यों नहीं? हम सामर्थ्वान हैं इस बात पर कि सीधी कर दें, उसकी उंगलियों की पोर-पोर।
بَلْ يُرِيدُ الْإِنسَانُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُ ﴾ 5 ﴿
बल युरीदुल इंसानु लियफ्जुरा अमामह
बल्कि मनुष्य चाहता है कि वह कुकर्म करता रहे अपने आगे[1] भी। 1. अर्थात वह प्रलय तथा ह़िसाब का इन्कार इस लिये करता है ताकि वह पूरी आयु कुकर्म करता रहे।
يَسْأَلُ أَيَّانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ ﴾ 6 ﴿
यस’अलु अयैया’न यौमुल क़ियामह
वह प्रश्न करता है कि कब आना है प्रलय का दिन?
فَإِذَا بَرِقَ الْبَصَرُ ﴾ 7 ﴿
फ इज़ा बरिक़ल बसर
तो जब चुंधिया जायेगी आँख।
وَجُمِعَ الشَّمْسُ وَالْقَمَرُ ﴾ 9 ﴿
व जुमिअश् शम्सु वल क़मर
और एकत्र कर दिये[1] जायेंगे सूर्य और चाँद। 1. अर्थात दोनों पश्चिम से अन्धेरे हो कर निकलेंगे।
يَقُولُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ الْمَفَرُّ ﴾ 10 ﴿
यकूलुल इंसानु यौमा इज़िन अयैनल मफ़र
कहेगा मनुष्य उस दिन कि कहाँ है भागने का स्थान?
كَلَّا لَا وَزَرَ ﴾ 11 ﴿
कल्ला ला वज़र
कदापि नहीं, कोई शरणागार नहीं।
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمُسْتَقَرُّ ﴾ 12 ﴿
इला रब्बिका यौमा इज़िनिल मुस्तक़र
तेरे पालनहार की ओर ही उस दिन जाकर रुकना है।
يُنَبَّأُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ ﴾ 13 ﴿
युनब्बाउल इंसानु यौमा इज़िम बिमा क़द्दमा व अख्खर
सूचित कर दिया जायेगा मनुष्य को उस दिन उससे, जो उसने आगे भेजा तथा जो पीछे[1] छोड़ा। 1. अर्थात संसार में जो कर्म किया। और जो करना चाहिये था फिर भी नहीं किया।
بَلِ الْإِنسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ ﴾ 14 ﴿
बलिल इंसानु अला नफ्सिही बसीरह
बल्कि मनुष्य स्वयं अपने विरुध्द एक खुला[1] प्रमाण है। 1. अर्थात वह अपने अपराधों को स्वयं भी जानता है क्योंकि पापी का मन स्वयं अपने पाप की गवाही देता है।
وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ ﴾ 15 ﴿
वलौ अल्क़ा मआज़ीरह
चाहे वह कितने ही बहाने बनाये।
لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ ﴾ 16 ﴿
ला तुहर्रिक बिही लि सानका लि तअ्जला बिही
हे नबी! आप न हिलायें[1] अपनी ज़ुबान, ताकि शीघ्र याद कर लें इस क़ुर्आन को। 1. ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़रिश्ते जिब्रील से वह़्यी पूरी होने से पहले इस भय से उसे दुहराने लगते कि कुछ भूल न जायें। उसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4928, 4929) इसी विषय को सूरह ताहा तथा सूरह आला में भी दुहराया गया है।
إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ ﴾ 17 ﴿
इन्ना अलैना जम् अहू व क़ुरआनह
निश्चय हमपर है उसे याद कराना और उसे पढ़ाना।
فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ ﴾ 18 ﴿
फ इजा क़रानाहु फत्तबिअ् क़ुरआनह
अतः, जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पीछे पढ़ें।
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ ﴾ 19 ﴿
सुम्मा इन्ना अलैना बयानह
फिर हमारे ही ऊपर है, उसका अर्थ बताना।
كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ ﴾ 20 ﴿
कल्ला बल तुहिब्बूनल आजिलह
कदापि नहीं[1], बल्कि तुम प्रेम करते हो शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से। 1. यहाँ से बात फिर काफ़िरों की ओर फिर रही है।
وَتَذَرُونَ الْآخِرَةَ ﴾ 21 ﴿
व तज़ारूनल आखिरह
और छोड़ देते हो परलोक को।
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاضِرَةٌ ﴾ 22 ﴿
वुजूहुइ यौमाइजिन नाजिरह
बहुत-से मुख उस दिन प्रफुल्ल होंगे।
إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌ ﴾ 23 ﴿
इला रब्बिहा नाज़िरह
अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।
وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ بَاسِرَةٌ ﴾ 24 ﴿
व वुजूहुइ यौमा इजिम बासिरह
और बहुत-से मुख उदास होंगे।
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ ﴾ 25 ﴿
त’जुन्नु अयै’युफअला बिहा फाक़िरह
वह समझ रहे होंगे कि उनके साथ कड़ा व्यवहार किया जायेगा।
كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ ﴾ 26 ﴿
कल्ला इज़ा बलागतित तराक़ी
कदापि नहीं[1], जब पहुँचेगी प्राण हंसलियों (गलों) तक। 1. अर्थात यह विचार सह़ीह़ नहीं कि मौत के पश्चात् सड़-गल जायेंगे और दोबारा जीवित नहीं किये जायेंगे। क्योंकि आत्मा रह जाती है जो मौत के साथ ही अपने पालनहार की ओर चली जाती है।
وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ ﴾ 27 ﴿
व क़ीला मन..राक़
और कहा जायेगाः कौन झाड़-फूँक करने वाला है?
وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ ﴾ 28 ﴿
व जन्ना अन्नहुल फिराक़
और विश्वास हो जायेगा कि ये (संसार से) जुदाई का समय है।
وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ ﴾ 29 ﴿
वल तफ्फतिस साकु बिस्साक़
और मिल जायेगी पिंडली, पिंडली[1] से। 1. अर्थात मौत का समय आ जायेगा जो निरन्तर दुःख का समय होगा। (इब्ने कसीर)
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ ﴾ 30 ﴿
इला रब्बिका यौमा इजिनिल मसाक़
तेरे पालनहार की ओर उसी दिन जाना है।
فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ ﴾ 31 ﴿
फला सद्दक़ा वला सल्ला
तो न उसने सत्य को माना और न नमाज़ पढ़ी।
وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ﴾ 32 ﴿
वलाकिन् कज्ज़बा वतावल्ला
किन्तु झुठलाया और मुँह फेर लिया।
ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰ أَهْلِهِ يَتَمَطَّىٰ ﴾ 33 ﴿
सुम्मा ज़हबा इला अहलिही यता मत्ता
फिर, गया अपने परिजनों की ओर अकड़ता हआ।
أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ ﴾ 34 ﴿
औला लका फ औला
शोक है तेरे लिए, फिर शोक है।
ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ ﴾ 35 ﴿
सुम्मा औला लका फ औला
फिर शोक है तेरे लिए, फिर शोक है।
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ﴾ 36 ﴿
अ यह्सबुल इंसानु अयैयुतरका सुद
क्या मनुष्य समझता है कि वह छोड़ दिया जायेगा व्यर्थ?[1] 1. अर्थात न उसे किसी बात का आदेश दिया जायेगा और न रोका जायेगा और न उस से कर्मों का ह़िसाब लिया जायेगा।
أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِّن مَّنِيٍّ يُمْنَىٰ ﴾ 37 ﴿
अलम यकु नुत्फतम्म मिम मनियिइ युमना
क्या वह नहीं था वीर्य की बूंद, जो (गर्भाशय में) बूँद-बूँद गिराई जाती है।?
ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ ﴾ 38 ﴿
सुम्मा काना अलाकतन फ ख ल का फ सव्वा
फिर वह बंधा रक्त हुआ, फिर अल्लाह ने उसे पैदा किया और उसे बराबर बनाया।
فَجَعَلَ مِنْهُ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ ﴾ 39 ﴿
फजा अ ला मिन्हुज़ ज़ुजैनिज़ जकारा वल उन्सा
फिर उसका जोड़ाः नर और नारी बनाया।