सूरह कारिअह के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है, इस में 11 आयतें हैं।
- इस की प्रथम आयत में क्यामत को ((कारिअह)) कहा गया है। अर्थात खड़ खड़ाने वाली आपदा । और इसी से इस का यह नाम रखा गया है।
- आयत 1 से 5 तक प्रलय के समय की स्थिति से सूचित किया गया है।
- आयत 6,7 में जिन के कर्म न्याय के तराजू में भारी होंगे उन का अच्छा परिणाम बताया गया है। [1]
- आयत 8 से 11 तक में उन का दुष्परिणाम बताया गया है जिन के कर्म न्याय के तराजू में हल्के होंगे। और नरक की वास्तविक्ता बताई गई है।
सूरह अल-क़ारिअह | Surah Al Qariah in Hindi
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْقَارِعَةُ ﴾ 3 ﴿
वमा अदराका मल कारिया
और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली क्या है?[1] 1. 'क़ारिअह' प्रलय ही का एक नाम है जो उस के समय की घोर दशा का चित्रण करता है। इस का शाब्दिक अर्थ द्वार खटखटाना है। जब कोई अतिथि अकस्मात रात में आता है तो उसे दरवाज़ा खटखटाने की आवश्यकता होती है। जिस से एक तो यह ज्ञात हुआ कि प्रलय अकस्मात होगी। और दूसरा यह ज्ञात हुआ कि वह कड़ी ध्वनि और भारी उथल पुथल के साथ आयेगी। इसे प्रश्नवाचक वाक्यों में दोहराना सावधान करने और उस की गंभीरता को प्रस्तुत करने के लिये है।
يَوْمَ يَكُونُ النَّاسُ كَالْفَرَاشِ الْمَبْثُوثِ ﴾ 4 ﴿
यौमा यकूनुन नासू कल फराशिल मबसूस
जिस दिन लोग, बिखरे पतिंगों के समान (व्याकूल) होंगे।
وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ الْمَنفُوشِ ﴾ 5 ﴿
वताकूनुल जिबालू कल इहनिल मनफूश
और पर्वत, धुनी हुई ऊन के समान उडेंगे।[1] 1. (4-5) इन दोनों आयतों में उस स्थिति को दर्शाया गया है जो उस समय लोगों और पर्वतों की होगी।
فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ ﴾ 6 ﴿
फ अम्मा मन सकुलत मवा ज़ीनुहू
तो जिसके पलड़े भारी हुए,
فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ ﴾ 7 ﴿
फहुवा फी ईशा तिर रादिया
तो वह मनचाहे सुख में होगा।
وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ ﴾ 8 ﴿
व अम्मा मन खफ़्फ़त मवा ज़ीनुहु
तथा जिसके पलड़ हल्के हुए,
فَأُمُّهُ هَاوِيَةٌ ﴾ 9 ﴿
फ उम्मुहु हविया
तो उसका स्थान 'हाविया' है।
وَمَا أَدْرَاكَ مَا هِيَهْ ﴾ 10 ﴿
वमा अद्राका मा हिया
और तुम क्या जानो कि वह (हाविया) क्या है?
نَارٌ حَامِيَةٌ ﴾ 11 ﴿
नारून हमिया
वह दहक्ती आग है।[1] 1. (6-11) इन आयतों में यह बताया गया है कि प्रलय क्यों होगी? इस लिये कि इस संसार में जिस ने भले बुरे कर्म किये हैं उन का प्रतिकार कर्मों के आधार पर दिया जाये, जिस का परिणाम यह होगा कि जिस ने सत्य विश्वास के साथ सत्कर्म किया होगा वह सुख का भागी होगा। और जिस ने निर्मल परम्परागत रीतियों को मान कर कर्म किया होगा वह नरक में झोंक दिया जायेगा।