58. सूरह अल-मुजादिला – 1-22

सूरह मुजादिला के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मनी है, इस में 22 आयतें हैं।

  • मुजादिला का अर्थ हैः झगड़ा और तकरार । इस के आरंभ में एक नारी की तकरार का वर्णन है। इसलिये इस का नाम सूरह मुजादिला है।
  • इस में ज़िहार के विषय में धार्मिक नियमों को बताया गया है। साथ ही इन नियमों का इन्कार करने पर कड़े दण्ड की चेतावनी दी गई है।
  • आयत 7 से 11 तक मुनाफ़िको के षड्यंत्र और उपद्रव की चचर्चा करते हुये ईमान वालों के सामाजिक नियमों के निर्देश दिये गये हैं।
  • आयत 12 और 13 में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ काना फूसी के सम्बंध में एक विशेष आदेश दिया गया है।
  • अन्त में द्विधावादियों (मुनाफिकों) की पकड़ करते हुये सच्चे ईमान वालों के लक्षण बताये गये हैं।

सूरह अल-मुजादिला | Surah Mujadila in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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قَدْ سَمِعَ اللَّهُ قَوْلَ الَّتِي تُجَادِلُكَ فِي زَوْجِهَا وَتَشْتَكِي إِلَى اللَّهِ وَاللَّهُ يَسْمَعُ تَحَاوُرَكُمَا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ ‎ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

क़द् समिअल्लाहु क़ौलल्लती तुजादिलु – क फ़ी ज़ौजिहा व तश्तकी इलल्लाहि वल्लाहु यस्-मअु तहावु-रकुमा, इन्नल्ला-ह समीअुम्-बसीर

हिंदी अनुवाद

(हे नबी!) अल्लाह ने सुन ली है उस स्त्री की बात, जो आपसे झगड़ रही थी अपने पति के विषय में तथा गुहार रही थी अल्लाह को और अल्लाह सुन रहा था तुम दोनों का वार्तालाप, वास्तव में, वह सब कुछ सुनने-देखने वाला है।

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الَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَائِهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَاتِهِمْ ۖ إِنْ أُمَّهَاتُهُمْ إِلَّا اللَّائِي وَلَدْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَيَقُولُونَ مُنكَرًا مِّنَ الْقَوْلِ وَزُورًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

अल्लज़ी – न यु ज़ाहिरू-न मिन्कुम् मिन्- निसा – इहिम् मा हुन्-न उम्महाति-हिम्, इन् उम्महातुहुम् इल्लल्-लाई व-लद्- नहुम्, व इन्नहुम् ल यक़ूलू-न मुन्करम् मिनल्-क़ौलि वज़ूरन्, व इन्नल्ला-ह ल-अ़फ़ुव्वुन् ग़फ़ूर

हिंदी अनुवाद

जो ज़िहार[1] करते हैं तुममें से अपनी पत्नियों से, तो वे उनकी माँ नहीं हैं। उनकी माँ तो वे हैं, जिन्होंने उनहें जन्म दिया है और वह बोलते हैं अप्रिय तथा झूठी बात और वास्तव में अल्लाह माफ़ करने वाला, क्षमाशील है। 1. ज़िहार का अर्थ है पति का अपनी पत्नी से यह कहना कि तू मुझ पर मेरी माँ की पीठ के समान है। इस्लाम से पूर्व अरब समाज में यह कुरीति थी कि पति अपनी पत्नी से यह कह देता तो पत्नी को तलाक़ हो जाती थी। और सदा के लिये पति से विलग हो जाती थी। और इस का नाम 'ज़िहार' था। इस्लाम में एक स्त्री जिस का नाम ख़ौला (रज़ियल्लाहु अन्हा) है उस से उस के पति औस पुत्र सामित (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने ज़िहार कर लिया। ख़ौला (रज़ियल्लाहु अन्हा) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई। और आप से इस विषय में झगड़ने लगी। उस पर यह आयतें उतरीं। (सह़ीह़ अबूदाऊदः 2214)। आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहाः मैं उस की बात नहीं सुन सकी। और अल्लाह ने सुन ली। (इब्ने माजाः 156, यह ह़दीस सह़ीह़ है।)

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وَالَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِن نِّسَائِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مِّن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۚ ذَٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

वल्लज़ी – न युज़ाहिरू- न मिन् निसा – इहिम् सुम्- मउदू-न लिमा कालू फ़ तह्-रीरु र-क़-बतिम्-मिन् क़ब्लि अंय्य-तमास्सा, ज़ालिकुम् तू अ़ज़ू-न बिही, वल्लाहु बिमा तअ्मलू- न ख़बीर

हिंदी अनुवाद

और जो ज़िहार कर लेते हैं अपनी पत्नियों से, फिर वापस लेना चाहते हैं अपनी बात, तो (उसका दण्ड) एक दास मुक्त करना है, इससे पूर्व कि एक-दूसरे को हाथ लगायें।[1] इसीकी तुम्हें शिक्षा दी जा रही है और अल्लाह उससे जो तुम करते हो, भली-भाँति सूचित है। 1. हाथ लगाने का अर्थ संभोग करना है। अर्थात संभोग से पहले प्रायश्चित चुका दे।

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‏ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۖ فَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ فَإِطْعَامُ سِتِّينَ مِسْكِينًا ۚ ذَٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۗ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

फ़-मल्लम् यजिद् फ़सियामु श ह्-रैनि मु-तताबि अैनि मिन् क़ब्लि अंय्य-तमास्सा, फ़-मल्-लम् यस्ततिअ् फ़-इत्आमु सित्ती – न मिस्कीनन्, ज़ालि क लितु अ्मिनू बिल्लाहि व रसूलिही, व तिल् क हुदूदुल्लाहि, व लिल्का फ़िरी-न अ़ज़ाबुन् अलीम

हिंदी अनुवाद

फिर जो (दास) न पाये, तो दो महीने निरन्तर रोज़ा (व्रत) रखना है, इससे पूर्व की एक-दूसरे को हाथ लगाये। फिर जो सकत न रखे, तो साठ निर्धनों को भोजन कराना है। ये आदेश इसलिए है, ताकि तुम ईमान लाओ अल्लाह तथा उसके रसूल पर और ये अल्लाह की सीमायें हैं तथा काफ़िरों के लिए दुःखदायी यातना है।

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إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

इन्नल्लज़ी – न युहाद्दूनल्लाह व रसूलहू कुबितू कमा कुबितल्लज़ी – न मिन् क़ब्लिहिम् व क़द् अन्ज़ल्ना आयातिम्-बय्यिनातिन्, व लिल्काफ़िरी-न अ़ज़ाबुम् मुहीन

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, जो विरोध करते हैं अल्लाह तथा उसके रसूल का, वे अपमानित कर दिये जायेंगे, जैसे अपमानित कर दिये गये, जो इनसे पूर्व हुए और हमने उतार दी हैं खुली आयतें और काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना है।

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يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

यौ-म यब्अ़सुहुमुल्लाहु जमीअ़न् फ़-युनब्बिउहुम् बिमा अ़मिलू, अह्साहुल्लाहु व नसूहु, वल्लाहु अ़ला कुल्लि शैइन् शहीद

हिंदी अनुवाद

जिस दिन जीवित करेगा उन सब को अल्लाह, तो उन्हें सूचित कर देगा उनके कर्मों से। गिन रखा है उसे अल्लाह ने और वह भूल गये हैं उसे और अल्लह प्रत्येक वस्तु पर गवाह है।

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أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ ‎ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

अलम् त-र अन्नल्ला-ह यअ्लमु मा फ़िस्समावाति व मा फ़िल्अर्ज़ि, मा यकूनु मिन्-नज्वा सला-सतिन् इल्ला हु-व राबिअुहुम् व ला ख़म्सतिन् इल्ला हु-व सादिसुहुम् व ला अद्ना मिन् ज़ालि-क व ला अक्स र इल्ला हु-व म अ़हुम् ऐ न मा कानू सुम्-म युनब्बिउहुम् बिमा अ़मिलू यौमल्- क़ियामति, इन्नल्ला-ह बिकुल्लि शैइन् अ़लीम

हिंदी अनुवाद

क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह जानता है, जो (भी) आकाशों तथा धरती में है? नहीं होती किसी तीन की काना-फूसी, परन्तु वह उनका चौथा होता है और न पाँच की, परन्तु वह उनका छठा होता है और न इससे कम की और न इससे अधिक की, परन्तु वह उनके साथ होता[1] है, वे जहाँ भी हों। फिर वह उन्हें सूचित कर देगा उनके कर्मों से प्रलय के दिन। वास्तव में, अल्लाह प्रत्येक वस्तु से भली-भाँति अवगत है। 1. अर्थात जानता और सुनता है।

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أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

अलम् त-र इलल्लज़ी-न नुहू अ़निन्-नज्वा सुम्-म यअूदू-न लिमा नुहू अ़न्हु व य-तनाजौ-न बिल्इस्मि वल्- अुद्वानि व मअ्सि – यतिर्रसूलि व इज़ा जाऊ -क हय्यौ-क बिमा लम् युहय्यि-क बिहिल्लाहु व यक़ूलू-न फ़ी अ़न्फुसिहिम् लौ ला युअ़ज़्ज़िबुनल्लाहु बिमा नक़ूलु, हस्बुहुम् जहन्नमु यस्लौनहा फ़-बिअ्सल्-मसीर

हिंदी अनुवाद

क्या आपने नहीं देखा उन्हें, जो रोके गये हैं काना-फूसी[1] से? फिर (भी) वही करते हैं जिससे रोके गये हैं तथा काना-फूसी करते हैं पाप और अत्याचार तथा रसूल की अवज्ञा की और वे जब आपके पास आते हैं, तो आपको ऐसे (शब्द से) सलाम करते हैं, जिससे आपपर सलाम नहीं भेजा अल्लाह ने तथा कहते हैं अपने मनों में: क्यों अल्लाह हमें यातना नहीं देता उसपर जो हम कहते[1] हैं? पर्याप्त है उन्हें नरक, जिसमें वे प्रवेश करेंगे, तो बुरा है उनका ठिकाना। 1. इन से अभिप्राय मुनाफ़िक़ हैं। क्योंकि उन की काना फूसी बुराई के लिये होती थी। (देखियेः सूरह निसा, आयतः 144)। 2. मुनाफ़िक़ और यहूदी जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सेवा में आते तो "अस्सलामो अलैकुम" (अनुवादः आप पर सलाम और शान्ति हो) की जगह "अस्सामो अलैकुम" (अनुवादः आप पर मौत आये।) कहते थे। और अपने मन में यह सोचते थे कि यदि आप अल्लाह के सच्चे रसूल होते तो हमारे इस दुराचार के कारण हम पर यातना आ जाती। और जब कोई यातना नहीं आई तो आप अल्लाह के रसूल नहीं हो सकते। ह़दीस में है कि यहूदी तुम को सलाम करें तो वह "अस्सामो अलैका" कहते हैं, तो तुम "व अलैका" कहो। अर्थात और तुम पर भी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6257, सह़ीह़ मुस्लिमः 2164)।

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‏ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनू इज़ा तनाजैतुम् फ़ला त-तनाजौ बिल्इस्मि वल्अुद्वानि व मअ्सि यतिर्-रसूलि व तनाजौ बिल्-बिर्रि वत्तक़्वा, वत्तक़ुल्लाहल्लज़ी इलैहि तुह्शरून

हिंदी अनुवाद

हे लोगो जो ईमान लाये हो! जब तुम काना-फूसी करो, तो काना-फूसी न करो पाप तथा अत्याचार एवं रसूल की अवज्ञा की और काना फूसी करो पुण्य तथा सदाचार की और डरते रहो अल्लाह से, जिसकी ओर ही तुम एकत्र किये जोओगे।

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إِنَّمَا النَّجْوَىٰ مِنَ الشَّيْطَانِ لِيَحْزُنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيْسَ بِضَارِّهِمْ شَيْئًا إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

इन्नमन्- नज्वा मिनश्- शैतानि लियह्जुनल्लज़ी-न आमनू व लै-स बिज़ार्रिहिम् शैअन् इल्ला बि-इज़्निल्लाहि, व अ़लल्लाहि फ़ल्य-तवक्कलिल्-मुअ्मिनून

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, काना-फूसी शैतानी काम हैं, ताकि वो उदासीन हों,[1] जो ईमान लाये। जबकि नहीं है वह हानिकर उन्हें कुछ, परन्तु अल्लाह की अनुमति से और अल्लाह ही पर चाहिये कि भरोसा करें ईमान वाले। 2. ह़दीस में है कि जब तुम तीन एक साथ रहो तो दो आपस में काना फूसी न करें। क्योंकि इस से तीसरे को दुःख होता है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6290, सह़ीह़ मुस्लिमः 2184)

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‏ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا فِي الْمَجَالِسِ فَافْسَحُوا يَفْسَحِ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ انشُزُوا فَانشُزُوا يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ دَرَجَاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनू इज़ा क़ी-ल लकुम् तफ़स्सहू फ़िल्-मजालिसि फ़फ़्सहू यफ़सहिल्लाहु लकुम् व इज़ा क़ीलन्शुज़ू फ़न्शुज़ू यर्फअिल्लाहुल्लज़ी-न आमनू मिन्कुम् वल्लज़ी-न ऊतुल्-अिल्- म द रजातिन्, वल्लाहु बिमा तअ्मलू-न ख़बीर

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! जब तुमसे कहा जाये कि विस्तार कर दो अपनी सभाओं में, तो विस्तार[1] कर दो, विस्तार कर देगा अल्लाह तुम्हारे लिए तथा जब कहा जाये कि सुकड़ जाओ, तो सुकड़ जाओ। ऊँचा[2] कर देगा अल्लाह उन्हें, जो ईमान लाये हैं तुममें से तथा जिन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, कई श्रेणियाँ तथा अल्लाह उससे जो तुम करते हो, भली-भाँति अवगत है। 1. भावार्थ यह है कि कोई आये तो उसे भी खिसक कर और आपस में सुकड़ कर जगह दो। 2. ह़दीस में है कि जो अल्लाह के लिये झुकता और अच्छा व्यवहार चयन करता है तो अल्लाह उसे ऊँचा कर देता है। (सह़ीह़ मुस्लिमः 2588)

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يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ‎ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी – न आमनू इज़ा नाजैतुमुर्रसू-ल फ़-क़द्दिमू बै-न यदै नज्वाकुम् स-द-क़तन्, ज़ालि – क ख़ैरुल – लकुम् व अत्हरु, फ़-इल्लम् तजिदू फ़-इन्नल्ला-ह ग़फ़ूरुर्-रहीम

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! जब तुम अकेले बात करो रसूल से, तो बात करने से पहले कुछ दान करो।[1] ये तुम्हारे लिए उत्तम तथा अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम (दान के लिए कुछ) न पाओ, तो अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है। 1. प्रत्येक मुसलमान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से एकांत में बात करना चाहता था। जिस से आप को परेशानी होती थी। इस लिये यह आदेश दिया गया।

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أَأَشْفَقْتُمْ أَن تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَاتٍ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

अ-अश्फ़क़्तुम् अन् तुकद्दिमू बै-न यदै नज्वाकुम् स-द- क़ातिन्, फ़-इज़् लम् तफ़्अलू व ताबल्लाहु अ़लैकुम् फ़- अक़ीमुस्सला-त व आतुज़्ज़का-त व अती अुल्ला-ह व रसूलहू, वल्लाहु ख़बीरुम् – बिमा तअ्मलून

हिंदी अनुवाद

क्या तुम (इस आदेश से) डर गये कि एकान्त में बात करने से पहले कुछ दान कर दो? फिर जब तुमने ऐसा नहीं किया, तो स्थापना करो नमाज़ की तथा ज़कात दो और आज्ञा पालन करो अल्लाह तथा उसके रसूल की और अल्लाह सूचित है उससे, जो कुछ तुम कर रहे हो।

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أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ تَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم مَّا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ وَيَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

अमल् त र इलल्लज़ी-न तवल्लौ क़ौमन् ग़ज़ि बल्लाहु अ़लैहिम्, मा हुम्-मिन्कुम् व ला मिन्हुम् व य ह्लिफ़ू-न अ़लल्-कज़िबि व हुम् य अ्लमून

हिंदी अनुवाद

क्या आपने उन्हें देखा[1] जिन्होंने मित्र बना लिया उस समुदाय को, जिसपर क्रोधित हो गया अल्लाह? न वे तुम्हारे हैं और न उनके और वे शपथ लेते हैं झूठी बात पर, जान-बूझ कर। 1. इस से संकेत मुनाफ़िक़ों की ओर है जिन्होंने यहूदियों को अपना मित्र बना रखा था।

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أَعَدَّ اللَّهُ لَهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا ۖ إِنَّهُمْ سَاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

अ-अ़द्दल्लाहु लहुम् अ़ज़ाबन् शदीदन्, इन्नहुम् सा-अ मा कानू यअ्मलून

हिंदी अनुवाद

तैयार की है अल्लाह ने उनके लिए कड़ी यातना, वास्तव में, वह बुरा है, जो वे कर रहे हैं।

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اتَّخَذُوا أَيْمَانَهُمْ جُنَّةً فَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ فَلَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

इत्त-ख़ज़ू ऐमा-नहुम् जुन्नतन् फ़-सद्दू अ़न् सबीलिल्लाहि फ़-लहुम् अ़ज़ाबुम्-मुहीन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने बना लिया अपनी शपथों को एक ढाल। फिर रोक दिया (लोगों को) अल्लाह की रोह से, तो उन्हीं के लिए अपमानकारी यातना है।

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لَّن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

लन् तुग़्नि-य अ़न्हुम् अम्वालुहुम् व ला औलादुहुम् मिनल्लाहि शैअन्, उलाइ-क अस्हाबुन्- नारि, हुम् फ़ीहा ख़ालिदून

हिंदी अनुवाद

कदापि नहीं काम आयेंगे उनके धन और न उनकी संतान अल्लाह के समक्ष कुछ। वही नारकी हैं, वे उसमें सदावासी होंगे।

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يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيَحْلِفُونَ لَهُ كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ ۖ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

यौ-म यब्-अ़सुहुमुल्लाहु जमीअ़न् फ़-यह्लिफ़ू-न लहू कमा यह्लिफ़ू-न लकुम् व यह्सबू-न अन्नहुम् अ़ला शैइन्, अला इन्नहुम् हुमुल् – काज़िबून

हिंदी अनुवाद

जिस दिन खड़ा करेगा उन्हें अल्लाह, तो वे शपथ लेंगे अल्लाह के समक्ष, जैसे वे शपथ ले रहे हैं तुम्हारे समक्ष और वे समझ रहे हैं कि वे कुछ (तर्क)[1] पर हैं। सुन लो! वास्तव में वही झूठे हैं। 1. अर्थात उन्हें अपनी शपथ का कुछ लाभ मिल जायेगा जैसे दुनिया में मिलता रहा।

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اسْتَحْوَذَ عَلَيْهِمُ الشَّيْطَانُ فَأَنسَاهُمْ ذِكْرَ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ الشَّيْطَانِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ الشَّيْطَانِ هُمُ الْخَاسِرُونَ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

इस्तह् – व -ज़ अ़लैहिमुश्शैतानु फ़-अन्साहुम् ज़िक्रल्लाहि, उलाइ क हिज़्बुश् – शैतानि, अला इन्-न हिज़्बश्शैतानि हुमुल् – ख़ासिरून

हिंदी अनुवाद

छा[1] गया है उनपर शैतान और भुला दी है उन्हें अल्लाह की याद। यही शैतान की सेना है। सुन लो! शैतान की सेना ही क्षतिग्रस्त होने वाली है। 1. अर्थात उन को अपने नियंत्रण में ले रखा है।

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إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ أُولَٰئِكَ فِي الْأَذَلِّينَ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

इन्नल्लज़ी-न युहाद्दूनल्ला ह व रसूलहू उलाइ क फ़िल्-अज़ल्लीन

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, जो विरोध करते हैं अल्लाह तथा उसके रसूल का, वही अपमानितों में से हैं।

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كَتَبَ اللَّهُ لَأَغْلِبَنَّ أَنَا وَرُسُلِي ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

क – तबल्लाहु ल-अग़्लिबन्-न अ-न व रसुली, इन्नल्ला-ह क़विय्युन् अ़ज़ीज़

हिंदी अनुवाद

लिख रखा है अल्लाह ने कि अवश्य मैं प्रभावशाली (विजयी) रहूँगा[1] तथा मेरे रसूल। वास्तव में, अल्लाह अति शक्तिशाली, प्रभावशाली है। 1. (देखियेः सूरह मुमिन, आयतः 51-52)

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لَّا تَجِدُ قَوْمًا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ يُوَادُّونَ مَنْ حَادَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَوْ كَانُوا آبَاءَهُمْ أَوْ أَبْنَاءَهُمْ أَوْ إِخْوَانَهُمْ أَوْ عَشِيرَتَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ الْإِيمَانَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٍ مِّنْهُ ۖ وَيُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ اللَّهِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ اللَّهِ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

ला तजिदु क़ौमंय् – युअ्मिनू-न बिल्लाहि वल्यौमिल् – आख़िरि युवाद्-दू-न मन् हाद्दल्ला-ह व रसूलहू व लौ कानू आबा-अहुम् औ अब्ना-अहुम् औ इख़्वा-नहुम् औ अ़शी-र-तहुम्, उलाइ-क क-त-ब फ़ी क़ुलूबिहिमुल्-ईमा-न व अय्य-दहुम् बिरूहिम्-मिन्हु, व युद्-ख़िलुहुम् जन्नातिन् तज्री मिन् तह्तिहल्-अन्हारु ख़ालिदी-न फ़ीहा, रज़ियल्लाहु अ़न्हुम् व रज़ू अ़न्हु, उलाइ – क हिज़्बुल्लाहि, अला इन्-न हिज़्बल्लाहि हुमुल्-मुफ़्लिहून

हिंदी अनुवाद

आप नहीं पायेंगे उन्हें, जो ईमान रखते हों अल्लाह तथा अन्त-दिवस (प्रलय) पर कि वे मैत्री करते हों उनसे, जिन्होंने विरोध किया अल्लाह और उसके रसूल का, चाहे वे उनके पिता हों, उनके पुत्र, उनके भाई अथवा उनके परिजन[1] हों। वही हैं, लिख दिया है (अल्लाह ने) जिनके दिलों में ईमान और समर्थन दिया है जिन्हें अपनी ओर से रूह़ (आत्मा) द्वारा तथा प्रवेश देगा उन्हें ऐसे स्वर्गों में, बहती हैं जिनमें नहरें, वे सदावासी होंगे जिनमें। प्रसन्न हो गया अल्लाह उनसे तथा वे प्रसन्न हो गये उससे। वह अल्लाह का समूह है। सुन लो, अल्लाह का समूह ही सफल होने वाला है। 1. इस आयत में इस बात का वर्णन किया गया है कि ईमान, और काफ़िर जो इस्लाम और मुसलमानों के जानी दुश्मन हों उन से सच्ची मैत्री करना एकत्र नहीं हो सकते। अतः जो इस्लाम और इस्लाम के विरोधियों से एक साथ सच्चे सम्बंध रखते हों तो उन का ईमान सत्य नहीं है।

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