सूरह दहर के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है, इस में 31 आयतें हैं।
- इस सूरह में यह शब्द आने के कारण इस का नाम (सूरह दहर) है। इस का दूसरा नाम (सूरह इन्सान) भी है। दहर का अर्थः ((युग)) है।
- इस में मनुष्य की उत्पत्ति का उद्देश्य बताया गया है। और काफिरों के लिये कड़ी यातना का एलान किया गया है।
- आयत 5 से 22 तक सदाचारियों के भारी प्रतिफल का वर्णन है। और 23 से 26 तक नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को धैर्य, नमाज़ तथा तस्बीह का निर्देश दिया गया है। इस के पश्चात् उन को चेतावनी दी गई है जो परलोक से अचेत हो कर मायामोह में लिप्त है।
- अन्त में कुन की शिक्षा मान लेने की प्ररेणा दी गई है। ताकि लोग अल्लाह की दया में प्रवेश करें। और विरोधियों को दुःखदायी यातना की चेतावनी दी गई है।
सूरह अल-इन्सान | Surah Al-Insan in Hindi
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
هَلْ أَتَىٰ عَلَى الْإِنسَانِ حِينٌ مِّنَ الدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْئًا مَّذْكُورًا ﴾ 1 ﴿
हल अता अलल इंसानी हिनुम मिनल दहरि लम यकुन शैअम मज़कूरा
क्या व्यतीत हुआ मनुष्य पर युग का एक समय, जब वह कोई विचर्चित[1] वस्तु न था? 1. अर्थात उस का कोई अस्तित्व न था।
إِنَّا خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَاهُ سَمِيعًا بَصِيرًا ﴾ 2 ﴿
इन्ना खलक़नल इन्साना मिन नुत्फतिन अम्साज, नबतलीहि फजा अल्नाहु समीअम बसीरा
हमने ही पैदा किया मनुष्य को मिश्रित (मिले हुए) वीर्य[1] से, ताकि उसकी परीक्षा लें और बनाया उसे सुनने तथा देखने वाला। 1. अर्थात नर-नारी के मिश्रित वीर्य से।
إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا ﴾ 3 ﴿
इन्ना हदैनाहुस सबीला इम्मा शकिरौ व इम्मा कफूरा
हमने उसे राह दर्शा दी।[1] (अब) वह चाहे तो कृतज्ञ बने अथवा कृतघ्न। 1. अर्थात नबियों तथा आकाशीय पुस्तकों द्वारा, और दोनों का परिणाम बता दिया गया।
إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا ﴾ 4 ﴿
इन्ना अअ्तदना लिल काफिरीना सला सि ल् व अग्लालौं व सईरा
निःसंदेह, हमने तैयार की काफ़िरों (कृतघ्नों) के लिए ज़ंजीर तथा तौक़ और दहकती अग्नि।
إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا ﴾ 5 ﴿
इन्नल अबरारा यशरबूना मिन कासिन काना मिजाजुहा काफूरा
निश्चय सदाचारी (कृतज्ञ) पियेंगे ऐसे प्याले से जिसमें कपूर मिश्रित होगा।
عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ اللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا ﴾ 6 ﴿
अयैनअि यशरबु बिहा यिबादुल्लाहि यु फज्जिरू नहा तफ्जीरा
ये एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के भक्त पियेंगे। उसे बहा ले जायेंगे (जहाँ चाहेंगे)।[1] 1. अर्थात उस को जिधर चाहेंगे मोड़ ले जायेंगे। जैसे घर, बैठक आदि।
يُوفُونَ بِالنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُ مُسْتَطِيرًا ﴾ 7 ﴿
यूफूना बिन नज़रि व यखाफूना यौमन क न शर्रुहू मुस्तत्वीरा
जो (संसार में) पूरी करते रहे मनोतियाँ[1] और डरते रहे उस दिन से[2] जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी। 1. नज़र (मनौती) का अर्थ है, अल्लाह के समिप्य के लिये कोई कर्म अपने ऊपर अनिवार्य कर लेना। और किसी देवी-देवता तथा पीर-फ़क़ीर के लिये मनौती मानना शिर्क है। जिस को अल्लाह कभी भी क्षमा नहीं करेगा। अर्थात अल्लाह के लिये जो मनौतियाँ मानते रहे उसे पूरी करते रहे। 2. अर्थात प्रलय और ह़िसाब के दिन से।
وَيُطْعِمُونَ الطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا ﴾ 8 ﴿
व युत्इमूनत् त्वआ मा अला हुब्बिही मिस्कीनौं व यतीमौं व असीरा
और भोजन कराते रहे उस (भोजन) को प्रेम करने के बावजूद, निर्धन, अनाथ और बंदी को।
إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ اللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَاءً وَلَا شُكُورًا ﴾ 9 ﴿
इन्नमा नुत्वअिमुकुम लि वज्हिल्लाही ला नुरीदु मिन्कुम जज़ाऔं वला शुकूरा
(अपने मन में ये सोचकर) हम तुम्हें भोजन कराते हैं केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए। तुमसे नहीं चाहते हैं कोई बदला और न कोई कृतज्ञता।
إِنَّا نَخَافُ مِن رَّبِّنَا يَوْمًا عَبُوسًا قَمْطَرِيرًا ﴾ 10 ﴿
इन्ना नखाफु मिर्रब्बिना यौमन अबूसा क़म्तरीरा
हम डरते हैं अपने पालनहार से, उस दिन से, जो अति भीषण तथा घोर होगा।
فَوَقَاهُمُ اللَّهُ شَرَّ ذَٰلِكَ الْيَوْمِ وَلَقَّاهُمْ نَضْرَةً وَسُرُورًا ﴾ 11 ﴿
फ व क़ाहुमुल्लाहु शर्रा ज़ालिकल यौमि व लक्क़ाहुम नद् रतौं व सुरूरा
तो बचा लिया अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से और प्रदान कर दिया प्रफुल्लता तथा प्रसन्नता।
وَجَزَاهُم بِمَا صَبَرُوا جَنَّةً وَحَرِيرًا ﴾ 12 ﴿
व जज़ाहुम बिमा स ब रू जन्नतौं व हरीरा
और उन्हें प्रतिफल दिया उनके धैर्य के बदले स्वर्ग तथा रेशमी वस्त्र।
مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۖ لَا يَرَوْنَ فِيهَا شَمْسًا وَلَا زَمْهَرِيرًا ﴾ 13 ﴿
मुत्तकिईना फीहा अलल अराइक, ला यरौना फीहा शम्सौं वला ज़म्हरीरा
वे तकिये लगाये उसमें तख़्तों पर बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे न कड़ा शीत।
وَدَانِيَةً عَلَيْهِمْ ظِلَالُهَا وَذُلِّلَتْ قُطُوفُهَا تَذْلِيلًا ﴾ 14 ﴿
व दानियतन अलैहिम ज़िलालुहा व जुल्लिलत क़ुतुफुहा तज़्लीला
और झुके होंगे उनपर उस (स्वर्ग) के साये और बस में किये होंगे उसके फलों के गुच्छे पूर्णतः।
وَيُطَافُ عَلَيْهِم بِآنِيَةٍ مِّن فِضَّةٍ وَأَكْوَابٍ كَانَتْ قَوَارِيرَا ﴾ 15 ﴿
व युताफु अलैहिम बि आनियतिम् मिनफिज्ज़त्युं व अक्बाबिन कानत क़वारीरअ्
तथा फिराये जायेंगे उनपर चाँदी के बर्तन तथा प्याले जो शीशों के होंगे।
قَوَارِيرَ مِن فِضَّةٍ قَدَّرُوهَا تَقْدِيرًا ﴾ 16 ﴿
क़वारीरअ् मिन फिज्ज़तिन क़द्दरूहा तक़दीरा
चाँदी के शीशों के, जो एक अनुमान से भरेंगे।[1] 1. अर्थात सेवक उसे ऐसे अनुमान से भरेंगे कि न आवश्यक्ता से कम होंगे न अधिक।
وَيُسْقَوْنَ فِيهَا كَأْسًا كَانَ مِزَاجُهَا زَنجَبِيلًا ﴾ 17 ﴿
व युसक़ौना फीहा कासन काना मिजाजुहा ज़न्जबीला
और पिलाये जायेंगे उसमें ऐसे भरे प्याले, जिसमें सोंठ मिली होगी।
عَيْنًا فِيهَا تُسَمَّىٰ سَلْسَبِيلًا ﴾ 18 ﴿
अैनन फीहा तुसम्मा सल्सबीला
ये एक स्रोत है उस (स्वर्ग) में, जिसका नाम सलसबील है।
وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُّخَلَّدُونَ إِذَا رَأَيْتَهُمْ حَسِبْتَهُمْ لُؤْلُؤًا مَّنثُورًا ﴾ 19 ﴿
व यतूफु अलैहिम विल दानुम मुखल्लादून, इज़ा रअै’तहुम हसिब त हुम लूअ्लुअम मंसूरा
और (सेवा के लिए) फिर रहे होंगे उनपर सदावासी बालक, जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें समझोगे कि बिखरे हुए मोती हैं।
وَإِذَا رَأَيْتَ ثَمَّ رَأَيْتَ نَعِيمًا وَمُلْكًا كَبِيرًا ﴾ 20 ﴿
व इज़ा र’अै’त नईमौं व मुल्कन कबीरा
तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो देखोगे बड़ा सुख तथा भारी राज्य।
عَالِيَهُمْ ثِيَابُ سُندُسٍ خُضْرٌ وَإِسْتَبْرَقٌ ۖ وَحُلُّوا أَسَاوِرَ مِن فِضَّةٍ وَسَقَاهُمْ رَبُّهُمْ شَرَابًا طَهُورًا ﴾ 21 ﴿
आलि’यहुम सियाबु सुन्दुसिन खुज्रौं व इस्तब्रक, व हुल्लुहू अ साबिरा मिन फिज्जह्, व सक़ाहुम रब्बुहुम शराबन तहूरा
उनके ऊपर रेशमी हरे महीन तथा दबीज वस्त्र होंगे और पहनाये जायेंगे उन्हें चाँदी के कंगन और पिलायेगा उन्हें उनका पालनहार पवित्र पेय।
إِنَّ هَٰذَا كَانَ لَكُمْ جَزَاءً وَكَانَ سَعْيُكُم مَّشْكُورًا ﴾ 22 ﴿
इन्ना हाज़ा काना लकुम जज़ाऔं व काना सअ्युकुम मश्कूरा
(तथा कहा जायेगाः) यही है तुम्हारे लिए प्रतिफल और तुम्हारे प्रयास का आदर किया गया।
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْقُرْآنَ تَنزِيلًا ﴾ 23 ﴿
इन्ना नहनु नज्ज़लना अलैकल क़ुर’आना तंज़ी’ला
वास्तव में, हमने ही उतारा है आपपर क़ुर्आन थोड़ा-थोड़ा करके।[1] 1. अर्थात नबूवत की तेईस वर्ष की अवधि में, और ऐसा क्यों किया गया इस के लिये देखियेः सूरह बनी इस्राईल, आयतः 106।
فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ آثِمًا أَوْ كَفُورًا ﴾ 24 ﴿
फस्बिर लिहुक्मि रब्बिका वला तु’त्विअ् मिन्हुम आ सिमन औ कफूरा
अतः, आप धैर्य से काम लें अपने पालनहार के आदेशानुसार और बात न मानें, उनमें से किसी पापी तथा कृतघ्न की।
وَاذْكُرِ اسْمَ رَبِّكَ بُكْرَةً وَأَصِيلًا ﴾ 25 ﴿
वज्कुरिस मा रब्बिका बुक् रतौं व असीला
तथा स्मरण करें अपने पालनहार के नाम का, प्रातः तथा संध्या (के समय)।
وَمِنَ اللَّيْلِ فَاسْجُدْ لَهُ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا ﴾ 26 ﴿
व मिनल् लैलि फस्जुद लहू व सब्बिहु लैलन त्वीला
तथा रात्रि में सज्दा करें उसके समक्ष और उसकी पवित्रता का वर्णन करें, रात्रि के लम्बे समय तक।
إِنَّ هَٰؤُلَاءِ يُحِبُّونَ الْعَاجِلَةَ وَيَذَرُونَ وَرَاءَهُمْ يَوْمًا ثَقِيلًا ﴾ 27 ﴿
इन्ना हाऊलाइ युहिब्बूनल आजिलता व य ज़रूना वरा अहुम यौमन सकीला
वास्तव में, ये लोग मोह रखते हैं संसार से और छोड़ रहे हैं अपने पीछे एक भारी दिन[1] को। 1. इस से अभिप्राय प्रलय का दिन है।
نَّحْنُ خَلَقْنَاهُمْ وَشَدَدْنَا أَسْرَهُمْ ۖ وَإِذَا شِئْنَا بَدَّلْنَا أَمْثَالَهُمْ تَبْدِيلًا ﴾ 28 ﴿
नह्नु ख़लक्नाहुम व शददना अस्राहुम, व इज़ा सिअ्ना बद्दलना अम्सालहुम तब्दीला
हमने ही उन्हें पैदा किया है और सुदृढ़ किये हैं उनके जोड़-बंद तथा जब हम चाहें बदला दें उनके[1] जैसे (दूसरों को)। 1. अर्थात इन का विनाश कर के इन के स्थान पर दूसरों को पैदा कर दें।
إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا ﴾ 29 ﴿
इन्ना हाजिही तज्किरह, फमन् शा’अत्तखज़ा इला रब्बिही सबीला
निश्चय ये (सूरह) एक शिक्षा है। अतः, जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने की) राह बना ले।
وَمَا تَشَاءُونَ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا ﴾ 30 ﴿
वमा तशाऊना इल्ला अइ’यशा अल्लाह, इन्नल्लाहा काना अलीमन हकीमा
और तुम अल्लाह की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं चाह सकते।[1] वास्तव में, अल्लाह सब चीज़ों और गुणों को जानने वाला है। 1. अर्थात कोई इस बात पर समर्थ नहीं कि जो चाहे कर ले। जो भलाई चाहता है तो अल्लाह उसे भलाई की राह दिखा देता है।