सूरह इन्फ्तिार के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है, इस में 19 आयतें हैं।
- “इन्फ्तिार” का अर्थ ((फटना)) है। इस में प्रलय के दिन आकाश के फट जाने की सूचना दी गई है। इसी कारण इस का यह नाम है।
- इस की आयत 1 से 5 तक में प्रलय का दृश्य प्रस्तुत किया गया है कि जब प्रलय आयेगी तो मनुष्य का सब किया धरा सामने आ जायेगा।
- फिर आयत 6 से 8 तक में मनुष्य को यह बताया गया है कि जिस अल्लाह ने उसे पैदा किया है क्या उसे मनमानी करने के लिये छोड़ देगा?
- आयत 9 से 12 तक में बताया गया है कि मनुष्य का प्रत्येक कर्म लिखा जा रहा है।
- आयत 13 से 19 तक में सदाचारियों और दुराचारियों के परिणाम बताते हुये सावधान किया गया है कि प्रलय के दिन किसी के बस में कुछ न होगा, उस दिन सभी अधिकार अल्लाह के हाथ में होगा।
सूरह अल-इन्फिकार | Surah Infitar in Hindi
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
إِذَا السَّمَاءُ انفَطَرَتْ ﴾ 1 ﴿
इज़स्समा उन् फ़ तरत्
जब आकाश फट जायेगा।
وَإِذَا الْكَوَاكِبُ انتَثَرَتْ ﴾ 2 ﴿
व इज़ल कवाकिबुन् त सरत्
तथा जब तारे झड़ जायेंगे।
وَإِذَا الْبِحَارُ فُجِّرَتْ ﴾ 3 ﴿
व इजल् बिहारु फुज्जिरत्
और जब सागर उबल पड़ेंगे।
وَإِذَا الْقُبُورُ بُعْثِرَتْ ﴾ 4 ﴿
व इज़ल कुबूर बुअ्सिरत्
और जब समाधियाँ (क़बरें) खोल दी जायेंगी।
عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ ﴾ 5 ﴿
अलिमत् नफ़्सुम् मा कद्द मत् व अख़्ख रत्
तब प्रत्येक प्राणी को ज्ञान हो जायेगा, जो उसने किया है और नहीं किया है।[1] 1. (1-5) इन में प्रलय के दिन आकाश ग्रहों तथा धरती और समाधियों पर जो दशा गुज़रेगी उस का चित्रण किया गया है। तथा चेतावनी दी गई है कि सब के कर्तूत उस के सामने आ जायेंगे।
يَا أَيُّهَا الْإِنسَانُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ الْكَرِيمِ ﴾ 6 ﴿
या अय्युहल् इन्सानु मा ग़र् र क बिरब्बिकल् करीम
हे इन्सान! तुझे किस वस्तु ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?
الَّذِي خَلَقَكَ فَسَوَّاكَ فَعَدَلَكَ ﴾ 7 ﴿
अल्लज़ी ख़ लक़ क फ़ सव्वा क फ़अदलक्
जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे संतुलित बनाया।
فِي أَيِّ صُورَةٍ مَّا شَاءَ رَكَّبَكَ ﴾ 8 ﴿
फ़ी अय्यि सूरतिम् मा शा अ रक्कबक्
जिस रूप में चाहा बना दिया।[1] 1. (6-8) भावार्थ यह है कि इन्सान की पैदाइश में अल्लाह की शक्ति, दक्ष्ता तथा दया के जो लक्षण हैं, उन के दर्पण में यह बताया गया है कि प्रलय को असंभव न समझो। यह सब व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि तुम्हारा अस्तित्व व्यर्थ नहीं है कि मनमानी करो। (देखियेः तर्जुमानुल क़ुर्आन, मौलाना अबुला कलाम आज़ाद) इस का अर्थ यह भी हो सकता है कि जब तुम्हारा अस्तित्व और रूप रेखा कुछ भी तुम्हारे बस नहीं, तो फिर जिस शक्ति ने सब किया उसी की शक्ति में प्रलय तथा प्रतिकार के होने को क्यों नहीं मानते?
كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِالدِّينِ ﴾ 9 ﴿
कल्ला बल तुकज़्ज़िबू न बिद्दीनि
वास्तव में तुम प्रतिफल (प्रलय) के दिन को नहीं मानते।
وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَافِظِينَ ﴾ 10 ﴿
व इन् न अ़लैकुम् लहाफिज़ीन
जबकि तुमपर निरीक्षक (पासबान) हैं।
كِرَامًا كَاتِبِينَ ﴾ 11 ﴿
किरामन् कातिबीन
जो माननीय लेखक हैं।
يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ ﴾ 12 ﴿
यल्लमू न मा तफ़अ़लून
वे जो कुछ तुम करते हो, जानते हैं।[1] 1. (9-12) इन आयतों में इस भ्रम का खण्डन किया गया है कि सभी कर्मों और कथनों का ज्ञान कैसे हो सकता है।
إِنَّ الْأَبْرَارَ لَفِي نَعِيمٍ ﴾ 13 ﴿
इन्नल् अब्रा र लफ़ी नअ़ीम
निःसंदेह, सदाचारी सुखों में होंगे।
وَإِنَّ الْفُجَّارَ لَفِي جَحِيمٍ ﴾ 14 ﴿
व इन्नल् फुज्जा र लफ़ी जहीम
और दुराचारी नरक में।
يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ الدِّينِ ﴾ 15 ﴿
यस्लौनहा यौमद्दीन
प्रतिकार (बदले) के दिन उसमें झोंक दिये जायेंगे।
وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَائِبِينَ ﴾ 16 ﴿
व मा हुम् अ़न्हा बिग़ाइबीन
और वे उससे बच रहने वाले नहीं।[1] 1. (13-16) इन आयतों में सदाचारियों तथा दुराचारियों का परिणाम बताया गया है कि एक स्वर्ग के सुखों में रहेगा और दूसरा नरक के दण्ड का भागी बनेगा।
وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ ﴾ 17 ﴿
व मा अद्रा क मा यौमुद्दीन
और तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?
ثُمَّ مَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الدِّينِ ﴾ 18 ﴿
सुम्म मा अदरा क मा यौमुद्दीन
फिर तुम क्या जानो कि बदले का दिन क्या है?
يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْئًا ۖ وَالْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ ﴾ 19 ﴿
यौ म ला तम्लिकु नफ़्सुल लिनफ़्सिन् शैआ, वल्अमरु यौमइज़िल लिल्लाह
जिस दिन किसी का किसी के लिए कोई अधिकार नहीं होगा और उस दिन सब अधिकार अल्लाह का होगा।[1] 1. (17-19) इन आयतों में दो वाक्यों में प्रलय की चर्चा दोहरा कर उस की भ्यानकता को दर्शाते हुये बताया गया है कि निर्णय बे लाग होगा। कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा। सत्य आस्था और सत्कर्म ही सहायक होंगे जिस का मार्ग क़ुर्आन दिखा रहा है। क़ुर्आन की सभी आयतों में प्रतिकार का दिन प्रलय के दिन को ही बताया गया है जिस दिन प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मानुसार प्रतिकार मिलेगा।