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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

59. सूरह अल-हष्र – 1-24

सूरह हश्र के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मनी है, इस में 24 आयतें है।

  • इस सूरह की दूसरी आयत में हश्र का शब्द आया है। जिस का अर्थः एकत्र होना है। और इसी से यह नाम लिया गया है।
  • इस में अल्लाह और उस के रसूल के विरोधियों को मदीना के यहूदी कबीले के अपमानकारी परिणाम से चेतावनी दी गयी है।
  • आरंभ में बताया गया है कि आकाशों तथा धरती की प्रत्येक चीज़ अल्लाह की पवित्रता का गान करती है। फिर यहूदी कबीले बनी नज़ीर के, अल्लाह और उस के रसूल का विरोध करने का परिणाम बताया गया है। और ईमान वालों को कुछ निर्देश दिये गये हैं।
  • आयत 11 से 17 तक में उन मुनाफिकों की पकड़ की गई है जो यहूदियों से मिल कर इस्लाम और मुसलमानों के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे थे।
  • अन्त में प्रभावी शिक्षा तथा अल्लाह से डरने की बातों का वर्णन किया गया है। तथा आज्ञा पालन और अवैज्ञा का अन्तर बताया गया है।
  • इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कहाः कि यह सूरह बनी नज़ीर के बारे में उतरी। इसे सूरह बनी नज़ीर कहो। (सहीह बुखारीः 4883)

सूरह अल-हष्र | Surah Hashr in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

सब्ब-ह लिल्लाहि मा फ़िस्समावाति व मा फ़िल्अर्जि व हुवल् अ़ज़ीज़ुल् – हकीम

हिंदी अनुवाद

अल्लाह की पवित्रता का गान किया है उसने, जो भी आकाशों तथा धरती में है और वह प्रभुत्वशाली, गुणी है।

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هُوَ الَّذِي أَخْرَجَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن دِيَارِهِمْ لِأَوَّلِ الْحَشْرِ ۚ مَا ظَنَنتُمْ أَن يَخْرُجُوا ۖ وَظَنُّوا أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمْ حُصُونُهُم مِّنَ اللَّهِ فَأَتَاهُمُ اللَّهُ مِنْ حَيْثُ لَمْ يَحْتَسِبُوا ۖ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ ۚ يُخْرِبُونَ بُيُوتَهُم بِأَيْدِيهِمْ وَأَيْدِي الْمُؤْمِنِينَ فَاعْتَبِرُوا يَا أُولِي الْأَبْصَارِ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

हुवल्लज़ी अख़्-रजल्लज़ी- न-क-फ़रू मिन् अह्लिल्-किताबि मिन् दियारिहिम् लि-अव्वलिल् – हश्-रि, मा ज़नन्तुम् अ़य्यख़्-रुजू व ज़न्नू अन्नहुम् मानि-अ़तुहुम् हुसूनुहुम् मिनल्लाहि फ़- अताहुमुल्लाहु मिन् हैसु लम् यह्तसिबू व क़-ज़-फ़ फ़ी क़ुलूबिहिमुर्रुअ्-ब युख़िरबू – न बुयू-तहुम् बि – ऐदीहिम् व ऐदिल् – मुअ्मिनी न फ़अ्तबिरू या उलिल्-अब्सार

हिंदी अनुवाद

वही है, जिसने अह्ले किताब में से काफ़िरों को उनके घरों से पहले ही आक्रमण में निकाल दिया। तुमने नहीं समझा था कि वे निकल जायेंगे और उन्होंने समझा था कि रक्षक होंगे उनके दुर्ग[1] अल्लाह से। तो आ गया उनके पास अल्लाह (का निर्णय)। ऐसा उन्होंने सोचा भी न था तथा डाल दिया उनके दिलों में भय। वे उजाड़ रहे थे अपने घरों को अपने हाथों से तथा ईमान वालों के हाथों[2] से। तो शिक्षा लो, हे आँख वालो! 1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब मदीना पहुँचे तो वहाँ यहूदियों के तीन क़बीले आबाद थेः बनी नज़ीर, बनी क़ुरैज़ा तथा बनी क़ैनुक़ाअ। आप ने उन सभी से संधि कर ली। परन्तु वह इस्लाम के विरुध्द षड्यंत्र रचते रहे। और एक समय जब आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बनी नज़ीर के पास गये तो उन्होंने ऊपर से एक पत्थर फेंक कर आप को मार डालने की योजना बनाई। जिस से वह़्यी द्वारा अल्लाह ने आप को सूचित कर दिया। उन के इस संधि भंग तथा षड्यंत्र के कारण आप ने उन पर आक्रमण किया। वह कुछ दिन अपने दुर्गों में बंद रहे। अन्ततः उन्होंने प्राण क्षमा के रूप में देश निकाला को स्वीकार किया। और यह मदीना से यहूद का प्रथम देश निकाला था। यहाँ से वह ख़ैबर पहुँचे और आदरणीय उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के युग में उन्हें फिर देश निकाला दिया गया। और वह वहाँ से शाम चले गये जो ह़श्र का मैदान होगा। 2. जब वे अपने घरों से जाने लगे तो घरों को तोड़-तोड़ कर जो कुछ साथ ले जा सकते थे ले गये। और शेष सामान मुसलमानों ने निकाला।

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وَلَوْلَا أَن كَتَبَ اللَّهُ عَلَيْهِمُ الْجَلَاءَ لَعَذَّبَهُمْ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابُ النَّارِ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

व लौ ला अन् क- तबल्लाहु फ़लैहिमुल्-जला-अ- ल-अज़्ज़-बहुम् फिद्-दुन्या, व लहुम् फिल्- आख़िरति अ़ज़ाबुन्नार

हिंदी अनुवाद

और यदि अल्लाह ने न लिख दिया होता उन (के भाग्य में) देश निकाला, तो उन्हें यातना दे देता संसार (ही) में तथा उनके लिए अख़िरत (परलोक) में नरक की यातना है।

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ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۖ وَمَن يُشَاقِّ اللَّهَ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

ज़ालि-क बि- अन्नहुम् शाक़्क़ुल्ला-ह व रसूलहू व मंय्युशाक़्क़िल्ला -ह फ़-इन्नल्ला-ह शदीदुल् – अिक़ाब

हिंदी अनुवाद

ये इसलिए कि उन्होंने विरोध किया अल्लाह तथा उसके रसूल का और जो विरोध करेगा अल्लाह का, तो निश्चय अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है।

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مَا قَطَعْتُم مِّن لِّينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَىٰ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

मा क़-तअ्तुम् मिल्ली-नतिन् औ तरक्तुमूहा क़ाइ – मतन् अ़ला उसूलिहा फ़बि – इज़्निल्लाहि व लियुख़्ज़ि-यल्-फ़ासिक़ीन

हिंदी अनुवाद

(हे मुसलमानो!) तुमने नहीं काटा[1] कोई खजूर का वृक्ष और न छोड़ा उसे खड़ा अपने तने पर, परन्तु ये सब अल्लाह के आदेश से हुआ और ताकि वह अपमानित करे पथभ्रष्टों को। 1. बनी नज़ीर के घेराव के समय नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेशानुसार उन के खजूरों के कुछ वृक्ष जला दिये गये और काट दिये गये और कुछ छोड़ दिये गये। ताकि शत्रु की आड़ को समाप्त किया जाये। इस आयत में उसी का वर्णन किया गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4884)

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‏ وَمَا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ مِنْهُمْ فَمَا أَوْجَفْتُمْ عَلَيْهِ مِنْ خَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُسَلِّطُ رُسُلَهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ‎ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

व मा अफ़ा-अल्लाहु अ़ला रसूलिही मिन्हुम् फ़मा औजफ़्तुम् अ़लैहि मिन् ख़ैलिंव्-व- ला रिकाबिंव्-व लाकिन्नल्ला-ह युसल्लितु रुसु-लहू अ़ला मंय्यशा-उ, वल्लाहु अ ट अ़ला कुल्लि शैइन् क़दीर

हिंदी अनुवाद

और जो धन दिला दिया अल्लाह ने अपने रसूल को उनसे, तो नहीं दौड़ाये तुमने उसके लिए घोड़े और न ऊँट। परन्तु अल्लाह प्रभुत्व प्रदान कर देता है अपने रसूल को, जिसपर चाहता है तथा अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।

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مَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ مِنْ أَهْلِ الْقُرَىٰ فَلِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ كَيْ لَا يَكُونَ دُولَةً بَيْنَ الْأَغْنِيَاءِ مِنكُمْ ۚ وَمَا آتَاكُمُ الرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَاكُمْ عَنْهُ فَانتَهُوا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

मा अफ़ा-अल्लाहु अ़ला रसूलिही मिन् अह्लिल्-क़ुरा फ़-लिल्लाहि व लिर्रसूलि व लिज़िल्-क़ुर्बा वल्यतामा वल्- मसाकीनि वब्निस्सबीलि कै ला यकू-न दू-लतम्-बैनल्-अग़्निया-इ मिन्कुम्, व मा आताकुमुर्रसूलु फख़ुज़ूहु व मा नहाकुम् अ़न्हु फ़न्तहू वत्तक़ुल्ला-ह, इन्नल्ला-ह शदीदुल्- अिक़ाब

हिंदी अनुवाद

अल्लाह ने जो धन दिलाया है अपने रसूल को इस बस्ती वालों[1] से, वह अल्लाह, रसूल, (आपके) समीपवर्तियों, अनाथों, निर्धनों तथा यात्रियों के लिए है; ताकि वह (धन) फिरता न रह[2] जाये तुम्हारे धनवानों के बीच और जो प्रदान कर दे रसूल, तुम उसे ले लो और रोक दें तुम्हें जिससे, तुम उससे रुक जाओ तथा अल्लाह से डरते रहो, निश्चय अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है। 1. अर्थात यहूदी क़बीला बनी नज़ीर से जो धन बिना युध्द के प्राप्त हुआ उस का नियम बताया गया है कि वह पूरा धन इस्लामी बैतुल माल का होगा उसे मुजाहिदों में विभाजित नहीं किया जायेगा। ह़दीस में है कि यह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिये विशेष था जिस से आप अपनी पत्नियों को ख़र्च देते थे। फिर जो बच जाता तो उसे अल्लाह की राह में शस्त्र और सवारी में लगा देते थे। (बुख़ारीः 4885) इस को फ़ेय का माल कहते हैं। जो ग़नीमत के माल से अलग है। 2. इस में इस्लाम की अर्थ व्यवस्था के मूल नियम का वर्णन किय गया है। पूँजी पति व्यवस्था में धन का प्रवाह सदा धनवानों की ओर होता है। और निर्धन दरिद्रता की चक्की में पिसता रहता है।कम्युनिज़्म में धन का प्रवाह सदा शासक वर्ग की ओर होता है। जब कि इस्लाम में धन का प्रवाह निर्धन वर्ग की ओर होता है।

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لِلْفُقَرَاءِ الْمُهَاجِرِينَ الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأَمْوَالِهِمْ يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَرِضْوَانًا وَيَنصُرُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الصَّادِقُونَ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

लिल्फ़ु-क़राइल्-मुहाजिरीनल्लज़ी-न उख़्-रिजू मिन् दियारिहिम् व अम्वालिहिम् यब्तग़ू -न फ़ज़्लम् – मिनल्लाहि व रिज़वानंव्-व यन्सुरूनल्ला-ह व रसूलहू, उलाइ – क हुमुस्सादिक़ून

हिंदी अनुवाद

उन निर्धन मुहाजिरों के लिए है, जो निकाल दिये गये अपने घरों तथा धनों से। वे चाहते हैं अल्लाह का अनुग्रह तथा प्रसन्नता और सहायता करते हैं अल्लाह तथा उसके रसूल की, यही सच्चे हैं।

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وَالَّذِينَ تَبَوَّءُوا الدَّارَ وَالْإِيمَانَ مِن قَبْلِهِمْ يُحِبُّونَ مَنْ هَاجَرَ إِلَيْهِمْ وَلَا يَجِدُونَ فِي صُدُورِهِمْ حَاجَةً مِّمَّا أُوتُوا وَيُؤْثِرُونَ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ وَلَوْ كَانَ بِهِمْ خَصَاصَةٌ ۚ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

वल्लज़ी-न त – बव्वउद्दा-र वल्ईमा न मिन् क़ब्लिहिम् युहिब्बू-न मन् हाज-र इलैहिम् व ला यजिदू-न फ़ी सुदूरिहिम् हा-जतम्-मिम्मा ऊतू व युअ्सिरू – न अ़ला अऩ्फुसिहिम् व लौ का न बिहिम् ख़सा-सतुन्, व मंय्यू-क शुह्-ह नफ़्सिही फ़-उलाइ – क हुमुल् – मुफ़्लिहून

हिंदी अनुवाद

तथा उन लोगों[1] के लिए (भी), जिन्होंने आवास बना लिया इस घर (मदीना) को तथा उन (मुहाजिरों के आने) से पहले ईमान लाये, वे प्रेम करते हैं उनसे, जो हिजरत करके आ गये उनके यहाँ और वे नहीं पाते अपने दिलों में कोई आवश्यक्ता उसकी, जो उन्हें दिया जाये और प्राथमिक्ता देते हैं दूसरों को अपने ऊपर, चाहे स्वयं भूखे[1] हों और जो बचा लिये गये अपने मन की तंगी से, तो वही सफल होने वाले हैं। 1. इस से अभिप्राय मदीना के निवासी अन्सार हैं। जो मुहाजिरीन के मदीना में आने से पहले ईमान लाये थे। इस का यह अर्थ नहीं है कि वह मुहाजिरीन से पहले ईमान लाये थे। 2. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास एक अतिथि आया और कहाः हे अल्लाह के रसूल! मैं भूखा हूँ। आप ने अपनी पत्नियों के पास भेजा तो वहाँ कुछ नहीं था। एक अन्सारी उसे घर ले गये। घर पहुँचे तो पत्नि ने कहाः घर में केवल बच्चों का खाना है। उन्होंने परस्पर प्रामर्श किया कि बच्चों को बहला कर सुला दिया जाये। तथा पत्नी से कहा कि जब अतिथि खाने लगे तो तुम दीप बुझा देना। उस ने ऐसा ही किया। सब भूखे सो गये और अतिथि को खिला दिया। जब वह अन्सारी भोर में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचे तो आप ने कहाः अमुक पुरुष (अबू तल्ह़ा) और अमुक स्त्री (उम्मे सुलैम) से अल्लाह प्रसन्न हो गया। और उस ने यह आयत उतारी है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4889)

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وَالَّذِينَ جَاءُوا مِن بَعْدِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا إِنَّكَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ ‎ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

वल्लज़ी – न जाऊ मिम्बअ्दिहिम् य़कूलू-न रब्बनग़्फ़िर् लना व लि-इख़्वानिनल्लज़ी – न स – बक़ूना बिल् – ईमानि व ला तज्अ्ल् फ़ी क़ुलूबिना ग़िल्लल्-लिल्लज़ी – न आमनू रब्बना इन्न- क रऊफ़ुर्रहीम

हिंदी अनुवाद

और जो आये उनके पश्चात्, वे कहते हैं: हे हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे तथा हमारे उन भाईयों को, जो हमसे पहले ईमान लाये और न रख हमारे दिलों में कोई बैर उनके लिए, जो ईमान लाये। हे हमारे पालनहार! तू अति करुणामय, दयावान् है।

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أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نَافَقُوا يَقُولُونَ لِإِخْوَانِهِمُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَئِنْ أُخْرِجْتُمْ لَنَخْرُجَنَّ مَعَكُمْ وَلَا نُطِيعُ فِيكُمْ أَحَدًا أَبَدًا وَإِن قُوتِلْتُمْ لَنَنصُرَنَّكُمْ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

अलम् त-र इलल्लज़ी-न नाफ़क़ू यक़ूलू-न लि-इख़्वानिहिमुल्लज़ी-न क-फ़रू मिन् अह्लिल्-किताबि ल-इन् उख़्-रिज्तुम् ल-नख़्-रूजन्-न म-अ़कुम् व ला नुतीअु फ़ीकुम् अ-हदन् अ-बदंव्-व इन् क़ूतिल्तुम् ल-नन्सुरन्नकुम्, वल्लाहु यश्हदु इन्नहुम् लकाज़िबून

हिंदी अनुवाद

क्या आपने उन्हें[1] नहीं देखा, जो मुनाफ़िक़ (अवसरवादी) हो गये और कहते हैं अपने अह्ले किताब भाईयों से कि यदि तुम्हें देश निकाला दिया गया, तो हम अवश्य निकल जायेंगे तुम्हारे साथ और नहीं मानेंगे तुम्हारे बारे में किसी की (बात) कभी और यदि तुमसे युध्द हुआ तो हम अवश्य तुम्हारी सहायता करेंगे तथा अल्लाह गवाह है कि वे झूठे हैं। 1. इस से अभिप्राय अब्दुल्लाह बिन उबय्य मुनाफ़िक़ और उस के साथी हैं। जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यहूद को उन के वचन भंग तथा षड्यंत्र के कारण दस दिन के भीतर निकल जाने की चेतावनी दी, तो उस ने उन से कहा कि तुम अड़ जाओ। मेरे बीस हज़ार शस्त्र युवक तुम्हारे साथ मिल कर युध्द करेंगे। और यदि तुम्हें निकाला गया तो हम भी तुम्हारे साथ निकल जायेंगे। परन्तु यह सब मौखिक बातें थीं।

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‏ لَئِنْ أُخْرِجُوا لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ وَلَئِن قُوتِلُوا لَا يَنصُرُونَهُمْ وَلَئِن نَّصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

ल-इन् उख़्-रिजू ला यख़्-रुजू न म-अ़हुम् व ल-इन् क़ूतिलू ला यन्सुरूनहुम् व ल-इन्-न-सरूहुम् लयु-वल्लुन्नल्- अद्बा-र, सुम्-म ला युन्सरून

हिंदी अनुवाद

यदि वे निकाले गये तो ये उनके साथ नहीं निकलेंगे और यदि उनसे युध्द हो, तो वे उनकी सहायता नहीं करेंगे और यदि उनकी सहायता की (भी,) तो अवश्य पीठ दिखा देंगे, फिर कहीं से कोई सहायता नहीं पायेंगे।

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لَأَنتُمْ أَشَدُّ رَهْبَةً فِي صُدُورِهِم مِّنَ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

ल-अन्तुम् अशद्-दु रह्-बतन् फ़ी सुदूरिहिम् मिनल्लाहि, ज़ालि-क बि-अन्नहुम् क़ौमुल्-ला यफ़्क़हून

हिंदी अनुवाद

निश्चय अधिक भय है तुम्हारा उनके दिलों में अल्लाह (के भय) से। ये इसलिए कि वे समझ-बूझ नहीं रखते।

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‏ لَا يُقَاتِلُونَكُمْ جَمِيعًا إِلَّا فِي قُرًى مُّحَصَّنَةٍ أَوْ مِن وَرَاءِ جُدُرٍ ۚ بَأْسُهُم بَيْنَهُمْ شَدِيدٌ ۚ تَحْسَبُهُمْ جَمِيعًا وَقُلُوبُهُمْ شَتَّىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْقِلُونَ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

ला युक़ातिलूनकुम् जमीअ़न् इल्ला फ़ी क़ुरम् – मुहस्स-नतिन् औ मिंव्वरा – इ जुदुरिन्, बअ्सुहुम् बैनहुम् शदीदुन्, तह्सबुहुम् जमीअंव् व क़ुलूबुहुम् शत्ता, ज़ालि -क बि- अन्नहुम् क़ौमुल्-ला यअ्क़िलून

हिंदी अनुवाद

वे नहीं युध्द करेंगे तुमसे एकत्र होकर, परन्तु ये कि दुर्ग बंद बस्तियों में हों अथवा किसी दीवार की आड़ से। उनका युध्द आपस में बहुत कड़ा है। आप उन्हें एकत्र समझते हैं, जबकि उनके दिल अलग अलग हैं। ये इसलिए कि वे निर्बोध होते हैं।

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‏ كَمَثَلِ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَرِيبًا ۖ ذَاقُوا وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ‎ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

क-म-सलिल्लजी – न मिन् क़ब्लिहिम् क़रीबन् ज़ाक़ू व बा-ल अम्-रिहिम् व लहुम् अ़ज़ाबुन् अलीम

हिंदी अनुवाद

उनके समान, जो उनसे कुछ ही पूर्व चख चुके[1] हैं अपने किये का स्वाद और इनके लिए दुःखदायी यातना है। 1. इस में संकेत बद्र में मक्का के काफ़िरों तथा क़ैनुक़ाअ क़बीले की पराजय की ओर है।

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كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ إِذْ قَالَ لِلْإِنسَانِ اكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ ‎ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

क-म-सलिश्शैतानि इ ज़् क़ा-ल लिल् – इन्सानि क्फ़ुर् फ़-लम्मा क-फ़-र क़ा-ल इन्नी बरीउम् – मिम् – क इन्नी अख़ाफ़ुल्ला – ह रब्बल् – आ़लमीन

हिंदी अनुवाद

(उनका उदाहरण) शैतान जैसा है कि वह कहता है मनुष्य से कि कुफ़्र कर, फिर जब वह काफ़िर हो गया, तो कह दिया कि मैं तुझसे विरक्त (अलग) हूँ। मैं तो डरता हूँ अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार से।

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فَكَانَ عَاقِبَتَهُمَا أَنَّهُمَا فِي النَّارِ خَالِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

फ़का-न आ़कि-ब-तहुमा अन्नहुमा फ़िन्नारि ख़ालिदैनि फ़ीहा, व ज़ालि – क जज़ाउज़्ज़ालिमीन

हिंदी अनुवाद

तो हो गया उन दोनों का दुष्परिणाम ये कि वे दोनों नरक में सदावासी रहेंगे और यही है अत्याचारियों का कुफल।

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يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنظُرْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी – न आमनुत्तक़ुल्ला – ह वल्तन्ज़ुर् नफ़्सुम् मा क़द्द-मत् लि-ग़दिन् वत्तक़ुल्ला-ह, इन्नल्ला-ह ख़बीरुम्-बिमा तअ्मलून

हिंदी अनुवाद

हे लोगो जो ईमान लाये हो! अल्लाह से डरो और देखना चाहिये प्रत्येक को कि उसने क्या भेजा है कल के लिए तथा डरते रहो अल्लाह से, निश्चय अल्लाह सूचित है उससे, जो तुम करते हो।

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وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ ‎ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

व ला तकूनू कल्लज़ी-न नसुल्ला-ह फ़-अन्साहुम् अन्फ़ु-सहुम्, उलाइ-क हुमुल् फ़ासिक़ून

हिंदी अनुवाद

और न हो जाओ उनके समान, जो भूल गये अल्लाह को, तो भुला दिया (अल्लाह ने) उन्हें अपने आपसे, यही अवज्ञाकारी हैं।

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لَا يَسْتَوِي أَصْحَابُ النَّارِ وَأَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۚ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ هُمُ الْفَائِزُونَ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

ला यस्तवी अस्हाबुन्नारि व अस्हाबुल्-जन्नति, अस्हाबुल्-जन्नति हुमुल् – फ़ाइज़ून

हिंदी अनुवाद

नहीं बराबर हो सकते नारकी तथा स्वर्गी। स्वार्गी ही वास्तव में सफल होने वाले हैं।

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لَوْ أَنزَلْنَا هَٰذَا الْقُرْآنَ عَلَىٰ جَبَلٍ لَّرَأَيْتَهُ خَاشِعًا مُّتَصَدِّعًا مِّنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ۚ وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ ‎ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

लौ अन्ज़ल्ना हाज़लू-क़ुर्आ-न अ़ला ज-बलिल्- ल-रऐ-तहू ख़ाशिअ़म् मु-तसद्दिअ़म् मिन् ख़श्-यतिल्लाहि, व तिल्कल् – अम्सालु नज़्रिबुहा लिन्नासि लअ़ल्लाहुम् य-तफ़क्करून

हिंदी अनुवाद

यदि हम अवतरित करते इस क़ुर्आन को किसी पर्वत पर, तो आप उसे देखते कि झुका जा रहा है तथा कण-कण होता जा रहा है, अल्लाह के भय से और इन उदाहरणों का वर्णन हम लोगों के लिए कर रहे हैं, ताकि वे सोच-विचार करें। वह खुले तथा छुपे का जानने वाला है। वही अत्यंत कृपाशील, दयावान् है।

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هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۖ هُوَ الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ ‎ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

हुवल्लाहुल्लज़ी ला इला-ह इल्ला हु-व आ़लिमुल् – ग़ैबि वश्शहा-दति हुवर्-रह्मानुर्रहीम

हिंदी अनुवाद

वह अल्लाह ही है, जिसके अतिरिक्त कोई (सत्य) पूज्य नहीं है।

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هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْمَلِكُ الْقُدُّوسُ السَّلَامُ الْمُؤْمِنُ الْمُهَيْمِنُ الْعَزِيزُ الْجَبَّارُ الْمُتَكَبِّرُ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ ﴾ 23 ﴿

Transliteration

हुवल्लाहुल्लज़ी ला इला-ह इल्ला हु-व अल्मलिकुल्- क़ुद्दूसुस् – सलामुल् – मुअ्मिनुल् – मुहैमिनुल्- अ़ज़ीज़ुल्-जब्बारुल् – मु-तकब्बिरु, सुब्हानल्लाहि अ़म्मा युश्रिकून

हिंदी अनुवाद

वह अल्लाह ही है, जिसके अतिरिक्त नहीं है[1] कोई सच्चा वंदनीय। वह सबका स्वामी, अत्यंत पवित्र, सर्वथा शान्ति प्रदान करने वाला, रक्षक, प्रभावशाली, शक्तिशाली बल पूर्वक आदेश लागू करने वाला, बड़ाई वाला है। पवित्र है अल्लाह उससे, जिसे वे (उसका) साझी बनाते हैं। 1. इन आयतों में अल्लाह के शुभनामों और गुणों का वर्णन कर के बताया गया है कि वह अल्लाह कैसा है जिस ने यह क़ुर्आन उतारा है। इस आयत में अल्लाह के ग्यारह शुभनामों का वर्णन है। ह़दीस में है कि अल्लाह के निन्नानवे नाम हैं, जो उन्हें गिनेगा तो वह स्वर्ग में जायेगा। (सह़ीह़ बुख़ारीः 7392, सह़ीह़ मुस्लिमः 2677)

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هُوَ اللَّهُ الْخَالِقُ الْبَارِئُ الْمُصَوِّرُ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ ۚ يُسَبِّحُ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ﴾ 24 ﴿

Transliteration

हुवल्लाहुल् ख़ालिक़ुल् बारिउल् मुसव्विरु लहुल् अस्मा -उल्- हुस्ना, युसब्बिहु लहू मा फ़िस्समावाति वल्अर्जि व हुवल् अ़ज़ीज़ुल्-हकीम

हिंदी अनुवाद

वही अल्लाह है, पैदा करने वाला, बनाने वाला, रूप देने वाला। उसी के लिए शुभ नाम हैं, उसकी पवित्रता का वर्णन करता है जो (भी) आकाशों तथा धरती में है और वह प्रभावशाली, ह़िक्मत वाला है।

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