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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

88. सूरह अल-घाशिया – 1-26

सूरह ग़ाशियह के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है, इस में 26 आयतें हैं।

  • इस की प्रथम आयत में ((अल गाशियह)) शब्द आने के कारण इस का यह नाम रखा गया है। जिस का अर्थ ऐसी आपदा है जो सब पर छा जाये
  • इस की आयत 2 से 7 तक में उन का परिणाम बताया गया है जो प्रलय को नहीं मानते और 8 से 16 तक उन का परिणाम बताया गया है जो प्रलय के प्रति विश्वास रखते हैं।
  • आयत 17 से 20 तक विश्व की उन निशानियों की ओर ध्यान दिलाया गया है जो अल्लाह के सामर्थ्य का प्रमाण है। और जिन पर विचार करने से कुन की बातों को समर्थन मिलता है कि अल्लाह प्रलय लाने तथा स्वर्ग और नरक का संसार बनाने की शक्ति रखता है और प्रतिफल का होना अनिवार्य है।
  • आयत 21 से 26 तक नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सम्बोधित किया गया है कि आप का काम मात्र शिक्षा देना है किसी को बलपूर्वक सत्य मनवाना नहीं है। अतः जो आप की शिक्षा सुनने को तय्यार नहीं है उन्हें अल्लाह के हवाले करो। क्यों कि आखिर उन्हें अल्लाह ही की ओर जाना है, उस दिन वह उन से हिसाब ले लेगा।

सूरह अल-घाशिया | Surah Al Ghashiyah in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْغَاشِيَةِ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

हल अताक हदीसुल ग़ाशियह

हिंदी अनुवाद

क्या तेरे पास पूरी सृष्टी पर छा जाने वाली (क्यामत) का समाचार आया?

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وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَاشِعَةٌ ‎ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

वुजूहुय यौ मइजिन ख़ाशिअह

हिंदी अनुवाद

उस दिन कितने मूँह सहमे होंगे।

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عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

आमिलतुन नासिबह

हिंदी अनुवाद

परिश्रम करते थके जा रहे होंगे।

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‏ تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً ‎ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

तस्ला नारन हामियह

हिंदी अनुवाद

पर वे दहकती आग में जायेंगे।

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تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ آنِيَةٍ ‎ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

तुस्क़ा मिन ऐनिन आनियह

हिंदी अनुवाद

उन्हें खोलते सोते का जल पिलाया जायेगा।

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لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍ ‎ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

लैस लहुम तआमुन इल्ला मिन दरीअ

हिंदी अनुवाद

उनके लिए कटीली झाड़ के सिवा, कोई भोजन सामग्री नहीं होगी।

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لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِي مِن جُوعٍ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

ला युस्मिनु वला युग्नी मिन जूअ

हिंदी अनुवाद

जो न मोटा करेगी और न भूख दूर करेगी।[1] 1. (1-7) इन आयतों में प्रथम संसारिक स्वार्थ में मग्न इन्सानों को एक प्रश्न द्वारा सावधान किया गया है कि उसे उस समय की सूचना है जब एक आपदा समस्त विश्व पर छा जायेगा? फिर इसी के साथ यह विवरण भी दिया गया है कि उस समय इन्सानों के दो भेद हो जायेंगे, और दोनों के प्रतिफल भी भिन्न होंगेः एक नरक में तथा दूसरा स्वर्ग में जायेगा। तीसरी आयत में "नासिबह" का शब्द आया है जिस का अर्थ है, थक कर चूर हो जाना, अर्थात काफ़िरों को क़्यामत के दिन इतनी कड़ी यातना दी जायेगी कि उन की दशा बहुत ख़राब हो जायेगी। और वे थके-थके से दिखाई देंगे। इस का दूसरा अर्थ यह भी है कि उन्हों ने संसार में बहुत से कर्म किये होंगे परन्तु वह सत्य धर्म के अनुसार नहीं होंगे, इस लिये वे पूजा अर्चना और कड़ी तपस्या कर के भी नरक में जायेंगे, इस लिये कि सत्य आस्था के बिना कोई कर्म मान्य नहीं होगा।

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وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاعِمَةٌ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

वुजूहुय यौम इजिन नाइमह

हिंदी अनुवाद

कितने मुख उस दिन निर्मल होंगे।

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‏ لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

लि सअ’यिहा रादियह

हिंदी अनुवाद

अपने प्रयास से प्रसन्न होंगे।

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‏ فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ ‎ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

फ़ी जन्नतिन आलियह

हिंदी अनुवाद

ऊँचे स्वर्ग में होंगे।

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لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَاغِيَةً ‎ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

ला तसमउ फ़ीहा ला गियह

हिंदी अनुवाद

उसमें कोई बकवास नहीं सुनेंगे।

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‏ فِيهَا عَيْنٌ جَارِيَةٌ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

फ़ीहा ऐनुन जारियह

हिंदी अनुवाद

उसमें बहता जल स्रोत होगा।

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فِيهَا سُرُرٌ مَّرْفُوعَةٌ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

फ़ीहा सुरुरुम मरफूअह

हिंदी अनुवाद

और उसमें ऊँचे-ऊँचे सिंहासन होंगे।

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وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

व अक्वाबुम मौदूअह

हिंदी अनुवाद

उसमें बहुत सारे प्याले रखे होंगे।

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وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

व नमारिक़ु मस फ़ूफ़ह

हिंदी अनुवाद

पंक्तियों में गलीचे लगे होंगे।

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وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

व ज़रा बिय्यु मब्सूसह

हिंदी अनुवाद

और मख़्मली क़ालीनें बिछी होंगी।[1] 1. (8-16) इन आयतों में जो इस संसार में सत्य आस्था के साथ क़ुर्आन आदेशानुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं परलोक में उन के सदा के सुख का दृश्य दिखाया गया है।

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أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

अफ़ला यन्ज़ुरूना इलल इबिलि कैफ़ा ख़ुलिक़त

हिंदी अनुवाद

क्या वह ऊँटों को नहीं देखते कि कैसे पैदा किये गये हैं?

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وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

व इलस समाइ कैफ़ा रुफ़िअत

हिंदी अनुवाद

और आकाश को कि किस प्रकार ऊँचा किया गया?

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وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

व इलल जिबालि कैफ़ा नुसिबत

हिंदी अनुवाद

और पर्वतों को कि कैसे गाड़े गये?

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‏ وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ ‎ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

व इलल अरदि कैफ़ा सुतिहत

हिंदी अनुवाद

तथा धरती को कि कैसे पसारी गयी?[1] 1. (17-20) इन आयतों में फिर विषय बदल कर एक प्रश्न किया जा रहा है कि जो क़ुर्आन की शिक्षा तथा प्रलोक की सूचना को नहीं मानते अपने सामने उन चीज़ों को नहीं देखते जो रात दिन उन के सामने आती रहती हैं, ऊँटों तथा पर्वतों और आकाश एवं धरती पर विचार क्यों नहीं करते कि क्या यह सब अपने आप पैदा हो गये हैं या इन का कोई रचयिता है? यह तो असंभव है कि रचना हो और रचयिता न हो। यदि मानते हैं किसी शक्ति ने इन को बनाया है जिस का कोई साझी नहीं तो उस के अकेले पूज्य होने और उस के फिर से पैदा करने की शक्ति और सामर्थ्य का क्यों इन्कार करते हैं? (तर्जुमानुल क़ुर्आन)

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فَذَكِّرْ إِنَّمَا أَنتَ مُذَكِّرٌ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

फ़ ज़क्किर इन्नमा अंता मुज़क्किर

हिंदी अनुवाद

अतः आप शिक्षा (नसीह़त) दें कि आप शिक्षा देने वाले हैं।

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‏ لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

लस्ता अलैहिम बिमु सैतिर

हिंदी अनुवाद

आप उनपर अधिकारी नहीं हैं।

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إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ ‎ ﴾ 23 ﴿

Transliteration

इल्ला मन तवल्ला व कफ़र

हिंदी अनुवाद

परन्तु, जो मुँह फेरेगा और नहीं मानेगा,

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‏ فَيُعَذِّبُهُ اللَّهُ الْعَذَابَ الْأَكْبَرَ ‎ ﴾ 24 ﴿

Transliteration

फ़ युअज्ज़िबुहुल लाहुल अज़ाबल अकबर

हिंदी अनुवाद

तो अल्लाह उसे भारी यातना देगा।

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إِنَّ إِلَيْنَا إِيَابَهُمْ ‎ ﴾ 25 ﴿

Transliteration

इन्ना इलैना इयाबहुम

हिंदी अनुवाद

उन्हें हमारी ओर ही वापस आना है।

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ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم ‎ ﴾ 26 ﴿

Transliteration

सुम्मा इन्ना अलैना हिसाबहुम

हिंदी अनुवाद

फिर हमें ही उनका ह़िसाब लेना है।[1] 1. (21-26) इन आयतों का भावार्थ यह है कि क़ुर्आन किसी को बलपूर्वक मनवाने के लिये नहीं है, और न नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कर्तव्य है कि किसी को बलपूर्वक मनवायें। आप जिस से डरा रहे हैं यह मानें या न मानें वह खुली बात है। फिर भी जो नहीं सुनते उन को अल्लाह ही समझेगा। यह और इस जैसी क़ुर्आन की अनेक आयतें इस आरोप का खण्डन करती हैं के इस्लाम ने अपने मनवाने के लिये अस्त्र शस्त्र का प्रयोग किया है।

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