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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

89. सूरह अल-फज्र – 1-30

सूरह फज्र के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है, इस में 30 आयतें हैं।

  • इस का आरंभ ((वल फज्र)) से होने के कारण इस को यह नाम दिया गया है।
  • आयत 1 से 5 तक दिन-रात की प्राकृतिक स्थियों को प्रतिफल के दिन के प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। और आयत 6 से 14 तक कुछ बड़ी जातियों के शिक्षाप्रद परिणाम को इस के समर्थन में प्रस्तुत किया गया है कि इस विश्व का शासक सब के कर्मों को देख रहा है और एक दिन वह हिसाब अवश्य लेगा।
  • आयत 15 से 20 तक में मनुष्य के साथ दुर्व्यवहारों तथा निर्बलों के अधिकार हनन पर कड़ी चेतावनी दी गई और बताया गया है कि ऐसा करने का कारण परलोक का अविश्वास है।
  • अन्तिम आयतों में अल्लाह के न्यायालय का चित्र प्रस्तुत करते हुये विरोधियों तथा ईमान वालों का परिणाम बताया गया है।

सूरह अल-फज्र | Surah Fajr in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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وَالْفَجْرِ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

वल फज्रि

हिंदी अनुवाद

शपथ है भोर की!

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وَلَيَالٍ عَشْرٍ ‎ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

व लयालिन अशर

हिंदी अनुवाद

तथा दस रात्रियों की!

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وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ ‎ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

वश शफ़ इ वल वत्र

हिंदी अनुवाद

और जोड़े तथा अकेले की!

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‏ وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

वल लैलि इज़ा यस्र

हिंदी अनुवाद

और रात्रि की जब जाने लगे!

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‏ هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِي حِجْرٍ ‎ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

हल फ़ी ज़ालिका क़-समुल लिजी हिज्र

हिंदी अनुवाद

क्या उसमें किसी मतिमान (समझदार) के लिए कोई शपथ है?[1] 1. (1-5) इन आयतों में प्रथम परलोक के सुफल विष्यक चार संसारिक लक्षणों को साक्ष्य (गवाह) के रूप में परस्तुत किया गया है। जिस का अर्थ यह है कि कर्मों का फल सत्य है। रात तथा दिन का यह अनुक्रम जिस व्यवस्था के साथ चल रहा है उस से सिध्द होता है कि अल्लाह ही इसे चला रहा है। "दस रात्रियों" से अभिप्राय "ज़ुल ह़िज्जा" मास की प्रारम्भिक दस रातें हैं। सह़ीह़ ह़दीसों में इन की बड़ी प्रधानता बताई गई है।

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‏ أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

अलम तरा कैफ़ा फ़-अला रब्बुका बिआद

हिंदी अनुवाद

क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने "आद" के सात क्या किया?

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‏ إِرَمَ ذَاتِ الْعِمَادِ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

इर मज़ातिल इमाद

हिंदी अनुवाद

स्तम्भों वाले "इरम" के साथ?

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الَّتِي لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِي الْبِلَادِ ‎ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

अल्लती लम युख्लक़ मिस्लुहा फ़िल बिलाद

हिंदी अनुवाद

जिनके समान देशों में लोग नहीं पैदा किये गये।

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‏ وَثَمُودَ الَّذِينَ جَابُوا الصَّخْرَ بِالْوَادِ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

व समूदल लज़ीना जाबुस सख़ रबिल वाद

हिंदी अनुवाद

तथा "समूद" के साथ जिन्होंने घाटियों मे चट्टानों को काट रखा था।

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وَفِرْعَوْنَ ذِي الْأَوْتَادِ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

वफ़िर औना ज़िल औताद

हिंदी अनुवाद

और मेखों वाले फ़िरऔन के साथ।

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‏ الَّذِينَ طَغَوْا فِي الْبِلَادِ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

अल्लज़ीना तगौ फ़िल बिलाद

हिंदी अनुवाद

जिन्होंने नगरों में उपद्रव कर रखा था।

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‏ فَأَكْثَرُوا فِيهَا الْفَسَادَ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

फ़अक्सरू फ़ीहल फ़साद

हिंदी अनुवाद

और नगरों में बड़ा उपद्रव फैला रखा था।

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فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

फ़ सब्बा अलैहिम रब्बुका सौत अज़ाब

हिंदी अनुवाद

फिर तेरे पालनहार ने उनपर दण्ड का कोड़ा बरसा दिया।

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إِنَّ رَبَّكَ لَبِالْمِرْصَادِ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

इन्ना रब्बका लबिल मिरसाद

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, तेरा पालनहार घात में है।[1] 1. (6-14) इन आयतों में उन जातियों की चर्चा की गई है जिन्हों ने माया मोह में पड़ कर परलोक और प्रतिफल का इन्कार किया, और अपने नैतिक पतन के कारण धरती में उग्रवाद किया। "आद, इरम" से अभिप्रेत वह पूरानी जाती है जिसे क़ुर्आन तथा अरब में "आदे ऊला" (प्रथम आद) कहा गया है। यह वह प्राचीन जाति है जिस के पास हूद (अलैहिस्सलाम) को भेजा गया। और इन को "आदे इरम" इस लिये कहा गया है कि यह शामी वंशक्रम की उस शाखा से संबंधित थे जो इरम बिन शाम बिन नूह़ से चली आती थी। आयत संख्या 11 में इस का संकेत है कि उग्रवाद का उद्गम भौतिकवाद एवं सत्य विश्वास का इन्कार है जिसे वर्तमान युग में भी प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता है।

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فَأَمَّا الْإِنسَانُ إِذَا مَا ابْتَلَاهُ رَبُّهُ فَأَكْرَمَهُ وَنَعَّمَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَكْرَمَنِ ‎ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

फ़ अम्मल इंसानु इज़ा मब तलाहु रब्बुहू फ़अक र-महु वनअ अमह, फ़ यक़ूलु रब्बी अकरमन

हिंदी अनुवाद

परन्तु, जब इन्सान की उसका पालनहार परीक्षा लेता है और उसे सम्मान और धन देता है, तो कहता है कि मेरे पालनहार ने मेरा सम्मान किया।

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وَأَمَّا إِذَا مَا ابْتَلَاهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُ فَيَقُولُ رَبِّي أَهَانَنِ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

वअम्मा इज़ा मब तलाहु फ़ क़दरा अलैहि रिज्हक़, फ़ यक़ूलु रब्बी अहानन

हिंदी अनुवाद

परन्तु, जब उसकी परीक्षा लेने के लिए उसकी जीविका संकीर्ण (कम) कर देता है, तो कहता है कि मेरे पालनहार ने मेरा अपमान किया।

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‏ كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ الْيَتِيمَ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

कल्ला बल ला तुक रिमूनल यतीम

हिंदी अनुवाद

ऐसा नहीं, बल्कि तुम अनाथ का आदर नहीं करते।

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وَلَا تَحَاضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ ‎ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

वला तहाददूना अला तआमिल मिस्कीन

हिंदी अनुवाद

तथा ग़रीब को खाना खिलाने के लिए एक-दूसरे को नहीं उभारते।

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وَتَأْكُلُونَ التُّرَاثَ أَكْلًا لَّمًّا ‎ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

वतअ’ कुलूनत तुरास अक लल लममा

हिंदी अनुवाद

और मीरास (मृतक सम्पत्ति) के धन को समेट-समेट कर खा जाते हो।

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وَتُحِبُّونَ الْمَالَ حُبًّا جَمًّا ﴾ 20 ﴿

Transliteration

वतुहिब बूनल मा-ल हुब्बन जममा

हिंदी अनुवाद

और धन से बड़ा मोह रखते हो।[1] 1. (15-20) इन आयतों में समाज की साधारण नैतिक स्थिति की परीक्षा (जायज़ा) ली गई, और भौतिकवादी विचार की आलोचना की गई है जो मात्र सांसारिक धन और मान मर्य़ादा को सम्मान तथा अपमान का पैमाना समझता है और यह भूल गया है कि न धनी होना कोई पुरस्कार है और न निर्धन होना कोई दण्ड है। अल्लाह दोनों स्थितियों में मानव जाति (इन्सान) की परीक्षा ले रहा है। फिर यह बात किसी के बस में हो तो दूसरे का धन भी हड़प कर जाये, क्या ऐसा करना कुकर्म नहीं जिस का ह़िसाब लिया जाये?

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كَلَّا إِذَا دُكَّتِ الْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا ﴾ 21 ﴿

Transliteration

कल्ला इज़ा दुक्कतिल अरदु दक्कन दक्का

हिंदी अनुवाद

सावधान! जब धरती खण्ड-खण्ड कर दी जायेगी।

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وَجَاءَ رَبُّكَ وَالْمَلَكُ صَفًّا صَفًّا ‎ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

व जाअ रब्बुका वल म-लकु सफ्फन सफ्फा

हिंदी अनुवाद

और तेरा पालनहार स्वयं पदार्वण करेगा और फ़रिश्ते पंक्तियों में होंगे।

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وَجِيءَ يَوْمَئِذٍ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ وَأَنَّىٰ لَهُ الذِّكْرَىٰ ﴾ 23 ﴿

Transliteration

वजीअ यौमइज़िम बि जहन्नम, यौ मइजिय यता ज़क्करुल इंसानु व अन्ना लहुज़ ज़िकरा

हिंदी अनुवाद

और उस दिन नरक लायी जायेगी, उस दिन इन्सान सावधान हो जायेगा, किन्तु सावधानी लाभ-दायक न होगी।

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يَقُولُ يَا لَيْتَنِي قَدَّمْتُ لِحَيَاتِي ﴾ 24 ﴿

Transliteration

यक़ूलु या लैतनी क़द दम्तु लि हयाती

हिंदी अनुवाद

वह कामना करेगा के काश! अपने सदा कि जीवन के लिए कर्म किये होते।

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فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُ أَحَدٌ ﴾ 25 ﴿

Transliteration

फ़यौ मइज़िल ला युअज्ज़िबू अज़ाबहू अहद

हिंदी अनुवाद

उस दिन (अल्लाह) के दण्ड के समान कोई दण्ड नहीं होगा।

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وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُ أَحَدٌ ‎ ﴾ 26 ﴿

Transliteration

वला यूसिकु वसा क़हू अहद

हिंदी अनुवाद

और न उसके जैसी जकड़ कोई जकड़ेगा।[1] 1. (21-26) इन आयतों मे बताया गया है कि धन पूजने और उस से परलोक न बनाने का दुष्परिणाम नरक की घोर यातना के रूप में सामने आयेगा तब भौतिकवादी कुकर्मियों की समझ में आयेगा कि क़ुर्आन को न मान कर बड़ी भूल हुई और हाथ मलेंगे।

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يَا أَيَّتُهَا النَّفْسُ الْمُطْمَئِنَّةُ ﴾ 27 ﴿

Transliteration

या अय्यतुहन नफ्सुल मुत मइन्नह

हिंदी अनुवाद

हे शान्त आत्मा!

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ارْجِعِي إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةً مَّرْضِيَّةً ﴾ 28 ﴿

Transliteration

इरजिई इला रब्बिकि रादियतम मर दिय्यह

हिंदी अनुवाद

अपने पालनहार की ओर चल, तू उससे प्रसन्न, और वह तुझ से प्रसन्न।

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فَادْخُلِي فِي عِبَادِي ﴾ 29 ﴿

Transliteration

फ़दखुली फ़ी इबादी

हिंदी अनुवाद

तू मेरे भक्तों में प्रवेश कर जा।

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‏ وَادْخُلِي جَنَّتِي ﴾ 30 ﴿

Transliteration

वद खुली जन्नती

हिंदी अनुवाद

और मेरे स्वर्ग में प्रवेश कर जा।[1] 1. (27-30) इन आयतों में उन के सुख और सफलता का वर्णन किया गया है जो क़ुर्आन की शिक्षा का अनुपालन करते हुये आत्मा की शाँति के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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