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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

80. सूरह अबसा – 1-42

सूरह अबस के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है. इस में 42 आयतें हैं।

  • इस का आरंभ ((अब्सा )) शब्द से हुआ है जिस का अर्थ ((मुंह बसोरना)) है। इसी से इस सूरह का नाम रखा गया है।
  • इस की आयत 1 से 10 तक में एक विशेष घटना की ओर संकेत कर के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ध्यान दिलाया गया है कि आप अभिमानियों तथा दुराग्रहियों के पीछे न पड़ें। उस पर ध्यान दें जो सत्य की खोज करता और अपना सुधार चाहता है।
  • आयत 11 से 16 तक में कुर्बान की महिमा का वर्णन किया गया तथा बताया गया है कि जिस की ओर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बुला रहे है वह कितनी बड़ी चीज़ है। इस लिये जो इस का अपमान करेंगे वह स्वंय अपना ही बुरा करेंगे।
  • आयत 17 से 23 तक में प्रलय के इन्‌कारियों को चेतावनी दी गई है। तथा फिर से जीवित किये जाने के प्रमाण अल्लाह के पालनहार होने से प्रस्तुत किये गये हैं।
    1 यह सूरह मक्की है। भाष्य कारों ने इस के उतरने का कारण यह लिखा है कि एक बार ईशदूत (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का के प्रमुखों को इस्लाम के विषय में समझा रहे थे कि एक अनुयायी अब्दुल्लाह बिन उम्मे मक्तूम (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने आ कर धार्मिक विषय में प्रश्न किया। आप उसे बुरा मान गये और मुँह फेर लिया। इस पर आप को साबधान किया गया कि धर्म में संसारिक मान मर्यादा का कोई महत्व नहीं, आप उसी पर प्रथम ध्यान दें जो सत्य को मानता तथा उस का पालन करता है। आप का दायित्व यह भी नहीं है कि किसी को सत्य मनवा दें। फिर कुरआन ऐसी चीज़ नहीं है जिसे विनय और खुशामद से प्रस्तुत किया जाये। बल्कि जो उस पर विचार करेगा तो स्वंय ही इस सत्य को पा लेगा। और जान लेगा कि जिस निराकार शक्ति ने सब कुछ किया है तो पूजा भी मात्र उसी की करें और उसी के कृतज्ञ हों। फिर यदि वह अपनी कृतध्नता पर अड़े रह गये तो एक दिन आयेगा जब यह मान मर्यादा और उन का कोई सहायक नहीं रह जायेगा और प्रत्येक के कर्मों का फल उस के सामने आ जायेगा।
  • अन्त में आयत 42 तक क्यामत का भ्यावह चित्र तथा सदाचारियों और दुराचारियों के अलग-अलग परिणाम बताये गये हैं।

सूरह अबसा | Surah Abasa in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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عَبَسَ وَتَوَلَّىٰ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

अ़-ब-स व तवल्ला

हिंदी अनुवाद

(नबी ने) त्योरी चढ़ाई तथा मुँह फेर लिया।

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أَن جَاءَهُ الْأَعْمَىٰ ‎ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

अन् जा-अहुल् अअमा

हिंदी अनुवाद

इस कारण कि उसके पास एक अँधा आया।

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وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُ يَزَّكَّىٰ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

व मा युद्री-क ल अ़ल्लहू यज़्ज़क्का

हिंदी अनुवाद

और तुम क्या जानो शायद वह पवित्रता प्राप्त करे।

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أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ الذِّكْرَىٰ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

औ यज़्ज़क्करु फ़-तन्फ़-अ़हुज़्ज़िक्रा

हिंदी अनुवाद

या नसीह़त ग्रहण करे, जो उसे लाभ देती।

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أَمَّا مَنِ اسْتَغْنَىٰ ‎ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

अम्मा मनिस्तग्ना

हिंदी अनुवाद

परन्तु, जो विमुख (निश्चिन्त) है।

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فَأَنتَ لَهُ تَصَدَّىٰ ‎ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

फ़-अन्-त लहू तसद्दा

हिंदी अनुवाद

तुम उनकी ओर ध्यान दे रहे हो।

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وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

व मा अ़लै-क अ़ल्ला यज़्ज़क्का

हिंदी अनुवाद

जबकि तुमपर कोई दोष नहीं, यदि वह पवित्रता ग्रहण न करे।

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‏ وَأَمَّا مَن جَاءَكَ يَسْعَىٰ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

व अम्मा मन् जा-अ-क यसआ़

हिंदी अनुवाद

तथा जो तुम्हारे पास दौड़ता आया।

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‏ وَهُوَ يَخْشَىٰ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

व हु-व यख़्शा

हिंदी अनुवाद

और वह डर भी रहा है।

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‏ فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

फ़-अन्-त अ़न्हु त-लह्हा

हिंदी अनुवाद

तुम उसकी ओर ध्यान नहीं देते।[1] 1. (1-10) भावार्थ यह है कि सत्य के प्रचारक का यह कर्तव्य है कि जो सत्य की खोज में हो भले ही वह दरिद्र हो उसी के सुधार पर ध्यान दे। और जो अभिमान के कारण सत्य की परवाह नहीं करते उन के पीछे समय न गवायें। आप का यह दायित्व भी नहीं है कि उन्हें अपनी बात मनवा दें।

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كَلَّا إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

कल्ला इन्नहा तज्कि-रतुन्

हिंदी अनुवाद

कदापि ये न करो, ये (अर्थात क़ुर्आन) एक स्मृति (याद दहानी) है।

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‏ فَمَن شَاءَ ذَكَرَهُ ‎ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

फ़-मन् शा-अज़-करह्

हिंदी अनुवाद

अतः, जो चाहे स्मरण (याद) करे।

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‏ فِي صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ ‎ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

फ़ी सुहुफ़िम्-मुकर्र-मतिम्

हिंदी अनुवाद

माननीय शास्त्रों में है।

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مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

मरफू-अ़तिम् मुतह्ह-रतिम्

हिंदी अनुवाद

जो ऊँचे तथा पवित्र हैं।

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بِأَيْدِي سَفَرَةٍ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

बिऐदी स-फ़-रतिन्

हिंदी अनुवाद

ऐसे लेखकों (फ़रिश्तों) के हाथों में है।

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كِرَامٍ بَرَرَةٍ ‎ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

किरामिम् ब-र-रह्

हिंदी अनुवाद

जो सम्मानित और आदरणीय हैं।[1] 1. (11-16) इन में क़ुर्आन की महानता को बताया गया है कि यह एक स्मृति (याद दहानी) है। किसी पर थोपने के लिये नहीं आया है। बल्कि वह तो फ़रिश्तों के हाथों में स्वर्ग में एक पवित्र शास्त्र के अन्दर सूरक्षित है। और वहीं से वह (क़ुर्आन) इस संसार में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा जा रहा है।

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قُتِلَ الْإِنسَانُ مَا أَكْفَرَهُ ‎ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

कुतिलल्-इन्सानु मा अक्-फ़रह्

हिंदी अनुवाद

इन्सान मारा जाये, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

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مِنْ أَيِّ شَيْءٍ خَلَقَهُ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

मिन् अय्यि शैइन् ख़-लक़ह्

हिंदी अनुवाद

उसे किस वस्तु से (अल्लाह) ने पैदा किया?

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مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُ فَقَدَّرَهُ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

मिन् नुत्फ़तिन् , ख़-ल-क़हू फ़-क़द्द-रहू

हिंदी अनुवाद

उसे वीर्य से पैदा किया, फिर उसका भाग्य बनाया।

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ثُمَّ السَّبِيلَ يَسَّرَهُ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

सुम्मस्सबी-ल यस्स-रहू

हिंदी अनुवाद

फिर उसके लिए मार्ग सरल किया।

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‏ ثُمَّ أَمَاتَهُ فَأَقْبَرَهُ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

सुम्-म अमातहू फ़-अक़्ब-रहू

हिंदी अनुवाद

फिर मौत दी, फिर समाधि में डाल दिया।

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‏ ثُمَّ إِذَا شَاءَ أَنشَرَهُ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

सुम्-म इज़ा शा-अ अन्श-रह्

हिंदी अनुवाद

फिर जब चाहेगा, उसे जीवित कर लेगा।

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كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَا أَمَرَهُ ‎ ﴾ 23 ﴿

Transliteration

कल्ला लम्मा यक्ज़ि मा अ-मरह्

हिंदी अनुवाद

वस्तुतः, उसने उसकी आज्ञा का पालन नहीं किया।[1] 1. (17-23) तक विश्वासहीनों पर धिक्कार है कि यदि वह अपने अस्तित्व पर विचार करें कि हम ने कितनी तुच्छ वीर्य की बूँद से उस की रचना की तथा अपनी दया से उसे चेतना और समझ दी। परन्तु इन सब उपकारों को भूल कर कृतघ्न बना हुआ है, और पूजा उपासना अन्य की करता है।

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فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ ﴾ 24 ﴿

Transliteration

फ़ल्यन्जुरिल्-इन्सानु इला ताआ़मिही

हिंदी अनुवाद

इन्सान अपने भोजन की ओर ध्यान दे।

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‏ أَنَّا صَبَبْنَا الْمَاءَ صَبًّا ‎ ﴾ 25 ﴿

Transliteration

अन्ना स-बब्नल्-मा-अ सब्बा

हिंदी अनुवाद

हमने मूसलाधार वर्षा की।

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‏ ثُمَّ شَقَقْنَا الْأَرْضَ شَقًّا ﴾ 26 ﴿

Transliteration

सुम्-म शक़फ़्नल्-अर-ज़ शक़्का़

हिंदी अनुवाद

फिर धरती को चीरा फाड़ा।

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‏ فَأَنبَتْنَا فِيهَا حَبًّا ‎ ﴾ 27 ﴿

Transliteration

फ़-अम्बत्ना फ़ीहा हब्बंव्

हिंदी अनुवाद

फिर उससे अन्न उगाया।

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‏ وَعِنَبًا وَقَضْبًا ﴾ 28 ﴿

Transliteration

व अि-नबंव्-व क़ज़्बंव

हिंदी अनुवाद

तथा अंगूर और तरकारियाँ।

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وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا ﴾ 29 ﴿

Transliteration

व जैतूनंव्-व नख़्लंव्

हिंदी अनुवाद

तथा ज़ैतून एवं खजूर।

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‏ وَحَدَائِقَ غُلْبًا ‎ ﴾ 30 ﴿

Transliteration

व हदाइ-क गुल्बंव्

हिंदी अनुवाद

तथा घने बाग़।

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وَفَاكِهَةً وَأَبًّا ﴾ 31 ﴿

Transliteration

व फ़ाकि-हतंव्-व अब्बम्

हिंदी अनुवाद

एवं फल तथा वनस्पतियाँ।

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مَّتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ ﴾ 32 ﴿

Transliteration

मताअ़ल्-लकुम् व लि-अन्आ़मिकुम्

हिंदी अनुवाद

तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लिए।[1] 1. (24-32) इन आयतों में इन्सान के जीवन साधनों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अल्लाह की अपार दया की परिचायक हैं। अतः जब सारी व्यवस्था वही करता है तो फिर उस के इन उपकारों पर इन्सान के लिये उचित था कि उसी की बात माने और उसी के आदेशों का पालन करे जो क़ुर्आन के माध्यम से अन्तिम नबी मूह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्म) द्वारा परस्तुत किया जा रहा है। (दावतुल क़ुर्आन)

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فَإِذَا جَاءَتِ الصَّاخَّةُ ‎ ﴾ 33 ﴿

Transliteration

फ़-इज़ा जा-अतिस्साख़्ख़हू

हिंदी अनुवाद

तो जब कान फाड़ देने वाली (प्रलय) आ जायेगी।

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‏ يَوْمَ يَفِرُّ الْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ ﴾ 34 ﴿

Transliteration

यौ-म यफ़िर्रुल्-मरउ मिन् अख़ीहि

हिंदी अनुवाद

उस दिन इन्सान अपने भाई से भागेगा।

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وَأُمِّهِ وَأَبِيهِ ﴾ 35 ﴿

Transliteration

व उम्मिही व अबीहि

हिंदी अनुवाद

तथा अपने माता और पिता से।

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وَصَاحِبَتِهِ وَبَنِيهِ ﴾ 36 ﴿

Transliteration

व साहि-बतिही व बनीह्

हिंदी अनुवाद

एवं अपनी पत्नी तथा अपने पुत्रों से।

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‏ لِكُلِّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ ‎ ﴾ 37 ﴿

Transliteration

लि-कुल्लिम्-रिइम् मिन्हुम् यौमइज़िन् शअनुंय्-युग्नीह

हिंदी अनुवाद

प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन अपनी पड़ी होगी।

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وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌ ‎ ﴾ 38 ﴿

Transliteration

वुजूहुंय्-यौमइज़िम् मुस्फ़ि-रतुन्

हिंदी अनुवाद

उस दिन बहुत से चेहरे उज्ज्वल होंगे।

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ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌ ‎ ﴾ 39 ﴿

Transliteration

ज़ाहि-कतुम् मुस्तब्शि-रतुन्

हिंदी अनुवाद

हंसते एवं प्रसन्न होंगे।

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وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ ‎ ﴾ 40 ﴿

Transliteration

व वुजूहुंय् यौमइज़िन् अ़लैहा ग़-ब-रतुन्

हिंदी अनुवाद

तथा बहुत-से चेहरों पर धूल पड़ी होगी।

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تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ ﴾ 41 ﴿

Transliteration

तर्-हकुहा क़-तरह्

हिंदी अनुवाद

उनपर कालिमा छाई होगी।

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أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَفَرَةُ الْفَجَرَةُ ﴾ 42 ﴿

Transliteration

उलाइ-क हुमुल्क-फ़-रतुल् फ़-जरह्

हिंदी अनुवाद

वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।[1] 1. (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है तो उस के अपने लोग उस की सहायता और रक्षा करते हैं। परन्तु प्रलय के दिन सब को अपनी अपनी पड़ी होगी और उस के कर्म ही उस की रक्षा करेंगे।

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