12. सूरह युसूफ 1-111

सूरह यूसुफ के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है, इस में 111 आयतें हैं।

  • इस में नबी यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की पूरी कथा का वर्णन किया गया है। इस के द्वारा यह संकेत किया गया है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन को मक्का में कुरैश ने जान से मार देने अथवा देश से निकाल देने की योजना बनायी है वह ऐसे ही निष्फल हो जायेंगे जैसे यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाईयों की सारी योजना निष्फल हो गई| और एक दिन ऐसा भी आया कि सब भाई उन के आगे हाथ फैलाये खड़े थे| और कुआन की यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई।
  • आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीना हिज्रत कर गये| फिर सन् (8) हिज्री में आप ने मक्का को विजय किया तो आप के विरोधि कुरैश आप के आगे उसी प्रकार विवश खड़े थे जैसे युसुफ (अलैहिस्सलाम) के भाई उन के आगे हाथ फैलाये कह रहे थे की आप हमे दान कीजिये, अल्लाह दानशीलों को अच्छा बदला देता है। और जैसे यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाईयों को क्षमा कर दिया वैसे ही आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी कहाः जाओ, तुम पर कोई दोष नहीं, अल्लाह तुम्हें क्षमा करे वह सर्वोत्तम दयावान् है| आप उन के अत्याचार का बदला ले सकते थे किन्तु जब आप ने उन से पूछा कि तुम्हारा विचार क्या है कि मैं तुम्हारे साथ क्या करूँगा?? तो उन के यह कहने पर कि आप सज्जन भाई तथा सज्जन भाई के पुत्र हैं, आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मैं तुम से वही कहता हूँ जो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाईयों से कहा था कि आज तुम पर कोई दोष नहीं, जाओ तुम सभी स्वतंत्र हो| हदीस में है कि सज्जन के सज्जन पुत्र के सज्जन पुत्र, यूसुफ़ पुत्र याकूब पुत्र इसहाक पुत्र इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) हैं। (देखियेः सहीह बुख़ारी, हदीस नं: 3382) एक दूसरी हदीस में आया है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि यदि मैं उतने दिन बंदी रहता जितने दिन यूसुफ (अलैहिस्सलाम) बंदी रहे तो जो व्यक्ति उन को बुलाने आया था मैं उस कहा जाओ, तुम पर के अत्याचार काम्या है कि मैं तुम्हारी के साथ चला जाता। (देखियेः सहीह बुख़ारीः हदीस नं: 3372, और सहीह मुस्लिमः हदीस नं: 2370) याद रहे कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के इस कथन से अभिप्राय यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के सहन की सराहना करना है।
  • इस सूरह में यह शिक्षा है कि जो अल्लाह चाहे वही होता है। विरोधियों के चाहने से कुछ नहीं होता, इस में नव युवको के लिये अपनी मर्यादा की रक्षा के लिये भी एक शिक्षा है।

सूरह यूसुफ हिंदी में | Surah Yusuf in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

अलिफ्-लाम्-रा, तिल् क आयातुल्-किताबिल मुबीन

हिंदी अनुवाद

अलिफ, लाम, रा। ये खुली पुस्तक की आयतें हैं।

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إِنَّا أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

इन्ना अन्ज़ल्नाहु क़ुरआनन् अ़-रबिय्यल् लअ्ल्लकुम् तअ्क़िलून

हिंदी अनुवाद

हमने इस क़ुर्आन को अरबी में उतारा है, ताकि तुम समझो[1]

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نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ أَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ هَٰذَا الْقُرْآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبْلِهِ لَمِنَ الْغَافِلِينَ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

नह्नु नक़ुस्सु अ़लै-क अह् स-नल् क़-स-सि बिमा औहैना इलै-क हाज़ल-क़ुरआ-न, व इन् कुन-त मिन् क़ब्लिही लमिनल्-ग़ाफ़िलीन

हिंदी अनुवाद

(हे नबी!) हम बहुत अच्छी शैली में आपकी ओर इस क़ुर्आन की वह़्यी द्वारा आपसे इस कथा का वर्णन कर रहे हैं। अन्यथा आप (भी) इससे पूर्व (इससे) असूचित थे।

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إِذْ قَالَ يُوسُفُ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ إِنِّي رَأَيْتُ أَحَدَ عَشَرَ كَوْكَبًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ رَأَيْتُهُمْ لِي سَاجِدِينَ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

इज़् क़ा-ल यूसुफु लि-अबीहि या अ-बति इन्नी रऐतु अ-ह-द अ-श-र कौकबंव्-वश्शम् स वल् क़-म-र रऐतुहुम् ली साजिदीन

हिंदी अनुवाद

जब यूसुफ़ ने अपने पिता से कहाः हे मेरे पिता! मैंने स्वप्न देखा है कि ग्यारह सितारे, सूर्य तथा चाँद मुझे सज्दा कर रहे हैं।

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قَالَ يَا بُنَيَّ لَا تَقْصُصْ رُؤْيَاكَ عَلَىٰ إِخْوَتِكَ فَيَكِيدُوا لَكَ كَيْدًا ۖ إِنَّ الشَّيْطَانَ لِلْإِنسَانِ عَدُوٌّ مُّبِينٌ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

क़ा-ल या बुनय्-य ला तक़्सुस् रूअ्या-क अ़ला इख़्वति क फ़ यकीदू ल-क कैदन्, इन्नश्शैता-न लिल्इन्सानि अदुव्वुम् मुबीन

हिंदी अनुवाद

उसने कहाः हे मेरे पुत्र! अपना स्वप्न अपने भाईयों को न बताना[1], अन्यथा वे तेरे विरुध्द षड्यंत्र रचेंगे। वास्तव में, शैतान मानव का खुला शत्रु है। 1. यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की दूसरी माँओं से दस भाई थे। और एक सगा भाई था। याक़ूब अलैहिस्सलाम यह जानते थे कि सौतीले भाई, यूसुफ़ से ईर्ष्या करते हैं। इस लिये उन को सावधान कर दिया कि अपना स्वप्न उन्हें न बतायें।

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وَكَذَٰلِكَ يَجْتَبِيكَ رَبُّكَ وَيُعَلِّمُكَ مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ وَيُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ آلِ يَعْقُوبَ كَمَا أَتَمَّهَا عَلَىٰ أَبَوَيْكَ مِن قَبْلُ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ﴾ 6 ﴿

Transliteration

व कज़ालि-क यज्तबी-क रब्बु-क व युअ़ल्लिमु-क मिन् तअ्वीलिल्-अहादीसि व युतिम्मु निअ्म तहू अ़लै-क व अला आलि यअ्क़ू-ब कमा अ-तम्महा अ़ला अ-बवै-क मिन् क़ब्लु इब्राही-म व इस्हा-क़, इन्-न रब्ब-क अ़लीमुन् हकीम *

हिंदी अनुवाद

और ऐसा ही होगा, तेरा पालनहार तुझे चुन लेगा तथा तुझे बातों का अर्थ सिखायेगा और तुझपर और याक़ूब के घराने पर अपना पुरस्कार पूरा करेगा[1]। जैसे इससे पहले तेरे पूर्वजों इब्राहीम और इस्ह़ाक़ पर पूरा किया। वास्तव में, तेरा पालनहार बड़ा ज्ञानी तथा गुणी है। 1. यहाँ पुरस्कार से अभिप्राय नबी बनाना है। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

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لَّقَدْ كَانَ فِي يُوسُفَ وَإِخْوَتِهِ آيَاتٌ لِّلسَّائِلِينَ ﴾ 7 ﴿

Transliteration

ल-क़द् का-न फी यूसु-फ़ व इख़्वतिही आयातुल् लिस्सा इलीन

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, यूसुफ़ और उसके भाईयों (की कथा) में पूछने वालों के[1] लिए कई निशानियाँ हैं। 1. यह प्रश्न यहूदियों ने मक्का वासियों के माध्यम से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से किया था, कि वह कौन से नबी हैं जो शाम में रहते थे, और जब उन का पुत्र मिस्र निकल गया तो उस पर रोते-रोते अंधे हो गये? इस पर यह पूरी सूरह उतरी। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

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إِذْ قَالُوا لَيُوسُفُ وَأَخُوهُ أَحَبُّ إِلَىٰ أَبِينَا مِنَّا وَنَحْنُ عُصْبَةٌ إِنَّ أَبَانَا لَفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

इज़् क़ालू ल-यूसुफु व अख़ूहु अहब्बु इला अबीना मिन्ना व नह्नु अुस्बतुन्, इन्-न अबाना लफ़ी ज़लालिम्-मुबीन

हिंदी अनुवाद

जब उन (भाईयों) ने कहाः यूसुफ़ और उसका भाई हमारे पिता को, हमसे अधिक प्रिय हैं। जबकि हम एक गिरोह हैं। वास्तव में, हमारे पिता खुली गुमराही में हैं।

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اقْتُلُوا يُوسُفَ أَوِ اطْرَحُوهُ أَرْضًا يَخْلُ لَكُمْ وَجْهُ أَبِيكُمْ وَتَكُونُوا مِن بَعْدِهِ قَوْمًا صَالِحِينَ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

उक़्तुलू यूसु-फ अवित्रहूहु अर्ज़य्यख़्लु लकुम् वज्हु अबीकुम् व तकूनू मिम्-बअ्दिही क़ौमन् सालिहीन

हिंदी अनुवाद

यूसुफ़ को वध कर दो या उसे किसी धरती में फेंक दो। इससे तुम्हारे पिता का ध्यान केवल तुम्हारी तरफ हो जायेगा और इसके पश्चात् पवित्र बन जाओ।

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قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ السَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

क़ा-ल क़ाइलुम्-मिन्हुम् ला तक़्तुलू यूसु-फ व अल्क़ूहु फ़ी-ग़या-बतिल्-जुब्बि यल्तक़ित्हु बअ् ज़ुस्सय्यारति इन् कुन्तुम् फाअिलीन

हिंदी अनुवाद

उनमें से एक ने कहाः यूसुफ़ को वध न करो, उसे किसी अन्धे कुएँ में डाल दो, उसे कोई क़ाफ़िला निकाल ले जायेगा, यदि कुछ करने वाले हो।

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قَالُوا يَا أَبَانَا مَا لَكَ لَا تَأْمَنَّا عَلَىٰ يُوسُفَ وَإِنَّا لَهُ لَنَاصِحُونَ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

क़ालू या अबाना मा ल-क ला तअ्मन्ना अ़ला यूसु-फ व इन्ना लहू लनासिहून

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः हे हमारे पिता! क्या बात है कि यूसुफ़ के विषय में आप हमपर भरोसा नहीं करते? जबकि हम उसके शुभचिन्तक हैं।

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أَرْسِلْهُ مَعَنَا غَدًا يَرْتَعْ وَيَلْعَبْ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ ﴾ 12 ﴿

Transliteration

अरसिल्हु म अ़ना ग़दंय्-यर्-तअ् व यल्अ़ब् व इन्ना लहू लहाफिज़ून

हिंदी अनुवाद

अरसिल्हु म अ़ना ग़दंय्-यर्-तअ् व यल्अ़ब् व इन्ना लहू लहाफिज़ून

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قَالَ إِنِّي لَيَحْزُنُنِي أَن تَذْهَبُوا بِهِ وَأَخَافُ أَن يَأْكُلَهُ الذِّئْبُ وَأَنتُمْ عَنْهُ غَافِلُونَ ‎ ﴾ 13 ﴿

Transliteration

क़ाल इन्नी ल-यह्ज़ुनुनी अन् तज़्हबू बिही व अख़ाफु अंय्यअ्कु-लहुज्जिअ्बु व अन्तुम् अन्हु ग़ाफ़िलून

हिंदी अनुवाद

उस (पिता) ने कहाः मुझे बड़ी चिन्ता इस बात की है कि तुम उसे ले जाओ और मैं डरता हूँ कि उसे भेड़िया न खा जाये और तुम उससे असावधान रह जाओ।

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‏ قَالُوا لَئِنْ أَكَلَهُ الذِّئْبُ وَنَحْنُ عُصْبَةٌ إِنَّا إِذًا لَّخَاسِرُونَ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

क़ालू ल-इन् अ-क-लहुज़्ज़िअ्बु व नह्नु अुस्बतुन् इन्ना इज़ल्-लख़ासिरून

हिंदी अनुवाद

सब (भाईयों) ने कहाः यदि उसे भेड़िया खा गया, जबकि हम एक गिरोह हैं, तो वास्तव में, हम बड़े विनाश में हैं।

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فَلَمَّا ذَهَبُوا بِهِ وَأَجْمَعُوا أَن يَجْعَلُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمْرِهِمْ هَٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा ज़-हबू बिही व अज्मअू अंय्यज्-अ़लूहु फ़ी ग़या-बतिल-जुब्बि, व औहैना इलैहि लतुनब्बि-अन्नहुम् बिअम्-रिहिम् हाज़ा व हुम् ला यश्अुरून

हिंदी अनुवाद

फिर जब वे उसे ले गये और निश्चय किया कि उसे अंधे कुएं में डाल दें और हमने उस (यूसुफ़) की ओर वह़्यी की कि तुम अवश्य इन्हें इनका कर्म बताओगे और वे कुछ जानते न होंगे।

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وَجَاءُوا أَبَاهُمْ عِشَاءً يَبْكُونَ ‎ ﴾ 16 ﴿

Transliteration

व जाऊ अबाहुम् अिशाअंय्-यब्कून

हिंदी अनुवाद

और वे संध्या को रोते हुए अपने पिता के पास आये।

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قَالُوا يَا أَبَانَا إِنَّا ذَهَبْنَا نَسْتَبِقُ وَتَرَكْنَا يُوسُفَ عِندَ مَتَاعِنَا فَأَكَلَهُ الذِّئْبُ ۖ وَمَا أَنتَ بِمُؤْمِنٍ لَّنَا وَلَوْ كُنَّا صَادِقِينَ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

क़ालू या अबाना इन्ना ज़हब्ना नस्तबिक़ु व तरक्ना यूसु-फ़ अिन्-द मताअिना फ़-अ-क-लहुज़्-ज़िअ्बु, व मा अन्-त बिमुअ्मिनिल्लना व लौ कुन्ना सादिक़ीन

हिंदी अनुवाद

सबने कहाः हे पिता! हम आपस में दौड़ करने लगे और यूसुफ को अपने सामान के पास छोड़ दिया और उसे भेड़िया खा गया और आप तो हमारा विश्वास करने वाले नहीं हैं, यद्यपि हम सच ही क्यों न बोल रहे हों।

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وَجَاءُوا عَلَىٰ قَمِيصِهِ بِدَمٍ كَذِبٍ ۚ قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ وَاللَّهُ الْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

व जाऊ अ़ला क़मीसिही बि-दमिन कज़िबिन, क़ा-ल बल् सव्व-लत् लकुम अन्फुसुकुम् अम्रन्, फ़-सब्-रून् जमीलुन्, वल्लाहुल्-मुस्तआ़नु अ़ला मा तसिफून

हिंदी अनुवाद

और वे यूसुफ़ के कुर्ते पर झूठा रक्त[1] लगाकर लाये। उसने कहाः बल्कि तुम्हारे मन ने तुम्हारे लिए एक सुन्दर बात बना ली है! तो अब धैर्य धारण करना ही उत्तम है और उसके संबन्ध में जो बात तुम बना रहे हो, अल्ला ही से सहायता माँगनी है। 1. भाष्यकारी ने लिखा है कि वे बकरी के बच्चे का रक्त लगा कर लाये थे।

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وَجَاءَتْ سَيَّارَةٌ فَأَرْسَلُوا وَارِدَهُمْ فَأَدْلَىٰ دَلْوَهُ ۖ قَالَ يَا بُشْرَىٰ هَٰذَا غُلَامٌ ۚ وَأَسَرُّوهُ بِضَاعَةً ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَعْمَلُونَ ﴾ 19 ﴿

Transliteration

व जाअत् सय्यारतुन् फ़-अरसलू वारि-दहुम् फ़-अद्ला दल्वहू, क़ा-ल या बुश्रा हाज़ा ग़ुलामुन्, व अ-सर्रूहु बिज़ा-अतन्, वल्लाहु अ़लीमुम्-बिमा यअ्मलून

हिंदी अनुवाद

और एक क़ाफ़िला आया। उसने अपने पानी भरने वाले को भेजा, उसने अपना डोल डाला, तो पुकाराः शुभ हो! ये तो एक बालक है और उसे व्यपारिक सामग्री समझकर छुपा लिया और अल्लाह भली-भाँति जानने वाला था जो वे कर रहे थे।

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وَشَرَوْهُ بِثَمَنٍ بَخْسٍ دَرَاهِمَ مَعْدُودَةٍ وَكَانُوا فِيهِ مِنَ الزَّاهِدِينَ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

व शरौहु बि-स-मनिम् बख़्सिन् दराहि-म मअ्दू – दतिन् व कानू फ़ीहि मिनज़्ज़ाहिदीन *

हिंदी अनुवाद

और उसे तनिक मूल्य; कुछ गिनती के दिरहमों में बेच दिया और वे उसके बारे में कुछ अधिक की इच्छा नहीं रखते थे।

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وَقَالَ الَّذِي اشْتَرَاهُ مِن مِّصْرَ لِامْرَأَتِهِ أَكْرِمِي مَثْوَاهُ عَسَىٰ أَن يَنفَعَنَا أَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًا ۚ وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ وَلِنُعَلِّمَهُ مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ ۚ وَاللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰ أَمْرِهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

व क़ालल्लज़िश्तराहु मिम् मिस्-र लिम्र-अतिही अक्रिमी मस्वाहु असा अंय्यन्फ़-अना औ नत्तखि-ज़हू व-लदन्, व कज़ालि-क मक्कन्ना लियूसु-फ़ फिल्अर्ज़ि, व लिनुअ़ल्लि-महू मिन् तअ्वीलिल्-अहादीसि, वल्लाहु ग़ालिबुन् अ़ला अम्रिही व लाकिन्-न अक्सरन्नासि ला यअ्लमून

हिंदी अनुवाद

और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा, उसने अपनी पत्नी से कहाः इसे आदर-मान से रखो। संभव है ये हमें लाभ पहुँचाये, अथवा हम इसे अपना पुत्र बना लें। इस प्रकार उसे हमने स्थान दिया और ताकि उसे बातों का अर्थ सिखायें और अल्लाह अपना आदेश पूरा करके रहता है। परन्तु अधिक्तर लोग जानते नहीं हैं।

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وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُ آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ﴾ 22 ﴿

Transliteration

व लम्मा ब-ल-ग़ अशुद्-दहू आतैनाहु हुक्मंव्-व अिल्मन्, व कज़ालि क नज्ज़िल-मुह़्सिनीन

हिंदी अनुवाद

और जब वह जवानी को पहुँचा, तो हमने उसे निर्णय करने की शक्ति तथा ज्ञान प्रदान किया और इसी प्रकार हम सदाचारियों को प्रतिफल (बदला) देते हैं।

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وَرَاوَدَتْهُ الَّتِي هُوَ فِي بَيْتِهَا عَن نَّفْسِهِ وَغَلَّقَتِ الْأَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۚ قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ رَبِّي أَحْسَنَ مَثْوَايَ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ ﴾ 23 ﴿

Transliteration

वरा-वदत्हुल्लती हु-व फी बैतिहा अन् नफ्सिही व ग़ल्ल-क़तिल्-अब्वा-ब व क़ालत् है-त ल-क, क़ा-ल मआ़ज़ल्लाहि इन्नहू रब्बी अह़्स-न मस्वा-य, इन्नहू ला युफ्लिहुज़्ज़ालिमून

हिंदी अनुवाद

और वह जिस स्त्री[1] के घर में था, उसने उसके मन को रिझाया और द्वार बन्द कर लिए और बोलीः "आ जाओ"। उसने कहाः अल्लाह की शरण! वह मेरा स्वामी है। उसने मुझे अच्छा स्थान दिया है। वास्तव में, अत्याचारी सफल नहीं होते। 1. अभिप्रेत मिस्र के राजा (अज़ीज़) की पत्नी है।

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وَلَقَدْ هَمَّتْ بِهِ ۖ وَهَمَّ بِهَا لَوْلَا أَن رَّأَىٰ بُرْهَانَ رَبِّهِ ۚ كَذَٰلِكَ لِنَصْرِفَ عَنْهُ السُّوءَ وَالْفَحْشَاءَ ۚ إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُخْلَصِينَ ﴾ 24 ﴿

Transliteration

व ल-क़द् हम्मत् बिही, व हम्-म बिहा लौ ला अर्-रआ बुरहा-न रब्बिही, कज़ालि-क लिनस्रि-फ़ अन्हुस्सू-अ वल्-फ़ह़्शा-अ, इन्नहू मिन् अिबादिनल् मुख़्लसीन

हिंदी अनुवाद

और उस स्त्री ने उसकी इच्छा की और वह (यूसुफ़) भी उसकी इच्छा करते, यदि अपने पालनहार का प्रमाण न देथ लेते[1]। इस प्रकार, हमने (उसे सावधान) किया ताकि उससे बुराई तथा निर्लज्जा को दूर कर दें। वास्तव में, वह हमारे शुध्द भक्तों में था। 1. यूसुफ़ अलैहिस्सलाम कोई फ़रिश्ता नहीं एक मनुष्य थे। इस लिये बुराई का इरादा कर सकते थे, किन्तु उसी समय उन के दिल में यह बात आई कि मैं पाप कर के अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकूँगा। इस प्रकार अल्लाह ने उन्हें बुराई से बचा लिया, जो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बहुत बड़ी प्रधानता है।

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وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ ۚ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَن يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ﴾ 25 ﴿

Transliteration

वस्त-बक़ल् बा-ब व क़द्दत् क़मी-सहू मिन् दुबुरिंव्-व अल्फ़या सय्यि-दहा लदल्-बाबि, क़ालत् मा जज़ा-उ मन अरा द बि अह़्लि-क सूअन् इल्ला अंय्युस्ज-न औ अ़ज़ाबुन अलीम

हिंदी अनुवाद

और दोनों द्वार की ओर दौड़े और उस स्त्री ने उसका कुर्ता पीछे से फाड़ दिया और दोनों ने उसके पति को द्वार के पास पाया। उस (स्त्री) ने कहाः जिसने तेरी पत्नी के साथ बुराई का निश्चय किया, उसका दण्ड इसके सिवा क्या है कि उसे बंदी बना दिया जाये अथवा उसे दुःखदायी यातना (दी जाये)?

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قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِي عَن نَّفْسِي ۚ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ أَهْلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكَاذِبِينَ ‎ ﴾ 26 ﴿

Transliteration

क़ा-ल हि-य रा वदत्-नी अन्-नफ़्सी व शहि-द शाहिदुम् मिन् अह़्लिहा, इन् का-न क़मीसुहू क़ुद्-द मिन् क़ुबुलिन् फ़ स-दक़त् व हु-व मिनल्-काज़िबीन

हिंदी अनुवाद

उसने कहाः इसीने मुझे रिझाना चाहा था और उस स्त्री के घराने से एक साक्षी ने साक्ष्य दिया कि यदि उसका कुर्ता आगे से फाड़ा गया है, तो वह सच्ची है तथा वह झूठा है।

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وَإِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ فَكَذَبَتْ وَهُوَ مِنَ الصَّادِقِينَ ﴾ 27 ﴿

Transliteration

व इन् का-न क़मीसुहू कुद्-द मिन् दुबुरिन् फ़-क-ज़बत् व हु-व मिनस्सादिक़ीन

हिंदी अनुवाद

और यदि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो वह झूठी और वह (यूसुफ़) सच्चा है।

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فَلَمَّا رَأَىٰ قَمِيصَهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ قَالَ إِنَّهُ مِن كَيْدِكُنَّ ۖ إِنَّ كَيْدَكُنَّ عَظِيمٌ ﴾ 28 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा रआ क़मी-सहू क़ुद्-द मिन् दुबुरिन् क़ा-ल इन्नहू मिन्कैदिकुन्-न, इन्-न कै-दकुन्-न अ़ज़ीम

हिंदी अनुवाद

फिर जब उस (पति) ने देखा कि उसका कुर्ता पाछे से फाड़ा गया है, तो कहाः वास्तव में, ये तुम स्त्रियों की चालें हैं और तुम्हारी चालें बड़ी घोर होती हैं।

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يُوسُفُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۚ وَاسْتَغْفِرِي لِذَنبِكِ ۖ إِنَّكِ كُنتِ مِنَ الْخَاطِئِينَ ﴾ 29 ﴿

Transliteration

यूसुफु अअ्-रिज़ अन् हाज़ा, वस्तग्फ़िरी लिज़म्बिकि, इन्नकि कुन्ति मिनल्-ख़ातिईन

हिंदी अनुवाद

हे यूसुफ़! तुम इस बात को जाने दो और (हे स्त्री!) तू अपने पाप की क्षमा माँग, वास्तव में, तू पापियों में से है।

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وَقَالَ نِسْوَةٌ فِي الْمَدِينَةِ امْرَأَتُ الْعَزِيزِ تُرَاوِدُ فَتَاهَا عَن نَّفْسِهِ ۖ قَدْ شَغَفَهَا حُبًّا ۖ إِنَّا لَنَرَاهَا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ‎ ﴾ 30 ﴿

Transliteration

व क़ा-ल निस्वतुन् फ़िल्-मदीनतिम्-र-अतुल् अज़ीज़ि तुराविदु फ़ताहा अन्-नफ्सिही, क़द् श-ग़-फ़हा हुब्बन्, इन्ना ल-नराहा फ़ी ज़लालिम्-मुबीन

हिंदी अनुवाद

नगर की कुछ स्त्रियों ने कहाः अज़ीज़ (प्रमुख अधिकारी) की पत्नी, अपने दास को रिझा रही है! उसे प्रेम ने मुग्ध कर दिया है। हमारे विचार में वह खुली गुमराही में है।

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فَلَمَّا سَمِعَتْ بِمَكْرِهِنَّ أَرْسَلَتْ إِلَيْهِنَّ وَأَعْتَدَتْ لَهُنَّ مُتَّكَأً وَآتَتْ كُلَّ وَاحِدَةٍ مِّنْهُنَّ سِكِّينًا وَقَالَتِ اخْرُجْ عَلَيْهِنَّ ۖ فَلَمَّا رَأَيْنَهُ أَكْبَرْنَهُ وَقَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ وَقُلْنَ حَاشَ لِلَّهِ مَا هَٰذَا بَشَرًا إِنْ هَٰذَا إِلَّا مَلَكٌ كَرِيمٌ ﴾ 31 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा समिअ़त् बिमक् रिहिन्-न अर्-सलत् इलैहिन्-न व अअ्त-दत् लहुन्-न मुत्त-कअंव्-व आतत् कुल-ल वाहि दतिम् मिन्हुन्-न सिक्कीनंव्-व क़ालतिख़्-रूज् अ़लैहिन्-न, फ़-लम्मा रऐ-नहू अक्बर्-नहू व क़त्तअ्-न ऐदियहुन्-न व क़ुल्-न हा-श लिल्लाहि मा हाज़ा ब-शरन्, इन् हाज़ा इल्ला म-लकुन् करीम

हिंदी अनुवाद

फिर जब उसने उन स्त्रियों की मक्कारी की बात सुनी, तो उन्हें बुला भेजा और उनके (आतिथ्य) के लिए गाव-तकिये लगवाये और प्रत्येक स्त्री को एक छुरी दे दी[1]। उसने (यूसुफ़ से) कहाः इनके समक्ष "निकल आ"। फिर जब उन स्त्रियों ने उसे देखा, तो चकित (दंग) होकर अपने हाथ काट बैठीं तथा पुकार उठीं: अल्लाह पवित्र है! ये मनुष्य नहीं ये तो कोई सम्मानित फ़रिश्ता है। 1. ताकि अतिथि स्त्रियाँ उस से फलों को काट कर खायें जो उन के लिये रखे गये थे।

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قَالَتْ فَذَٰلِكُنَّ الَّذِي لُمْتُنَّنِي فِيهِ ۖ وَلَقَدْ رَاوَدتُّهُ عَن نَّفْسِهِ فَاسْتَعْصَمَ ۖ وَلَئِن لَّمْ يَفْعَلْ مَا آمُرُهُ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُونًا مِّنَ الصَّاغِرِينَ ﴾ 32 ﴿

Transliteration

क़ालत् फ़ज़ालिकुन्नल्लज़ी लुम्तुन्ननी फ़ीहि, व ल क़द् रावत्तुहू अ़न् नफ़्सिही फ़स्तअ्-स-म, व ल-इल्लम् यफ्अ़ल् मा आमुरूहू लयुस्ज-नन्-न व ल-यकूनम् मिनस्सागिरीन

हिंदी अनुवाद

उसने कहाः यही वह है, जिसके बारे में तुमने मेरी निंदा की है। वास्तव में, मैंने ही उसे रिझाया था। मगर वह बच निकला और यदि, वह मेरी बात न मानेगा, तो अवश्य बंदी बना दिया जायेगा और अपमानितों में हो जायेगा।

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قَالَ رَبِّ السِّجْنُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا يَدْعُونَنِي إِلَيْهِ ۖ وَإِلَّا تَصْرِفْ عَنِّي كَيْدَهُنَّ أَصْبُ إِلَيْهِنَّ وَأَكُن مِّنَ الْجَاهِلِينَ ‎ ﴾ 33 ﴿

Transliteration

क़ा-ल रब्बिस्सिज्-नु अहब्बु इलय्-य मिम्मा यद्अू-ननी इलैहि, व इल्ला तस्रिफ् अ़न्नी कैदहुन्-न अस्बु इलैहिन्-न व अकुम् मिनल्-जाहिलीन

हिंदी अनुवाद

यूसुफ़ ने प्रार्थना कीः हे मेरे पालनहार! मुझे क़ैद उससे अधिक प्रिय है, जिसकी ओर ये औरतें मुझे बुला रही हैं और यदि तूने मुझसे इनके छल को दूर नहीं किया, तो मैं इनकी ओर झुक पड़ूँगा और अज्ञानों में से हो जाऊँगा।

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فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ‎ ﴾ 34 ﴿

Transliteration

फ़स्तजा-ब लहू रब्बुहू फ़-स-र-फ़ अन्हु कैदहुन्-न, इन्नहू हुवस्-समीअुल अ़लीम

हिंदी अनुवाद

तो उसके पालनहार ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उससे उनके छल को दूर कर दिया। वास्तव में, वह बड़ा सुनने-जानने वाला है।

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ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّن بَعْدِ مَا رَأَوُا الْآيَاتِ لَيَسْجُنُنَّهُ حَتَّىٰ حِينٍ ﴾ 35 ﴿

Transliteration

सुम्-म बदा लहुम् मिम्-बअ्दि मा र-अवुल्-आयाति ल-यस्जुनुन्नहु हत्ता हीन *

हिंदी अनुवाद

फिर उन लोगों[1] ने उचित समझा, इसके पश्चात् कि निशानियाँ देख[2] लीं कि उस (यूसुफ़) को एक अवधि तक के लिए बंदी बना दें। 1. अर्थात अज़ीज़ (मिस्र देश का शासक) और उस के साथियों ने। 2. अर्थात् यूसुफ़ के निर्दोष होने की निशानियाँ।

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وَدَخَلَ مَعَهُ السِّجْنَ فَتَيَانِ ۖ قَالَ أَحَدُهُمَا إِنِّي أَرَانِي أَعْصِرُ خَمْرًا ۖ وَقَالَ الْآخَرُ إِنِّي أَرَانِي أَحْمِلُ فَوْقَ رَأْسِي خُبْزًا تَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْهُ ۖ نَبِّئْنَا بِتَأْوِيلِهِ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ ﴾ 36 ﴿

Transliteration

व द-ख़-ल म-अ़हुस्सिज्-न फ़-तयानि, क़ा-ल अ-हदुहुमा इन्नी अरानी अअ्सिरू ख़म्रन, व क़ालल्-आख़रू इन्नी अरानी अह़्मिलु फौ-क़ रअ्सी ख़ुब्ज़न् तअ्कुलुत्तैरू मिन्हु, नब्बिअ्ना बितअ्वीलिही, इन्ना नरा-क मिनल्मुह़्सिनीन

हिंदी अनुवाद

और उसके साथ क़ैद में दो युवकों ने प्रवेश किया। उनमें से एक ने कहाः मैंने स्वप्न देखा है कि शराब निचोड़ रहा हूँ और दूसरे ने कहाः मैंने स्वप्न देखा है कि अपने सिर के ऊपर रोटी उठाये हुए हूँ, जिसमें से पक्षी खा रहे हैं। हमें इसका अर्थ (स्वप्नफल) बता दो। हम देख रहे हैं कि तुम सदाचारियों में से हो।

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قَالَ لَا يَأْتِيكُمَا طَعَامٌ تُرْزَقَانِهِ إِلَّا نَبَّأْتُكُمَا بِتَأْوِيلِهِ قَبْلَ أَن يَأْتِيَكُمَا ۚ ذَٰلِكُمَا مِمَّا عَلَّمَنِي رَبِّي ۚ إِنِّي تَرَكْتُ مِلَّةَ قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ ﴾ 37 ﴿

Transliteration

क़ा-ल ला यअ्तीकुमा तआ़मुन् तुर्ज़क़ानिही इल्ला नब्बअ्तुकुमा बितअ्वीलिही क़ब्-ल अंय्यअ्ति-यकुमा, ज़ालिकुमा मिम्मा अ़ल्ल-मनी रब्बी, इन्नी तरक्तु मिल्ल-त क़ौमिल् ला युअ्मिनू-न बिल्लाहि व हुम् बिल्आख़िरति हुम् काफिरून

हिंदी अनुवाद

यूसुफ़ ने कहाः तुम्हारे पास तुम्हारा वह भोजन नहीं आयेगा, जो तुम दोनों को दिया जाता है, परन्तु मैं तुम दोनों को उसका अर्थ (फल) बता दूँगा; ये उन बातों में से है, जो मेरे पालनहार ने मुझे सिखायी हैं। मैंने उस जाति का धर्म तज दिया है, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखती और वही परलोक को नकारने वाले हैं।

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وَاتَّبَعْتُ مِلَّةَ آبَائِي إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ مَا كَانَ لَنَا أَن نُّشْرِكَ بِاللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ مِن فَضْلِ اللَّهِ عَلَيْنَا وَعَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ ﴾ 38 ﴿

Transliteration

वत्तबअ्तु मिल्ल-त आबाई इब्राही-म व इस्हा-क़ व यअ्क़ू-ब, मा का-न लना अन् नुश्रि-क बिल्लाहि मिन् शैइन्, ज़ालि-क मिन् फ़ज़्लिल्लाहि अ़लैना व अ़लन्नासि व लाकिन्-न अक्सरन्नासि ला यश्कुरून

हिंदी अनुवाद

और अपने पूर्वजों; इब्राहीम, इस्ह़ाक़ और याक़ूब के धर्म का अनुसरण किया है। हमारे लिए वैध नहीं कि किसी चीज़ को अल्लाह का साझी बनायें। ये अल्लाह की दया है, हमपर और लोगों पर। परन्तु अधिक्तर लोग कृतज्ञ नहीं होते[1]1. अर्थात तौह़ीद और नबियों के धर्म को नहीं मानते जो अल्लाह का उपकार है।

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يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَأَرْبَابٌ مُّتَفَرِّقُونَ خَيْرٌ أَمِ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ ﴾ 39 ﴿

Transliteration

या साहि-बयिस्सिज्-नि अ-अर्बाबुम् मु तफ़र्रिक़ू-न ख़ैरून् अमिल्लाहुल् वाहिदुल-क़ह़्हार

हिंदी अनुवाद

हे मेरे क़ैद के दोनों साथियो! क्या विभिन्न पूज्य उत्तम हैं या एक प्रभुत्वशाली अल्लाह??

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مَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا أَسْمَاءً سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۚ أَمَرَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ﴾ 40 ﴿

Transliteration

मा तअ्बुदू-न मिन् दुनिही इल्ला अस्मा-अन् सम्मैतुमूहा अन्तुम् व आबाउकुम् मा अन्ज़लल्लाहु बिहा मिन् सुल्तानिन्, इनिल्हुक्मु इल्ला लिल्लाहि, अ-म-र अल्ला तअ्बुदू इल्ला इय्याहु, ज़ालिकद्-दीनुल क़य्यिमु व लाकिन् न अक्सरन्नासि ला यअ्लमून

हिंदी अनुवाद

तुम अल्लाह के सिवा जिसकी इबादत (वंदना) करते हो, वे केवल नाम हैं, जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने उनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। शासन तो केवल अल्लाह का है। उसने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत (वंदना) न करो। यही सीधा धर्म है। परन्तु अधिक्तर लोग नहीं जानते हैं।

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يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَمَّا أَحَدُكُمَا فَيَسْقِي رَبَّهُ خَمْرًا ۖ وَأَمَّا الْآخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ الطَّيْرُ مِن رَّأْسِهِ ۚ قُضِيَ الْأَمْرُ الَّذِي فِيهِ تَسْتَفْتِيَانِ ﴾ 41 ﴿

Transliteration

या साहि-बयिस्सिज्-नि अम्मा अ-हदुकुमा फ़-यस्क़ी रब्बहू ख़म्-रन्, व अम्मल्-आख़रू फ़युस्-लबु फ़-तअ्कुलुत्-तैरू मिर्रअ्सिही, कुज़ियल अम्रुल्लज़ी फ़ीहि तस्तफ्तियान

हिंदी अनुवाद

हे मेरे क़ैद के दोनों साथियो! रहा तुममें से एक, तो वह अपने स्वामि को शराब पिलायेगा तथा दूसरा, तो उसको फाँसी दी जायेगी और पक्षी उसके सिर में से खायेंगे। उसका निर्णय कर दिया गया है, जिसके संबन्ध में तुम दोनों प्रश्न कर रहे थे।

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وَقَالَ لِلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُ نَاجٍ مِّنْهُمَا اذْكُرْنِي عِندَ رَبِّكَ فَأَنسَاهُ الشَّيْطَانُ ذِكْرَ رَبِّهِ فَلَبِثَ فِي السِّجْنِ بِضْعَ سِنِينَ ﴾ 42 ﴿

Transliteration

व क़ा-ल लिल्लज़ी ज़न्-न अन्नहू नाजिम् मिन्हुमज़्कुर्नी अिन्-द रब्बि-क, फ़अन्साहुश्शैतानु ज़िक्-र रब्बिही फ-लबि स फिस्सिज्-नि बिज़्-अ सिनीन

हिंदी अनुवाद

और उससे कहा, जिसे समझा कि वह उन दोनों में से मुक्त होने वाला हैः मेरी चर्चा अपने स्वामी के पास कर देना। तो शैतान ने उसे अपने स्वामी के पास, उसकी चर्चा करने को भुला दिया। अतः वह (यूसुफ़) कई वर्ष क़ैद में रह गया।

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وَقَالَ الْمَلِكُ إِنِّي أَرَىٰ سَبْعَ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ ۖ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي رُؤْيَايَ إِن كُنتُمْ لِلرُّؤْيَا تَعْبُرُونَ ‎ ﴾ 43 ﴿

Transliteration

व क़ालल्-मलिकु इन्नी अरा सब्-अ़ ब क़रातिन् सिमानिंय्य अ्कुलुहुन् न सब्अुन् अिजाफुंव्व सब्-अ सुम्बुलातिन् ख़ुज़् रिंव्-व उ-ख-र याबिसातिन्, या अय्युहल् म लउ अफ्तूनी फी रूअ्या-य इन् कुन्तुम् लिर्रूअ्या तअ्बुरून

हिंदी अनुवाद

और (एक दिन) राजा ने कहाः मैं सात मोटी गायों को सपने में देखता हूँ, जिनको सात दुबली गायें खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और दूसरी सात सूखी हैं। हे प्रमुखो! मुझे मेरे स्वप्न के सम्बंध में बताओ, यदि तुम स्वप्न-फल बता सकते हो?

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قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ ۖ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ الْأَحْلَامِ بِعَالِمِينَ ﴾ 44 ﴿

Transliteration

क़ालू अज़्ग़ासु अह़्लामिन्, व मा नह्नु बितअ्वीलिल्-अह़्लामि बिआलिमीन

हिंदी अनुवाद

सबने कहाः ये तो उलझे स्वप्न की बातें हैं और हम ऐसे स्वप्नों का अर्थ (फल) नहीं जानते।

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وَقَالَ الَّذِي نَجَا مِنْهُمَا وَادَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا أُنَبِّئُكُم بِتَأْوِيلِهِ فَأَرْسِلُونِ ‎ ﴾ 45 ﴿

Transliteration

व क़ालल्लज़ी नजा मिन्हुमा वद्द-क-र बअ्-द उम्मतिन् अ-ना उनब्बिउकुम् बितअ्वीलिही फ़-अर्सिलून

हिंदी अनुवाद

और उसने कहा, जो दोनों में से मुक्त हुआ था और उसे एक अवधि के पश्चात्, बात याद आयी थीः मैं तुम्हें इसका फल (अर्थ) बता दूँगा, तुम मुझे भेज[1] दो। 1. अर्थात क़ैद ख़ाने में यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के पास।

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يُوسُفُ أَيُّهَا الصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِي سَبْعِ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ لَّعَلِّي أَرْجِعُ إِلَى النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ ﴾ 46 ﴿

Transliteration

यूसुफु अय्युहस्-सिद्दीक़ु अफ्तिना फ़ी सब्अिब- क़रातिन् सिमानिंय्यअ्कुलुहुन्-न सब्अुन् अिजाफुंव् – व सब्अि सुम्बुलातिन् खुज्रिंव्-व उ-ख़-र याबिसातिल्-लअल्ली अर्जिअु इलन्नासि लअ़ल्लहुम् यअ्लमून

हिंदी अनुवाद

हे यूसुफ़! हे सत्यवादी! हमें सात मोटी गायों के बारे में बताओ, जिन्हें सात दुबली गायें खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और सात सूखी, ताकि लोगों के पास वापस जाऊँ और ताकि वे जान[1] लें। 1. अर्थात आप की प्रतिष्ठा और ज्ञान को।

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قَالَ تَزْرَعُونَ سَبْعَ سِنِينَ دَأَبًا فَمَا حَصَدتُّمْ فَذَرُوهُ فِي سُنبُلِهِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّا تَأْكُلُونَ ﴾ 47 ﴿

Transliteration

क़ा-ल तज़्-रअू-न सब्-अ सिनी-न द-अबन् फ़मा हसत्तुम् फ़ ज़रूहु फ़ी सुम्बुलिही इल्ला क़लीलम्-मिम्मा तअ्कुलून

हिंदी अनुवाद

यूसुफ़ ने कहाः तुम सात वर्ष निरन्तर खेती करते रहोगे। तो जो कुछ काटो, उसे उसकी बाली में छोड़ दो, परन्तु थोड़ा जिसे खाओगे। ( उसे बालियों से निकाल लो।)

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ثُمَّ يَأْتِي مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ سَبْعٌ شِدَادٌ يَأْكُلْنَ مَا قَدَّمْتُمْ لَهُنَّ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّا تُحْصِنُونَ ﴾ 48 ﴿

Transliteration

सुम्-म यअ्ती मिम्-बअ्दि ज़ालि-क सब्अुन् शिदादुंय्यअ्कुल्-न मा क़द्दम्तुम् लहुन्-न इल्ला क़लीलम् मिम्मा तुह़्सिनून

हिंदी अनुवाद

फिर इसके पश्चात् सात कड़े अकाल के वर्ष होंगे, जो उसे खा जायेंगे, जो तुमने उनके लिए पहले से रखा है, परन्तु उसमें से थोड़ा, जिसे तुम सुरक्षित रखोगे।

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ثُمَّ يَأْتِي مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ عَامٌ فِيهِ يُغَاثُ النَّاسُ وَفِيهِ يَعْصِرُونَ ﴾ 49 ﴿

Transliteration

सुम्-म यअ्ती मिम्-बअ्दि ज़ालि-क आमुन् फ़ीहि युग़ासुन्नासु व फ़ीहि यअ्सिरून*

हिंदी अनुवाद

फिर इसके पश्चात् एक ऐसा वर्ष आयेगा, जिसमें लोगों पर जल बरसाया जायेगा तथा उसीमें वे (रस) निचोड़ेंगे।

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وَقَالَ الْمَلِكُ ائْتُونِي بِهِ ۖ فَلَمَّا جَاءَهُ الرَّسُولُ قَالَ ارْجِعْ إِلَىٰ رَبِّكَ فَاسْأَلْهُ مَا بَالُ النِّسْوَةِ اللَّاتِي قَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ ۚ إِنَّ رَبِّي بِكَيْدِهِنَّ عَلِيمٌ ﴾ 50 ﴿

Transliteration

व क़ालल् मलिकुअ्तूनी बिही, फ़-लम्मा जा-अहुर्रसूलु क़ालर्जिअ् इला रब्बि-क फ़स् अल्हु मा बालुन-निस्वतिल्लाती कत्तअ्-न ऐदि यहुन्-न, इन्-न रब्बी बिकैदिहिन-न अलीम

हिंदी अनुवाद

और राजा ने कहाः उसे मेरे पास लाओ और जब यूसुफ़ के पास भेजा हुआ आया, तो आपने उससे कहा कि अपने स्वामी के पास वापस जाओ[1] और उससे पूछो कि उन स्त्रियों की क्या दशा है, जिन्होंने अपने हाथ काट लिए थे? वास्तव में, मेरा पालनहार उन स्त्रियों के छल से भली-भाँति अवगत है। 1. यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को बंदी बनाये जाने से अधिक उस का कारण जानने की चिन्ता थी। वह चाहते थे कि क़ैद से निकलने से पहले यह सिध्द होना चाहिये कि मैं निर्दोष था।

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قَالَ مَا خَطْبُكُنَّ إِذْ رَاوَدتُّنَّ يُوسُفَ عَن نَّفْسِهِ ۚ قُلْنَ حَاشَ لِلَّهِ مَا عَلِمْنَا عَلَيْهِ مِن سُوءٍ ۚ قَالَتِ امْرَأَتُ الْعَزِيزِ الْآنَ حَصْحَصَ الْحَقُّ أَنَا رَاوَدتُّهُ عَن نَّفْسِهِ وَإِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ ﴾ 51 ﴿

Transliteration

क़ा-ल मा ख़त्बुकुन्-न इज़् रावत्तुन्-न यूसु-फ़ अन् नफ्सिही, क़ुल-न हा-श लिल्लाहि मा अ़लिम्-ना अलैहि मिन् सूइन्, क़ालतिम्र-अतुल् अ़ज़ीज़िल्-आ-न हस्ह-ल्हक़्क़ु, अ-ना रावत्तुहू अन् नफ्सिही व इन्नहू लमिनस्सादिक़ीन

हिंदी अनुवाद

(राजा) ने उन स्त्रियों से पूछाः तुम्हारा क्या अनुभव है, उस समय का, जब तुमने यूसुफ़ के मन को रिझाया था? सबने कहाः अल्लाह पवित्र है! उसपर हमने कोई बुराई का प्रभाव नहीं जाना। तब अज़ीज़ की पत्नी बोल उठीः अब सत्य उजागर हो गया, वास्तव में, मैंने ही उसके मन को रिझाया था और निःसंदेह वह सत्यवादियों में है[1]1. यह क़ुर्आन पाक का बड़ा उपकार है कि उस ने रसूलों तथा नबियों पर लगाये गये बहुत से आरोपों का निवारण (खण्डन) कर दिया है। जिसे अह्ले किताब (यहूदी तथा ईसाई) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के विषय में बहुत सी निर्मूल बातें घड़ ली थीं जिन को क़ुर्आन ने आ कर साफ़ कर दिया।

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ذَٰلِكَ لِيَعْلَمَ أَنِّي لَمْ أَخُنْهُ بِالْغَيْبِ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي كَيْدَ الْخَائِنِينَ ﴾ 52 ﴿

Transliteration

ज़ालि-क लि-यअ्ल-म अन्नी लम् अख़ुन्हु बिल्ग़ैबि व अन्नल्ला ह ला यह्दी कैदल्-ख़ाइनीन

हिंदी अनुवाद

ये (यूसुफ़ ने) इसलिए किया, ताकि उसे (अज़ीज़ को) विश्वास हो जाये, कि मैंने गुप्त रूप से उसके साथ विश्वास घात नहीं किया और वस्तुतः, अल्लाह विश्वासघातियों से प्रेम नहीं करता।

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وَمَا أُبَرِّئُ نَفْسِي ۚ إِنَّ النَّفْسَ لَأَمَّارَةٌ بِالسُّوءِ إِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّي ۚ إِنَّ رَبِّي غَفُورٌ رَّحِيمٌ ﴾ 53 ﴿

Transliteration

व मा उबर्रिउ नफ़्सी, इन्नन्नफ्-स ल-अम्मा-रतुम्-बिस्सू-इ इल्ला मा रहि-म रब्बी, इन्-न रब्बी ग़फूरुर्रहीम

हिंदी अनुवाद

और मैं अपने मन को निर्दोश नहीं कहता, मन तो बुराई पर उभारता है; परन्तु जिसपर मेरा पालनहार दया कर दे। मेरा पालनहार अति क्षमाशील तथा दयावान् है।

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وَقَالَ الْمَلِكُ ائْتُونِي بِهِ أَسْتَخْلِصْهُ لِنَفْسِي ۖ فَلَمَّا كَلَّمَهُ قَالَ إِنَّكَ الْيَوْمَ لَدَيْنَا مَكِينٌ أَمِينٌ ﴾ 54 ﴿

Transliteration

व क़ालल्-मलिकुअ्तूनी बिही अस्तख़्लिस्हु लिनफ़्सी, फ़-लम्मा कल्ल-महू क़ा-ल इन्नकल्-यौ-म लदैना मकीनुन् अमीन

हिंदी अनुवाद

राजा ने कहाः उसे मेरे पास लाओ, उसे मैं अपने लिए विशेष कर लूँ और जब (राजा ने) उस (यूसुफ़) से बात की, तो कहाः वस्तुतः तू आज हमारे पास आदर्णीय भरोसा, करने योग्य है।

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قَالَ اجْعَلْنِي عَلَىٰ خَزَائِنِ الْأَرْضِ ۖ إِنِّي حَفِيظٌ عَلِيمٌ ﴾ 55 ﴿

Transliteration

क़ालज्अ़ल्नी अ़ला ख़ज़ाइनिल्-अर्ज़ि, इन्नी हफ़ीजुन अलीम

हिंदी अनुवाद

उस (यूसुफ़) ने कहाः मुझे देश का कोषाधिकारी बना दीजिये। वास्तव में मैं, रखवाला, बड़ा ज्ञानी हूँ।

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وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ يَتَبَوَّأُ مِنْهَا حَيْثُ يَشَاءُ ۚ نُصِيبُ بِرَحْمَتِنَا مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا نُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ ﴾ 56 ﴿

Transliteration

व कज़ालि-क मक्कन्ना लियूसु-फ़ फ़िलअर्ज़ि य-तबव्वउ मिन्हा हैसु यशा-उ, नुसीबु बिरह् मतिना मन्-नशा-उ वला नुज़ीअु अज्रल्-मुह़्सिनीन

हिंदी अनुवाद

और इस प्रकार, हमने यूसुफ को उस धरती (देश) में अधिकार दिया, वह उसमें जहाँ चाहे, रहे। हम अपनी दया जिसे चाहें, प्रदान करते हैं और सदाचारियों का प्रतिफल व्यर्थ नहीं करते।

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وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ ﴾ 57 ﴿

Transliteration

व ल अज्रुल्-आखिरति खैरूल्-लिल्लज़ी-न आमनू व कानू यत्तक़ून *

हिंदी अनुवाद

और निश्चय परलोक का प्रतिफल उन लोगों के लिए उत्तम है, जो ईमान लाये और अल्लाह से डरते रहे।

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وَجَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُوا عَلَيْهِ فَعَرَفَهُمْ وَهُمْ لَهُ مُنكِرُونَ ‎ ﴾ 58 ﴿

Transliteration

व जा-अ इख़्वतु यूसु-फ़ फ़-द-ख़लू अ़लैहि फ़-अ-र-फहुम् व हुम् लहू मुन्किरून

हिंदी अनुवाद

और यूसुफ़ के भाई आये[1] तथा उसके पास उपस्थित हुए और उसने उन्हें पहचान लिया तथा वे उससे अपरिचित रह गये। 1. अर्थात अकाल के युग में अन्न लेने के लिये फिलस्तीन से मिस्र आये थे।

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وَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمْ قَالَ ائْتُونِي بِأَخٍ لَّكُم مِّنْ أَبِيكُمْ ۚ أَلَا تَرَوْنَ أَنِّي أُوفِي الْكَيْلَ وَأَنَا خَيْرُ الْمُنزِلِينَ ﴾ 59 ﴿

Transliteration

व लम्मा जह्ह-ज़हुम् बि-जहाज़िहिम् क़ालअ्तूनी बि- अख़िल्-लकुम् मिन अबीकुम्, अला तरौ-न अन्नी ऊफ़िल्-कै-ल व अ-ना ख़ैरूल्-मुन्ज़िलीन

हिंदी अनुवाद

और जब उनका सामान तैयार कर दिया, तो कहाः अपने सौतीले भाई[1] को लाना। क्या तुम नहीं देखते कि मैं पूरा माप देता हूँ तथा उत्तम अतिथि-सत्कार करने वाला हूँ? 1. जो यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का सगा भाई बिनयामीन था।

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فَإِن لَّمْ تَأْتُونِي بِهِ فَلَا كَيْلَ لَكُمْ عِندِي وَلَا تَقْرَبُونِ ﴾ 60 ﴿

Transliteration

फ़-इल्लम् तअ्तूनी बिही फ़ला कै-ल लकुम् अिन्दी वला तक़् रबून

हिंदी अनुवाद

फिर यदि, तुम उसे मेरे पास नहीं लाये, तो मेरे यहाँ तुम्हारे लिए कोई माप नहीं और न तुम मेरे समीप होगे।

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قَالُوا سَنُرَاوِدُ عَنْهُ أَبَاهُ وَإِنَّا لَفَاعِلُونَ ﴾ 61 ﴿

Transliteration

क़ालू सनुराविदु अन्हु अबाहु व इन्ना लफ़ाअिलून

हिंदी अनुवाद

वे बोलेः हम उसके पिता को इसकी प्रेरणा देंगे और हम अवश्य ऐसा करने वाले हैं।

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وَقَالَ لِفِتْيَانِهِ اجْعَلُوا بِضَاعَتَهُمْ فِي رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَا إِذَا انقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ﴾ 62 ﴿

Transliteration

व क़ा-ल लिफ़ित्यानिहिज्-अ़लू बिज़ा-अ़ तहुम् फी रिहालिहिम् लअ़ल्लहुम् यअ्-रिफूनहा इज़न्क़-लबू इला अह़्लिहिम् लअ़ल्लहुम् यर्जिअून

हिंदी अनुवाद

और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दियाः उनका मूलधन[1] उनकी बोरियों में रख दो, संभवतः वे उसे पहचान लें, जब अपने परिजनों में जायें और संभवतः वापस आयें। 1. अर्थात जिस धन से अन्न ख़रीदा है।

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فَلَمَّا رَجَعُوا إِلَىٰ أَبِيهِمْ قَالُوا يَا أَبَانَا مُنِعَ مِنَّا الْكَيْلُ فَأَرْسِلْ مَعَنَا أَخَانَا نَكْتَلْ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ ﴾ 63 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा र-जअू इला अबीहिम् क़ालू या अबाना मुनि -अ़ मिन्नल्कैलु फ़-अर्सिल् म अ़ना अख़ाना नक्तल् व इन्ना लहू लहाफ़िज़ून

हिंदी अनुवाद

फिर जब अपने पिता के पास लौटकर गये, तो कहाः हमारे पिता! हम से भविष्य में (अन्न) रोक दिया गया है। अतः हमारे साथ हमारे भाई को भेजें कि हम सब अन्न (ग़ल्ला) लायें और (विशवास कीजीए कि) हम उसके रक्षक हैं।

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قَالَ هَلْ آمَنُكُمْ عَلَيْهِ إِلَّا كَمَا أَمِنتُكُمْ عَلَىٰ أَخِيهِ مِن قَبْلُ ۖ فَاللَّهُ خَيْرٌ حَافِظًا ۖ وَهُوَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ ﴾ 64 ﴿

Transliteration

क़ा-ल हल् आमनुकुम् अ़लैहि इल्ला कमा अमिन्तुकुम् अ़ला अ़ख़ीहि मिन क़ब्लु, फ़ल्लाहु ख़ैरून् हाफ़िज़ंव्-व हु-व अर्हमुर्-राहिमीन

हिंदी अनुवाद

उस (पिता) ने कहाः क्या मैं उसके लिए तुमपर वैसे ही विश्वास कर लूँ, जैसे इसके पहले उसके भाई (यूसुफ़) के बारे में विश्वास कर चुका हूँ? तो अल्लाह ही उत्तम रक्षक और वही सर्वाधिक दयावान् है।

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وَلَمَّا فَتَحُوا مَتَاعَهُمْ وَجَدُوا بِضَاعَتَهُمْ رُدَّتْ إِلَيْهِمْ ۖ قَالُوا يَا أَبَانَا مَا نَبْغِي ۖ هَٰذِهِ بِضَاعَتُنَا رُدَّتْ إِلَيْنَا ۖ وَنَمِيرُ أَهْلَنَا وَنَحْفَظُ أَخَانَا وَنَزْدَادُ كَيْلَ بَعِيرٍ ۖ ذَٰلِكَ كَيْلٌ يَسِيرٌ ﴾ 65 ﴿

Transliteration

व लम्मा फ़-तहू मता अहुम् व जदू बिज़ाअ तहुम् रूद्दत इलैहिम्, क़ालू या अबाना मा नब़्ग़ी, हाज़िही बिज़ा-अतुना रूद्दत इलैना, व नमीरू अह़्लना व नह़्फ़ज़ु अख़ाना व नज़्दादु कै-ल बईरिन्, ज़ालि-क कैलुंय्यसीर

हिंदी अनुवाद

और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो पाया कि उनका मूलधन उन्हें फेर दिया गया है, उन्होंने कहाः हे हमारे पिता! हमें और क्या चाहिए? ये हमारा धन, हमें फेर दिया गया है? हम अपने घराने के लिए ग़ल्ले (अन्न) लायेंगे और एक ऊँट का बोझ अधिक लायेंगे[1], ये माप (अन्न) बहुत थोड़ा है। 1. अर्थात अपने भाई बिनयामीन का जो उन की दूसरी माँ से था।

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قَالَ لَنْ أُرْسِلَهُ مَعَكُمْ حَتَّىٰ تُؤْتُونِ مَوْثِقًا مِّنَ اللَّهِ لَتَأْتُنَّنِي بِهِ إِلَّا أَن يُحَاطَ بِكُمْ ۖ فَلَمَّا آتَوْهُ مَوْثِقَهُمْ قَالَ اللَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٌ ﴾ 66 ﴿

Transliteration

क़ा-ल लन् उर्सि-लहू म-अ़कुम् हत्ता तुअ्तूनि मौसिक़म्-मिनल्लाहि ल-तअ्तुन्ननी बिही इल्ला अंय्युहा-त बिकुम्, फ़ लम्मा आतौहु मौसि-कहुम् क़ालल्लाहु अ़ला मा नक़ूलु वकील

हिंदी अनुवाद

उस (पिता) ने कहाः मैं कदापि उसे तुम्हारे साथ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि अल्लाह के नाम पर मुझे दृढ़ वचन दो कि उसे मेरे पास अवश्य लाओगे, परन्तु ये कि तुमको घेर लिया[1] जाये और जब उन्होंने अपना दृढ़ वचन दिया, तो कहा, अल्लाह ही तुम्हारी बात (वचन) का निरीक्षक है। 1. अर्थात विवश कर दिये जाओ।

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وَقَالَ يَا بَنِيَّ لَا تَدْخُلُوا مِن بَابٍ وَاحِدٍ وَادْخُلُوا مِنْ أَبْوَابٍ مُّتَفَرِّقَةٍ ۖ وَمَا أُغْنِي عَنكُم مِّنَ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۖ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ ۖ وَعَلَيْهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُونَ ﴾ 67 ﴿

Transliteration

व क़ा-ल या बनिय्-य ला तद्ख़ुलू मिम्-बाबिंव्-वाहिदिंव् वद्ख़ुलू मिन् अब्वाबिम् मु-तफ़र्रि-क़तिन्, व मा उ़ग्-नी अ़न्कुम् मिनल्लाहि मिन् शैइन्, इनिल्हुक्मु इल्ला लिल्लाहि, अलैहि तवक्कल्तु, व अ़लैहि फ़ल्य-तवक्कलिल्-मु तवक्किलून

हिंदी अनुवाद

और ( जब वे जाने लगे) तो उस (पिता) ने कहाः हे मेरे पुत्रो! तुम एक द्वार से मिस्र में प्रवेश न करना, बल्कि विभिन्न द्वारों से प्रवेश करना और मैं तुम्हें किसी चीज़ से नहीं बचा सकता, जो अल्लाह की ओर से हो और आदेश तो अल्लाह का चलता है, मैंने उसीपर भरोसा किया तथा उसीपर भरोसा करने वालों को भरोसा करना चाहिए।

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وَلَمَّا دَخَلُوا مِنْ حَيْثُ أَمَرَهُمْ أَبُوهُم مَّا كَانَ يُغْنِي عَنْهُم مِّنَ اللَّهِ مِن شَيْءٍ إِلَّا حَاجَةً فِي نَفْسِ يَعْقُوبَ قَضَاهَا ۚ وَإِنَّهُ لَذُو عِلْمٍ لِّمَا عَلَّمْنَاهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ﴾ 68 ﴿

Transliteration

व लम्मा-द-ख़लू मिन् हैसु अ-म-रहुम् अबूहुम्, मा का न युग़्-नि अ़न्हुम् मिनल्लाहि मिन् शैइन् इल्ला हा-जतन् फी नफ्सि यअ्क़ू-ब क़ज़ाहा, व इन्नहू लज़ू अिल्मिल्-लिमा अल्लम्-ना हु व लाकिन्-न अक्सरन्नासि ला यअ्लमून *

हिंदी अनुवाद

और जब उन्होंने (मिस्र में) प्रवेश किया, जैसे उनके पिता ने आदेश दिया था, तो ऐसा नहीं हुआ कि वह उन्हें अल्लाह से कुछ बचा सके; परन्तु ये याक़ूब के दिल में एक विचार उत्पन्न हुआ, जिसे उसने पूरा कर लिया[1] और वास्तव में, वह उसका ज्ञानी था, जो ज्ञान हमने उसे दिया था। परन्तु अधिकांश लोग इस (की वास्तविक्ता) का ज्ञान नहीं रखते। 1. अर्थात एक अपना उपाय था।

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وَلَمَّا دَخَلُوا عَلَىٰ يُوسُفَ آوَىٰ إِلَيْهِ أَخَاهُ ۖ قَالَ إِنِّي أَنَا أَخُوكَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ﴾ 69 ﴿

Transliteration

व लम्मा द-ख़लू अला यूसु-फ़ आवा इलैहि अख़ाहु क़ा-ल इन्नी अ-ना अख़ू-क फ़ला तब्तइस् बिमा कानू यअ्मलून

हिंदी अनुवाद

और जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो उसने अपने भाई को अपनी शरण में ले लिया (और उससे) कहाः मैं तेरा भाई (यूसुफ़) हूँ। अतः उससे उदासीन न हो, जो (दुरव्यवहार) वे करते आ रहे हैं।

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فَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمْ جَعَلَ السِّقَايَةَ فِي رَحْلِ أَخِيهِ ثُمَّ أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ أَيَّتُهَا الْعِيرُ إِنَّكُمْ لَسَارِقُونَ ﴾ 70 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा जह्ह ज़हुम् बि जहाज़िहिम् ज अ़लस्सिक़ाय-त फी रह्-लि अख़ीहि सुम्-म अज़्ज़-न मुअज़्ज़िनुन् अय्यतुहल् ईरू इन्नकुम् लसारिक़ून

हिंदी अनुवाद

फिर जब उस (यूसुफ़) ने उनका सामान तैयार करा दिया, तो प्याला अपने भाई के सामान में रख दिया। फिर एक पुकारने वाले ने पुकाराः हे क़ाफ़िले वालो! तुम लोग तो चोर हो!

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قَالُوا وَأَقْبَلُوا عَلَيْهِم مَّاذَا تَفْقِدُونَ ﴾ 71 ﴿

Transliteration

क़ालू व अक़बलू अ़लैहिम् माज़ा तफ्क़िदून

हिंदी अनुवाद

उन्होंने फिरकर कहाः तुम क्या खो रहे हो?

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قَالُوا نَفْقِدُ صُوَاعَ الْمَلِكِ وَلِمَن جَاءَ بِهِ حِمْلُ بَعِيرٍ وَأَنَا بِهِ زَعِيمٌ ﴾ 72 ﴿

Transliteration

क़ालू नफ्क़िदु सुवाअ़ल्- मलिकि व लिमन् जा-अ बिही हिम्लु बईरिंव्-व अ-ना बिही ज़ईम

हिंदी अनुवाद

उन (कर्मचारियों) ने कहाः हमें राजा का प्याला नहीं मिल रहा है और जो उसे ले आये, उसके लिए एक ऊँट का बोझ है और मैं उसका प्रतिभु[1] हूँ। 1. अर्थात एक ऊँट के बोझ बराबर पुरस्कार देने का भार मुझ पर है।

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قَالُوا تَاللَّهِ لَقَدْ عَلِمْتُم مَّا جِئْنَا لِنُفْسِدَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كُنَّا سَارِقِينَ ‎ ﴾ 73 ﴿

Transliteration

क़ालू तल्लाहि ल-क़द् अ़लिम्तुम् मा जिअ्ना लिनुफ्सि-द फ़िल्अर्ज़ि व मा कुन्ना सारिक़ीन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः तुम जानते हो कि हम इस देश में उपद्रव करने नहीं आये हैं और न हम चोर ही हैं।

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قَالُوا فَمَا جَزَاؤُهُ إِن كُنتُمْ كَاذِبِينَ ﴾ 74 ﴿

Transliteration

क़ालू फ़मा जज़ाउहू इन् कुन्तुम् काज़िबीन

हिंदी अनुवाद

उन लोगों ने कहाः तो यदि तुम झूठे निकले, तो उसका दण्ड क्या होगा[1]? 1. अर्थात चोर का।

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قَالُوا جَزَاؤُهُ مَن وُجِدَ فِي رَحْلِهِ فَهُوَ جَزَاؤُهُ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ ‎ ﴾ 75 ﴿

Transliteration

क़ालू जज़ाउहू मंव्वुजि-द फी रह़्लिही फ़हु-व जज़ाउहू, कज़ालि-क नज्ज़िज़्ज़ालिमीन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः उसका दण्ड! जिसके सामान में (प्याला) पाया जाये, वही उसका दण्ड होगा। इसी प्रकार, हम अत्याचारियों को दण्ड देते हैं[1]1. अर्थात याक़ुब अलैहिस्सलाम के धर्म विधान में चोर को दास बना लेने का नियम था। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

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فَبَدَأَ بِأَوْعِيَتِهِمْ قَبْلَ وِعَاءِ أَخِيهِ ثُمَّ اسْتَخْرَجَهَا مِن وِعَاءِ أَخِيهِ ۚ كَذَٰلِكَ كِدْنَا لِيُوسُفَ ۖ مَا كَانَ لِيَأْخُذَ أَخَاهُ فِي دِينِ الْمَلِكِ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ وَفَوْقَ كُلِّ ذِي عِلْمٍ عَلِيمٌ ﴾ 76 ﴿

Transliteration

फ़-ब-द-अ बिऔअि-यतिहिम् क़ब्-ल विआ़-इ अख़ीहि सुम्मस्तख़्-जहा मिंव्विआ़ इ अख़ीहि, कज़ालि-क किद्-ना लियूसु-फ, मा का-न लियअ्ख़ु-ज़ अख़ाहु फ़ी दीनिल्-मलिकि इल्ला अंय्यशाअल्लाहु, नरफ़अु द-रजातिम् मन्-नशा-उ, व फौ-क़ कुल्लि ज़ी अिल्मिन् अ़लीम

हिंदी अनुवाद

फिर उसने खोज का आरंभ उस (यूसुफ़) के भाई की बोरी से पहले, उनकी बोरियों से किया। फिर उसे उस (बिनयामीन) की बोरी से निकाल लिया। इस प्रकार, हमने यूसुफ़ के लिए उपाय किया। वह राजा के नियमानुसार अपने भाई को नहीं रख सकता था, परन्तु ये कि अल्लाह चाहता। हम जिसका चाहें मान सम्मान ऊँचा कर देते हैं और प्रत्येक ज्ञानी से ऊपर एक बड़ा ज्ञानी[1] है। 1. अर्थात अल्लाह से बड़ा कोई ज्ञानी नहीं हो सकता। इस लिये किसी को अपने ज्ञान पर गर्व नहीं होना चाहिये।

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قَالُوا إِن يَسْرِقْ فَقَدْ سَرَقَ أَخٌ لَّهُ مِن قَبْلُ ۚ فَأَسَرَّهَا يُوسُفُ فِي نَفْسِهِ وَلَمْ يُبْدِهَا لَهُمْ ۚ قَالَ أَنتُمْ شَرٌّ مَّكَانًا ۖ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا تَصِفُونَ ﴾ 77 ﴿

Transliteration

क़ालू इंय्यस् रिक़् फ़-क़द् स-र-क़ अख़ुल्लहू मिन् क़ब्लु, फ़-असर्रहा यूसुफु फ़ी नफ्सिही व लम् युब्दिहा लहुम्, क़ा-ल अन्तुम् शर्रूम्-मकानन्, वल्लाहु अअ्लमु बिमा तसिफून

हिंदी अनुवाद

उन भाईयों ने कहाः यदि उसने चोरी की है, तो उसका एक भाई भी इससे पहले चोरी कर चुका है। तो यूसुफ़ ने ये बात अपने दिल में छुपा ली और उसे उनके लिए प्रकट नहीं किया। (यूसुफ़ ने) कहाः सबसे बुरा स्थान तुम्हारा है और अल्लाह उसे अधिक जानता है, जो तुम कह रहे हो।

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قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ إِنَّ لَهُ أَبًا شَيْخًا كَبِيرًا فَخُذْ أَحَدَنَا مَكَانَهُ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ ﴾ 78 ﴿

Transliteration

क़ालू या अय्युहल्-अज़ीज़ु इन्-न लहू अबन् शैख़न् कबीरन् फ़ख़ुज् अ-ह-दना मकानहू, इन्ना नरा-क मिनल् मुह्सिनीन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः हे अज़ीज़[1]! उसका पिता बहुत बूढ़ा है। अतः हम में से किसी एक को उसके स्थान पर ले लो। वास्तव में, हम आपको परोपकारी देख रहे हैं। 1. यहाँ "अज़ीज़" का प्रयोग यूसुफ (अलैहिस्सलाम) के लिये किया गया है। क्यों कि उन्हीं के पास सरकार के अधिक्तर अधिकार थे।

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قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ أَن نَّأْخُذَ إِلَّا مَن وَجَدْنَا مَتَاعَنَا عِندَهُ إِنَّا إِذًا لَّظَالِمُونَ ﴾ 79 ﴿

Transliteration

क़ा-ल मआ़ज़ल्लाहि अन् नअ्ख़ु-ज़ इल्ला मंव्व-जद्-ना मता-अना अिन्दहू, इन्ना इज़ल्-लज़ालिमून *

हिंदी अनुवाद

उस (यूसुफ) ने कहाः अल्लाह की शरण कि हम (किसी अन्य को) पकड़ लें, उसके सिवा जिसके पास अपना सामान पाया है। (यदि ऐसा न करें) तो हम वास्तव में अत्याचारी होंगे।

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فَلَمَّا اسْتَيْأَسُوا مِنْهُ خَلَصُوا نَجِيًّا ۖ قَالَ كَبِيرُهُمْ أَلَمْ تَعْلَمُوا أَنَّ أَبَاكُمْ قَدْ أَخَذَ عَلَيْكُم مَّوْثِقًا مِّنَ اللَّهِ وَمِن قَبْلُ مَا فَرَّطتُمْ فِي يُوسُفَ ۖ فَلَنْ أَبْرَحَ الْأَرْضَ حَتَّىٰ يَأْذَنَ لِي أَبِي أَوْ يَحْكُمَ اللَّهُ لِي ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ ﴾ 80 ﴿

Transliteration

फ़लम्मस्तै-असू मिन्हु ख़-लसू नजिय्यन्, क़ा-ल कबीरूहुम् अलम् तअ्लमू अन्-न अबाकुम् क़द् अ-ख़-ज़ अ़लैकुम् मौसिक़म् मिनल्लाहि व मिन् क़ब्लु मा फर्रत्तुम् फी यू सु-फ़, फ़-लन् अब़्-र-हल्-अर्-ज़ हत्ता यअ्ज़-न ली अबी औ यह्कुमल्लाहु ली, व हु-व ख़ैरूल्-हाकिमीन

हिंदी अनुवाद

फिर जब उससे निराश हो गये, तो एकान्त में होकर प्रामर्श करने लगे। उनके बड़े ने कहाः क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे पिता ने तुमसे अल्लाह को साक्षी बनाकर दृढ़ वचन लिया था? और इससे पहले जो अपराध तुमने यूसुफ के बारे में किया है? तो मैं इस धरती (मिस्र) से नहीं जाऊँगा, जब तक मुझे मेरे पिता अनुमति न दे दें अथवा अल्लाह मेरे लिए निर्णय न कर दे और वही सबसे अच्छा निर्णय करने वाला है।

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ارْجِعُوا إِلَىٰ أَبِيكُمْ فَقُولُوا يَا أَبَانَا إِنَّ ابْنَكَ سَرَقَ وَمَا شَهِدْنَا إِلَّا بِمَا عَلِمْنَا وَمَا كُنَّا لِلْغَيْبِ حَافِظِينَ ﴾ 81 ﴿

Transliteration

इर्जिअू इला अबीकुम् फ़क़ूलू या अबाना इन्नब्-न-क स-र-क़, वमा शहिद्-ना इल्ला बिमा अ़लिम्-ना वमा कुन्ना लिल्ग़ैबि हाफ़िज़ीन

हिंदी अनुवाद

तुम अपने पिता की ओर लौट जाओ और कहो कि हमारे पिता! आपके पुत्र ने चोरी की है और हमने वही साक्ष्य दिया, जिसे हमने[1] जाना और हम ग़ैब के रखवाले नहीं[2] थे। 1. अर्थात राजा का प्याला उस के सामान से निकलते देखा। 2. अर्थात आप को उस के वापिस लाने का वचन देते समय यह नहीं जानते थे कि वह चोरी करेगा। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

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وَاسْأَلِ الْقَرْيَةَ الَّتِي كُنَّا فِيهَا وَالْعِيرَ الَّتِي أَقْبَلْنَا فِيهَا ۖ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ ﴾ 82 ﴿

Transliteration

वस्अलिल्-क़र्य-तल्लती कुन्ना फ़ीहा वल्ईरल्लती अक़्बल्ना फ़ीहा, व इन्ना लसादिक़ून

हिंदी अनुवाद

आप उस बस्ती वालों से पूछ लें, जिसमें हम थे और उस क़ाफ़िले से जिसमें हम आये हैं और वास्तव में हम सच्चे हैं।

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‏ قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَأْتِيَنِي بِهِمْ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ ﴾ 83 ﴿

Transliteration

क़ा-ल बल् सव्वलत् लकुम् अन्फुसुकुम् अम्रन्, फ़- सब्-रू-न् जमीलुन्, अंसल्लाहु अंय्यअ्ति-यनी बिहिम् जमीअ़न्, इन्नहू हुवल् अ़लीमुल्-हकीम

हिंदी अनुवाद

उस (पिता) ने कहाः ऐसा नहीं है, बल्कि तुम्हारे दिलों ने एक बात बना ली है। इसलिए अब सहन करना ही उत्तम है, संभव है कि अल्लाह उनसब को मेरे पास वापस ले आए, वास्तव में, वही जानने वाला, तत्वदर्शी है।

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وَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَا أَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ ﴾ 84 ﴿

Transliteration

व तवल्ला अ़न्हुम् व क़ा-ल या अ-सफा अ़ला यूसु-फ़ वब्यज़्ज़त् ऐनाहु मिनल्-हुज़्-नि फहु-व कज़ीम

हिंदी अनुवाद

और उनसे मुँह फेर लिया और कहाः हाय यूसुफ़! और उसकी दोनों आँखें शोक के कारण (रोते-रोते) सफेद हो गयीं और उसका दिल शोक से भर गया।

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قَالُوا تَاللَّهِ تَفْتَأُ تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِكِينَ ‎ ﴾ 85 ﴿

Transliteration

क़ालू तल्लाहि तफ़्तउ तज़्कुरू यूसु-फ़ हत्ता तकू-न ह-रज़न् औ तकू-न मिनल्-हालिकीन

हिंदी अनुवाद

उन (पुत्रों) ने कहाः अल्लाह की शपथ! आप बराबर यूसुफ़ को याद करते रहेंगे, यहाँ तक कि (शोक से) घुल जायें या अपना विनाश कर लें।

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قَالَ إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ ﴾ 86 ﴿

Transliteration

क़ा-ल इन्नमा अश्कू बस्सी व हुज़्नी इलल्लाहि व अअ्लमु मिनल्लाहि मा ला तअ्लमून

हिंदी अनुवाद

उसने कहाः मैं अपनी आपदा तथा शोक की शिकायत अल्लाह के सिवा किसी से नहीं करता और अल्लाह की ओर से वह बात जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।

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يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ ﴾ 87 ﴿

Transliteration

या बनिय्यज़्हबू फ़-तहस्ससू मिंय्यूसु-फ़ व अख़ीहि वला तै-असु मिरौंहिल्लाहि, इन्नहू ला यै-असू मिरौंहिल्लाहि इल्लल् क़ौमुल्-काफिरून

हिंदी अनुवाद

हे मेरे पुत्र! जाओ और यूसुफ़ और उसके भाई का पता लगाओ और अल्लाह की दया से निराश न हो। वास्तव में, अल्लाह की दया से वही निराश होते हैं, जो काफ़िर हैं।

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فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَيْهِ قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهْلَنَا الضُّرُّ وَجِئْنَا بِبِضَاعَةٍ مُّزْجَاةٍ فَأَوْفِ لَنَا الْكَيْلَ وَتَصَدَّقْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّ اللَّهَ يَجْزِي الْمُتَصَدِّقِينَ ﴾ 88 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा द-ख़लू अ़लैहि क़ालू या अय्युहल् अ़ज़ीजु मस्सना व अह़्ल-नज़्जुर्रु व जिअ्ना बिबिज़ा-अतिम्- मुज़्जातिन् फ़औफ़ि लनल्कै-ल व तसद्दक़् अ़लैना, इन्नल्ला-ह यज्ज़िल मु-तसद्दिक़ीन

हिंदी अनुवाद

फिर जब (यूसुफ़ के भाई) उसके पास (मिस्र) गये, तो कहाः हे अज़ीज़! हमपर और गमारे घराने पर आपदा (अकाल) आ पड़ी है और हम थोड़ा धन (मूल्य) लाये हैं, अतः हमें (अन्न का) पूरा माप दें और हम पर दान करें। वास्तव में, अल्लाह दानशीलों को प्रतिफल प्रदान करता है।

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قَالَ هَلْ عَلِمْتُم مَّا فَعَلْتُم بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ إِذْ أَنتُمْ جَاهِلُونَ ﴾ 89 ﴿

Transliteration

क़ा-ल हल् अलिम्तुम् मा फ़अ़ल्तुम् बियूसु-फ़ व अख़ीहि इज़् अन्तुम् जाहिलून

हिंदी अनुवाद

उस (यूसुफ़) ने कहाः क्या तुम जानते हो कि तुमने यूसुफ़ तथा उसके भाई के साथ क्या कुछ किया है, जब तुम अज्ञान थे?

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قَالُوا أَإِنَّكَ لَأَنتَ يُوسُفُ ۖ قَالَ أَنَا يُوسُفُ وَهَٰذَا أَخِي ۖ قَدْ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا ۖ إِنَّهُ مَن يَتَّقِ وَيَصْبِرْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ ﴾ 90 ﴿

Transliteration

क़ालू अ-इन्न-क ल-अन्-त यूसुफु, क़ा-ल अ-ना यूसुफु व हाज़ा अख़ी, क़द् मन्नल्लाहु अ़लैना, इन्नहू मंय्यत्तक़ि व यस्बिर् फ़- इन्नल्ला-ह ला युज़ीअु अज्रल-मुह्सिनीन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः क्या आप यूसुफ़ हैं? यूसुफ़ ने कहाः मैं यूसुफ़ हूँ और ये मेरा भाई है। अल्लाह ने हमपर उपकार किया है। वास्तव में, जो (अल्लाह से) डरता तथा सहन करता है, तो अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल व्यर्थ नहीं करता।

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قَالُوا تَاللَّهِ لَقَدْ آثَرَكَ اللَّهُ عَلَيْنَا وَإِن كُنَّا لَخَاطِئِينَ ﴾ 91 ﴿

Transliteration

क़ालू तल्लाहि ल-क़द् आस-रकल्लाहु अ़लैना व इन् कुन्ना लख़ातिईन

हिंदी अनुवाद

उन्होंने कहाः अल्लाह की शपथ! उसने आपको हमपर श्रेष्ठता प्रदान की है। वास्तव में, हम दोषी थे।

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قَالَ لَا تَثْرِيبَ عَلَيْكُمُ الْيَوْمَ ۖ يَغْفِرُ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَهُوَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ ﴾ 92 ﴿

Transliteration

क़ा-ल ला तस्-री-ब अ़लैकुमुल्-यौ-म, यग़्फिरूल्लाहु लकुम्, व हु-व अर्हमुर् राहिमीन

हिंदी अनुवाद

यूसुफ़ ने कहाः आज तुमपर कोई दोष नहीं, अल्लाह तुम्हें क्षमा कर दे! वही सर्वाधिक दयावान् है।

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اذْهَبُوا بِقَمِيصِي هَٰذَا فَأَلْقُوهُ عَلَىٰ وَجْهِ أَبِي يَأْتِ بَصِيرًا وَأْتُونِي بِأَهْلِكُمْ أَجْمَعِينَ ﴾ 93 ﴿

Transliteration

इज़्हबू बि-क़मीसी हाज़ा फ़अल्क़ूहु अ़ला वज्हि-अबी यअ्ति बसीरन्, वअ्तूनी बिअह़्लिकुम् अज्मईन *

हिंदी अनुवाद

मेरा ये कुर्ता ले जाओ और मेरे पिता के मुँह पर डाल दो, वह देखने लगेंगे। और अपने पूरे घराने को (मिस्र) ले आओ।

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وَلَمَّا فَصَلَتِ الْعِيرُ قَالَ أَبُوهُمْ إِنِّي لَأَجِدُ رِيحَ يُوسُفَ ۖ لَوْلَا أَن تُفَنِّدُونِ ﴾ 94 ﴿

Transliteration

व लम्मा फ़-स-लतिल्-ईरू क़ा-ल अबूहुम् इन्नी ल-अजिदु री-ह यूसु-फ़ लौ ला अन् तुफ़न्निदून

हिंदी अनुवाद

और जब क़ाफ़िले ने परस्थान किया, तो उनके पिता ने कहाः मुझे यूसुफ़ की सुगन्ध आ रही है, यदि तुम मुझे बहका हुआ बूढ़ा न समझो।

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قَالُوا تَاللَّهِ إِنَّكَ لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ ﴾ 95 ﴿

Transliteration

क़ालू तल्लाहि इन्न-क लफ़ी ज़लालिकल् क़दीम

हिंदी अनुवाद

उन लोगों[1]ने कहाः अल्लाह की शपथ! आप तो अपनी पुरानी सनक में पड़े हुए हैं। 1. याक़ूब अलैहिस्सलाम के परिजनों ने जो फ़िलस्तीन में उन के पास थे।

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فَلَمَّا أَن جَاءَ الْبَشِيرُ أَلْقَاهُ عَلَىٰ وَجْهِهِ فَارْتَدَّ بَصِيرًا ۖ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ إِنِّي أَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ ﴾ 96 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा अन् जाअल्-बशीरू अल्क़ाहु अ़ला वज्हिही फ़र्तद्-द बसीरन्, क़ा-ल अलम् अक़ुल् लकुम्, इन्नी अअ्लमु मिनल्लाहि मा ला तअ्लमून

हिंदी अनुवाद

फिर जब शुभ-सूचक आ गया, तो उसने वह कुर्ता उनके मुख पर डाल दिया और वे तुरन्त देखने लगे। याक़ूब ने कहाः क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि वास्तव में अल्लाह की ओर से जो कुछ मैं जानता हूँ, तुम नहीं जानते?

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قَالُوا يَا أَبَانَا اسْتَغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا إِنَّا كُنَّا خَاطِئِينَ ﴾ 97 ﴿

Transliteration

क़ालू या अबानस्तग़्फिर् लना ज़ुनूबना इन्ना कुन्ना ख़ातिईन

हिंदी अनुवाद

सब (भाईयों) ने कहाः हे हमारे पिता! हमारे लिए हमारे पापों की क्षमा माँगिए, वास्तव में, हम ही दोषी थे।

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قَالَ سَوْفَ أَسْتَغْفِرُ لَكُمْ رَبِّي ۖ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ﴾ 98 ﴿

Transliteration

क़ा-ल सौ-फ़ अस्तग़्फिरू लकुम् रब्बी, इन्नहू हुवल् ग़फूरुर्रहीम

हिंदी अनुवाद

याक़ूब ने कहाः मैं तुम्हारे लिए अपने पालनहार से क्षमा की प्रार्थना करूँगा, वास्तव में, वह अति क्षमी, दयावान् है।

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فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَىٰ يُوسُفَ آوَىٰ إِلَيْهِ أَبَوَيْهِ وَقَالَ ادْخُلُوا مِصْرَ إِن شَاءَ اللَّهُ آمِنِينَ ﴾ 99 ﴿

Transliteration

फ़-लम्मा द-ख़लू अ़ला यूसु-फ़ आवा इलैहि अ-बवैहि व क़ालद्ख़ुलू मिस्-र इन्शा-अल्लाहु आमिनीन

हिंदी अनुवाद

फिर जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो उसने अपनी माता-पिता को अपनी शरण में ले लिया और कहाः नगर (मिस्र) में प्रवेश कर जाओ, यदि अल्लाह ने चाहा, तो शान्ति से रहोगे।

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وَرَفَعَ أَبَوَيْهِ عَلَى الْعَرْشِ وَخَرُّوا لَهُ سُجَّدًا ۖ وَقَالَ يَا أَبَتِ هَٰذَا تَأْوِيلُ رُؤْيَايَ مِن قَبْلُ قَدْ جَعَلَهَا رَبِّي حَقًّا ۖ وَقَدْ أَحْسَنَ بِي إِذْ أَخْرَجَنِي مِنَ السِّجْنِ وَجَاءَ بِكُم مِّنَ الْبَدْوِ مِن بَعْدِ أَن نَّزَغَ الشَّيْطَانُ بَيْنِي وَبَيْنَ إِخْوَتِي ۚ إِنَّ رَبِّي لَطِيفٌ لِّمَا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ ﴾ 100 ﴿

Transliteration

व र-फ़-अ अ-बवैहि अ़लल्-अर्शि व ख़र्रू लहू सुज्जदन्, व क़ा-ल या अ-बति हाज़ा तअ्वीलु रूअ्या-य मिन् क़ब्लु, क़द् ज-अ़-लहा रब्बी हक़्क़न्, व क़द् अह्स-न बी इज़् अख़्र-जनी मिनस्सिज्-नि व जा-अ बिकुम् मिनल्बद्-वि मिम्-बअ्दि अन् न-ज़ग़श्शैतानु बैनी व बै-न इख़्वती, इन्-न रब्बी लतीफुल्लिमा यशा-उ, इन्नहू हुवल् अ़लीमुल्-हकीम

हिंदी अनुवाद

तथा अपने माता-पिता को उठाकर सिंहासन पर बिठा लिया और सब उसके समक्ष सज्दे में गिर गये और यूसुफ़ ने कहाः हे मेरे पिता! यही मेरे स्वप्न का अर्थ है, जो मैंने पहले देखा था। मेरे पालनहार ने उसे सच कर दिया है तथा मेरे साथ उपकार किया, जब उसने मुझे कारावास से निकाला और आप लोगों को गाँव से मेरे पास (नगर में) ले आया, इसके पश्चात् कि शैतान ने मेरे तथा मेरे भाईयों के बीच विरोध डाल दिया। वास्तव में, मेरा पालनहार जिसके लिए चाहे, उसके लिए उत्तम उपाय करने वाहा है। निश्चय वही अति ज्ञानी, तत्वज्ञ है।

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رَبِّ قَدْ آتَيْتَنِي مِنَ الْمُلْكِ وَعَلَّمْتَنِي مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ ۚ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَنتَ وَلِيِّي فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ تَوَفَّنِي مُسْلِمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ ‎ ﴾ 101 ﴿

Transliteration

रब्बि क़द् आतैतनी मिनल्मुल्कि व अ़ल्लम्तनी मिन् तअ्वीलिल्-अहादीसि, फ़ातिरस्समावाति वल्अर्ज़ि, अन्-त वलिय्यी फ़िद्दुन्या वल्आख़िरति, तवफ़्फ़नी मुस्लिमंव्-व अल्हिक़्नी बिस्सालिहीन

हिंदी अनुवाद

हे मेरे पालनहार! तूने मुझे राज प्रदान किया तथा मुझे स्वप्नों का अर्थ सिखाया। हे आकाशों तथा धरती के उत्पत्तिकार! तू लोक तथा परलोक में मेरा रक्षक है। तू मेरा अन्त इस्लाम पर कर और मुझे सदाचारियों में मिला दे।

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ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۖ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ أَجْمَعُوا أَمْرَهُمْ وَهُمْ يَمْكُرُونَ ﴾ 102 ﴿

Transliteration

ज़ालि-क मिन् अम्बाइल्ग़ैबि नूहीहि इलै-क, वमा कुन्-त लदैहिम् इज़् अज्मअू अम्रहुम् व हुम् यम्कुरून

हिंदी अनुवाद

(हे नबी!) ये (कथा) परोक्ष के समाचारों में से है, जिसकी वह़्यी हम आपकी ओर कर रहे हैं। और आप उन (भाईयों) के पास नहीं थे, जब वे आपस की सहमति से षड्यंत्र रचते रहे।

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وَمَا أَكْثَرُ النَّاسِ وَلَوْ حَرَصْتَ بِمُؤْمِنِينَ ﴾ 103 ﴿

Transliteration

व मा अक्सरून्नासि व लौ हरस्-त बिमुअ्मिनीन

हिंदी अनुवाद

और अधिकांश लोग आप कितनी ही लालसा करें, ईमान लाने वाले नहीं हैं।

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وَمَا تَسْأَلُهُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ ﴾ 104 ﴿

Transliteration

व मा तस्अलुहुम् अ़लैहि मिन् अज्रिन्, इन् हु-व इल्ला ज़िक् रूल्-लिल आ़लमीन *

हिंदी अनुवाद

और आप इस (धर्मप्रचार) पर उनसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगते। ये (क़ुर्आन) तो विश्ववासियों के लिए (केवल) एक शिक्षा है।

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وَكَأَيِّن مِّنْ آيَةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ يَمُرُّونَ عَلَيْهَا وَهُمْ عَنْهَا مُعْرِضُونَ ﴾ 105 ﴿

Transliteration

व क-अय्यिम्-मिन् आयतिन् फ़िस्समावाति वल्अर्ज़ि यमुर्रू-न अ़लैहा व हुम् अन्हा मुअ्-रिज़ून

हिंदी अनुवाद

तथा आकाशों और धरती में बहुत सी निशानियाँ (लक्षण[1]) हैं, जिनपर से लोग गुज़रते रहते हैं और उनपर ध्यान नहीं देते[2]1. अर्थात सहस्त्रों वर्ष की यह कथा इस विवरण के साथ वह़्यी द्वारा ही संभव है, जो आप के अल्लाह के नबी होने तथा क़ुर्आन के अल्लाह की वाणी होने का स्पष्ट प्रमाण है। 2. अर्थात विश्व की प्रत्येक चीज़ अल्लाह के अस्तित्व और उस की शक्ति और सदगुणों की परिचायक है, मात्र सोच विचार की आवश्यक्ता है।

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وَمَا يُؤْمِنُ أَكْثَرُهُم بِاللَّهِ إِلَّا وَهُم مُّشْرِكُونَ ﴾ 106 ﴿

Transliteration

वमा युअ्मिनु अक्सरूहुम् बिल्लाहि इल्ला व हुम् मुश्रिकून

हिंदी अनुवाद

और उनमें से अधिक्तर अल्लाह को मानते तो हैं, परन्तु (साथ ही) मुश्रिक (मिश्रणवादी)[1] भी हैं। 1. अर्थात अल्लाह के अस्तित्व और गुणों का विश्वास रखते हैं, फिर भी पूजा-अर्चना अन्य की करते हैं।

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أَفَأَمِنُوا أَن تَأْتِيَهُمْ غَاشِيَةٌ مِّنْ عَذَابِ اللَّهِ أَوْ تَأْتِيَهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴾ 107 ﴿

Transliteration

अ-फ़-अमिनू अन् तअ्ति-यहुम् गाशि-यतुम् मिन् अ़ज़ाबिल्लाहि औ तअ्ति-यहुमुस्साअ़तु ब़ग्त-तंव्-व हुम् ला यश्अुरून

हिंदी अनुवाद

तो क्या वे निर्भय हो गये हैं कि उनपर अल्लाह की यातना छा जाये अथवा उनपर प्रलय अकस्मात आ जाये और वे अचेत रह जायेँ?

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قُلْ هَٰذِهِ سَبِيلِي أَدْعُو إِلَى اللَّهِ ۚ عَلَىٰ بَصِيرَةٍ أَنَا وَمَنِ اتَّبَعَنِي ۖ وَسُبْحَانَ اللَّهِ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ ﴾ 108 ﴿

Transliteration

क़ुल हाजिही सबीली अद्अू इलल्लाहि, अ़ला बसीरतिन् अ-ना व मनित्त-ब अ़नी, व सुब्हानल्लाहि व मा अ-ना मिनल्-मुश्रिकीन

हिंदी अनुवाद

(हे नबी!) आप कह दें: यही मेरी डगर है, मैं अल्लाह की ओर बुला रहा हूँ। मैं पूरे विश्वास और सत्य पर हूँ और जिसने मेरा अनुसरण किया (वे भी) तथा अल्लाह पवित्र है और मैं मुश्रिकों (मिश्रणवादियों) में से नहीं हूँ।

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وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِم مِّنْ أَهْلِ الْقُرَىٰ ۗ أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۗ وَلَدَارُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ اتَّقَوْا ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴾ 109 ﴿

Transliteration

व मा अर्सल्ना मिन् क़ब्लि-क इल्ला रिजालन् नूही इलैहिम् मिन् अह्-लिल्क़ुरा, अ फ़लम् यसीरू फ़िल्अर्ज़ि फ़-यन्ज़ुरू कै-फ़ का-न आ़कि-बतुल्लज़ी- न मिन् क़ब्लिहिम्, व लदारूल-आख़िरति ख़ैरूल्- लिल्लज़ीनत्तक़ौ, अ-फ़ला तअ्क़िलून

हिंदी अनुवाद

और हमने आपसे पहले मानव[1] पुरुषों ही को नबी बनाकर भेजा, जिनकी ओर प्रकाशना भेजते रहे, नगर वासियों में से, क्या वे धरती में चले फिरे नहीं, ताकि देखते कि उनका परिणाम क्या हुआ, जो इनसे पहले थे? और निश्चय आख़िरत (परलोक) का घर (स्वर्ग) उनके लिए उत्तम है, जो अल्लाह से डरे, तो क्या तुम समझते नहीं हो? 1. क़ुर्आन की अनेक आयतों में आप को यह बात मिलेगी कि रसूलों का अस्वीकार उन की जातियों ने दो ही कारणों से कियाः एक तो यह कि उन के एकेश्वरवाद की शिक्षा उन के बाप दादा के परम्परा के विरुध्द थी, इस लिये सत्य को जानते हुये भी उन्हों ने उस का विरोध किया। दूसरा यह कि उन के दिल में यह बात नहीं उतरी कि कोई मानव पुरुष अल्लाह का रसूल कैसे हो सकता है? रसूल तो किसी फ़रिश्ते को होना चाहिए। फिर यदि रसूलों को किसी जाति ने स्वीकार भी किया तो कुछ युगों के पश्चात उन्हें ईश्वर अथवा ईश्वर का पुत्र बना कर एकेश्वरवाद को आघात पहुँचाया और शिर्क (मिश्रणवाद) का द्वार खोल दिया। इसी लिये क़ुर्आन ने इन दोनों कुविचारों का बार बार खण्डन किया है।

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حَتَّىٰ إِذَا اسْتَيْأَسَ الرُّسُلُ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ قَدْ كُذِبُوا جَاءَهُمْ نَصْرُنَا فَنُجِّيَ مَن نَّشَاءُ ۖ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُنَا عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِمِينَ ﴾ 110 ﴿

Transliteration

हत्ता इज़स्तै-असर्-रूसुलु व ज़न्नू अन्नहुम् क़द् कुज़िबू जा अहुम् नस्-रूना, फ़नुज्जि-य मन् नशा-उ, व ला युरद्दु बअ्सुना अनिल् क़ौमिल्-मुज्रिमीन

हिंदी अनुवाद

(इससे पहले भी रसूलों के साथ यही हुआ।) यहाँ तक कि जब रसूल निराश हो गये और लोगों को विश्वास हो गया कि उनसे झूठ बोला गया है, तो उनके लिए हमारी सहायता आ गई, फिर हम जिसे चाहते हैं, बचा लेते हैं और हमारी यातना अपराधियों से फेरी नहीं जाती।

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لَقَدْ كَانَ فِي قَصَصِهِمْ عِبْرَةٌ لِّأُولِي الْأَلْبَابِ ۗ مَا كَانَ حَدِيثًا يُفْتَرَىٰ وَلَٰكِن تَصْدِيقَ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَتَفْصِيلَ كُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ﴾ 111 ﴿

Transliteration

ल-क़द् का-न फ़ी क़-ससिहिम् अिब्रतुल्-लिउलिल्-अल्बाबि, मा का न हदीसंय्युफ्तरा व लाकिन् तस्दीक़ल्लज़ी बै-न यदैहि व तफ़्सी-ल कुल्लि शैइंव्-व हुदंव्-व रह़्म-तल् लिकौमिंय्युअ्मिनून *

हिंदी अनुवाद

इन कथाओं में, बुध्दिमानों के लिए बड़ी शिक्षा है, ये (क़ुर्आन) ऐसी बातों का संग्रह नहीं है, जिसे स्वयं बना लिया जाता हो, परन्तु इससे पहले की पुस्तकों की सिध्दि और प्रत्येक वस्तु का विवरण (ब्योरा) है तथा मार्गदर्शन और दया है, उन लोगों के लिए जो ईमान (विश्वास) रखते हों।

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