33. सूरह अल-अह्जाब – 1-73

सूरह अह्जाब के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मदनी है, इस में 73 आयतें हैं।
  • इस सूरह में अहज़ाब (जत्था या सेनाओं) की चर्चा के कारण इसे यह नाम दिया गया है।
  • इस में काफ़िरों और मुनाफिकों के धोखे में न आने तथा केवल अल्लाह पर भरोसा करने पर बल दिया गया है। फिर जाहिलियत के मुंह बोले पुत्र की परम्परा का सुधार करने के साथ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नियों का पद बताया गया है।
  • अहज़ाब के युद्ध में अल्लाह की सहायता तथा मुनाफिकों की दुर्गति बताई गई है। इस में मुँह बोले पुत्र की परंपरा को तोड़ने के लिये नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जैनब (रज़ियल्लाहु अन्हा) के विवाह का वर्णन किया गया है।
  • ईमान वालों को, अल्लाह को याद करने का निर्देश देते हुए उस पर दया तथा बड़े प्रतिफल की शुभ सूचना दी गई है। और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मान-मर्यादा को उजागर किया गया है।
  • तलाक और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नियों के विषय में कुछ विशेष आदेश दिये गये हैं।
  • पर्दे का आदेश दिया गया है, तथा प्रलय की चर्चा की गई है।
  • अन्त में मुसलमानों का दायित्व याद दिलाते हुये मुनाफ़िक़ों को चेतावनी दी गई है।

सूरह अहज़ाब | Surah Ahzab in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ ٱتَّقِ ٱللَّهَ وَلَا تُطِعِ ٱلْكَٰفِرِينَ وَٱلْمُنَٰفِقِينَ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا ﴾ 1 ﴿

Transliteration

या अय्युहन्नबिय्युत्-तक़िल्ला-ह व ला तुतिअिल्-काफ़िरी-न वल्मुनाफ़िकी-न, इन्नल्ला-ह का-न अ़लीमन् हकीमा

हिंदी अनुवाद

हे नबी! अल्लाह से डरो और काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की आज्ञापालन न करो। वास्तव में, अल्लाह ह़िक्मत वाला, सब कुछ जानने[1] वाला है।
1. अतः उसी की आज्ञा तथा प्रकाशना का अनुसरण और पालन करो।

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وَٱتَّبِعْ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا ﴾ 2 ﴿

Transliteration

वत्तबिअ् मा यूहा इलै-क मिर्रब्बि-क, इन्नल्ला-ह का-न बिमा तअ्मलू-न ख़बीरा

हिंदी अनुवाद

तथा पालन करो उसका, जो वह़्यी (प्रकाशना) की जा रही है आपकी ओर आपके पालनहार की ओर से। निश्चय अल्लाह जो तुम कर रहे हो, उससे सूचित है।

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وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًا ﴾ 3 ﴿

Transliteration

व तवक्कल् अ़लल्लाहि, व कफ़ा बिल्लाहि वकीला

हिंदी अनुवाद

और आप भरोसा करें अल्लाह पर तथा अल्लाह प्रयाप्त है, रक्षा करने वाला।

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مَّا جَعَلَ ٱللَّهُ لِرَجُلٍ مِّن قَلْبَيْنِ فِى جَوْفِهِۦ وَمَا جَعَلَ أَزْوَٰجَكُمُ ٱلَّٰٓـِٔى تُظَٰهِرُونَ مِنْهُنَّ أُمَّهَٰتِكُمْ وَمَا جَعَلَ أَدْعِيَآءَكُمْ أَبْنَآءَكُمْ ذَٰلِكُمْ قَوْلُكُم بِأَفْوَٰهِكُمْ وَٱللَّهُ يَقُولُ ٱلْحَقَّ وَهُوَ يَهْدِى ٱلسَّبِيلَ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

मा ज-अ़लल्लाहु लि-रजुलिम् मिन् क़ल्बैनि फ़ी जौफ़िही व मा ज-अ़-ल अज़्वा-जकुमुल्लाई तुज़ाहिरू-न मिन्हुन्-न उम्महातिकुम् व मा ज-अ़-ल अद्-अिया-अकुम् अब्ना-अकुम्, ज़ालिकुम् क़ौलुकुम् बि-अफ़्वाहिकुम्, वल्लाहु यक़ूलुल्- हक़् क़ व हु-व यह्दिस्सबील

हिंदी अनुवाद

और नहीं रखे हैं अल्लाह ने किसी को, दो दिल, उसके भीतर और नहीं बनाया है तुम्हारी पत्नियों को, जिनसे तुम ज़िहार[1] करते हो, उनमें से, तुम्हारी मातायें तथा नहीं बनाया है तुम्हारे मुँह बोले पुत्रों को तुम्हारा पुत्र। ये तुम्हारी मौखिक बाते हैं और अल्लाह सच कहता है तथा वही सुपथ दिखाता है।
1. इस आयत का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार एक व्यक्ति के दो दिल नहीं होते वैसे ही उस की पत्नि ज़िहार कर लेने से उस की माता तथा उस का मुँह बोला पुत्र उस का पुत्र नहीं हो जाता। नबी (सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम) ने नबी होने से पहले अपने मुक्त किये हुये दास ज़ैद बिन ह़ारिसा को अपना पुत्र बनाया था और उन को ह़ारिसा पुत्र मुह़म्मद कहा जाता था जिस पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4782) ज़िहार का विवरण सूरह मुजादिला में आ रहा है।

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ٱدْعُوهُمْ لِءَابَآئِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ ٱللَّهِ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوٓا۟ ءَابَآءَهُمْ فَإِخْوَٰنُكُمْ فِى ٱلدِّينِ وَمَوَٰلِيكُمْ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَآ أَخْطَأْتُم بِهِۦ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ﴾ 5 ﴿

Transliteration

उद्-अूहुम् लिआबाइहिम् हु-व अक़्-सतु अिन्दल्लाहि फ़-इल्लम् तअ्लमू आबा-अहुम् फ़-इख़्वानुकुम् फ़िद्दीनि व मवालीकुम्, व लै-स अ़लैकुम् जुनाहुन् फ़ीमा अख़्तअ्-तुम् बिही व लाकिम्-मा तअ़म्म- दत् क़ुलूबुकुम्, व कानल्लाहु ग़फ़ूरर्-रहीमा

हिंदी अनुवाद

उन्हें पुकारो, उनके बापों से संबन्धित करके, ये अधिक न्याय की बात है अल्लाह के समीप और यदि तुम नहीं जानते उनके बापों को, तो वे तुम्हारे धर्म बन्धु तथा मित्र हैं और तुम्हारे ऊपर कोई दोष नहीं है उसमें, जो तुमसे चूक हुई है, परन्तु (उसमें है) जिसका निश्चय तुम्हारे दिल करें तथा अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।

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ٱلنَّبِىُّ أَوْلَىٰ بِٱلْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ وَأَزْوَٰجُهُۥٓ أُمَّهَٰتُهُمْ وَأُو۟لُوا۟ ٱلْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِى كِتَٰبِ ٱللَّهِ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُهَٰجِرِينَ إِلَّآ أَن تَفْعَلُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَوْلِيَآئِكُم مَّعْرُوفًا كَانَ ذَٰلِكَ فِى ٱلْكِتَٰبِ مَسْطُورًا ﴾ 6 ﴿

Transliteration

अन्नबिय्यु औला बिल्मुअ्मिनी-न मिन् अन्फ़ुसिहिम् व अज़्वाजुहू उम्महातुहुम्, व उलुल्-अर्हामि बअ्ज़ुहुम् औला बि- बअ्ज़िन् फ़ी किताबिल्लाहि मिनल्-मुअ्मिनी-न वल्मुहाजिरी-न इल्ला अन् तफ़्अ़लू इला औलिया-इकुम् मअ्-रूफ़नू, का-न ज़ालि-क फ़िल्-किताबि मस्तूरा

हिंदी अनुवाद

नबी[1] अधिक समीप (प्रिय) है ईमान वालों से, उनके प्राणों से और आपकी पत्नियाँ[2] उनकी मातायें हैं और समीपवर्ती संबन्धी एक-दूसरे से अधिक समीप[3] हैं, अल्लाह के लेख में ईमान वालों और मुहाजिरों से। परन्तु, ये कि करते रहो अपने मित्रों के साथ भलाई और ये पुस्तक में लिखा हूआ है।
1. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मैं मुसलमानों का अधिक समीपवर्ती हूँ। यह आयत पढ़ो, तो जो माल छोड़ जाये वह उस के वारिस का है और जो क़र्ज़ तथा निर्बल संतान छोड़ जाये तो मैं उस का रक्षक हूँ। (सह़ीह़ बुख़ारीः4781) 2. अर्थात उन का सम्मान माताओं के बराबर है और आप के पश्चात् उन से विवाह निषेध है। 3. अर्थात धर्म विधानुसार अत्तराधिकार समीपवर्ती संबंधियों का है, इस्लाम के आरंभिक युग में हिजरत तथा ईमान के आधार पर एक दूसरे के उत्तराधिकारी होते थे जिसे मीरास की आयत द्वारा निरस्त कर दिया गया है।

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وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ ٱلنَّبِيِّۦنَ مِيثَٰقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ٱبْنِ مَرْيَمَ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَٰقًا غَلِيظًا ﴾ 7 ﴿

Transliteration

व इज़् अख़ज़्ना मिनन्नबिय्यी-न मीसा-क़हुम् व मिन्-क व मिन् नूहिंव्-व इब्राही-म व मूसा व ईसब्नि-मर्य-म व अख़ज़्ना मिन्हुम् मीसाक़न् ग़लीज़ा

हिंदी अनुवाद

तथा (याद करो) जब हमने नबियों से उनका वचन[1] लिया तथा आपसे और नूह़, इब्रीम, मूसा, मर्यम के पुत्र ईसा से और हमने लिया उनसे दृढ़ वचन।
1. अर्थात अपना उपदेश पहुँचाने का।

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لِّيَسْـَٔلَ ٱلصَّٰدِقِينَ عَن صِدْقِهِمْ وَأَعَدَّ لِلْكَٰفِرِينَ عَذَابًا أَلِيمًا ﴾ 8 ﴿

Transliteration

लियस्- अलस्सादिक़ी-न अ़न् सिद्क़िहिम् व अ-अ़द्-द लिल्काफ़िरी-न अ़ज़ाबन् अलीमा

हिंदी अनुवाद

ताकि वह प्रश्न[1] करे सचों से उनके सच के संबन्ध में तथा तैयार की है काफ़िरों के लिए दुःखदायी यातना।
1. अर्थात प्रलय के दिन। (देखियेः सूरह आराफ़, आयतः6)

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَآءَتْكُمْ جُنُودٌ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِيحًا وَجُنُودًا لَّمْ تَرَوْهَا وَكَانَ ٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا ﴾ 9 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनुज़्कुरू निअ्-मतल्लाहि अ़लैकुम् इज़् जाअत्कुम् जुनूदुन् फ़-अर्सल्ना अ़लैहिम् रीहंव्-व जुनूदल्-लम् तरौहा, व कानल्लाहु बिमा तअ्मलू-न बसीरा

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! याद करो अल्लाह के पुरस्कार को अपने ऊपर, जब आ गये तुम्हारे पास जत्थे, तो भेजी हमने उनपर आँधी और ऐसी सेनायें जिन्हें तुमने नहीं देखा और अल्लाह जो तुम कर रहे थे, उसे देख रहा था।

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إِذْ جَآءُوكُم مِّن فَوْقِكُمْ وَمِنْ أَسْفَلَ مِنكُمْ وَإِذْ زَاغَتِ ٱلْأَبْصَٰرُ وَبَلَغَتِ ٱلْقُلُوبُ ٱلْحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِٱللَّهِ ٱلظُّنُونَا۠ ﴾ 10 ﴿

Transliteration

इज़् जाऊकुम् मिन् फ़ौक़िकुम् व मिन् अस्-फ़-ल मिन्कुम् व इज़् ज़ा-ग़तिल्-अब्सारु व ब-ल-ग़तिल् क़ुलूबुल्-हनाजि-र तज़ुन्नू-न बिल्लाहिज़्ज़ुनूना

हिंदी अनुवाद

जब वे तुम्हारे पास आ गये, तुम्हारे ऊपर से तथा तुम्हारे नीचे से और जब पथरा गयीं आँखें तथा आने लगे दिल मुँह[1] को तथा तुम विचारने लगे अल्लाह के संबन्ध में विभिन्न विचार।
1. इन आयतों में अह़्ज़ाब के युध्द की चर्चा की गई है। जिस का दूसरा नाम (खन्दक़ का युध्द) भी है। क्यों कि इस में ख़न्दक़ (खाई) खोद कर मदीना की रक्षा की गई। सन् 5 में मक्का के काफ़िरों ने अपने पूरे सहयोगी क़बीलों के साथ एक भारी सेना ले कर मदीना को घेर लिया और नीचे वादी और ऊपर पर्वतों से आक्रमण कर दिया। उस समय अल्लाह ने ईमान वालों की रक्षा आँधी तथा फ़रिश्तों की सेना भेज कर की। और शत्रु पराजित हो कर भागे। और फिर कभी मदीना पर आक्रमण करने का साहस न कर सके।

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هُنَالِكَ ٱبْتُلِىَ ٱلْمُؤْمِنُونَ وَزُلْزِلُوا۟ زِلْزَالًا شَدِيدًا ﴾ 11 ﴿

Transliteration

हुनालिकब्-तुलियल्-मुअ्मिनू-न व जुल्ज़िलू ज़िल्ज़ालन् शदीदा

हिंदी अनुवाद

यहीं परीक्षा ली गयी ईमान वालों की और वे झंझोड़ दिये गये पूर्ण रूप से।

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وَإِذْ يَقُولُ ٱلْمُنَٰفِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ مَّا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥٓ إِلَّا غُرُورًا ﴾ 12 ﴿

Transliteration

व इज़् यक़ूलुल्- मुनाफ़िक़ू-न वल्लज़ी-न फ़ी क़ुलूबिहिम् म- रजुम् मा व-अ़-दनल्लाहु व रसूलुहू इल्ला ग़ुरूरा

हिंदी अनुवाद

और जब कहने लगे मुश्रिक़ और जिनके दिलों में कुछ रोग था कि अल्लाह तथा उसके रसूल ने नहीं वचन दिया हमें, परन्तु धोखे का।

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وَإِذْ قَالَت طَّآئِفَةٌ مِّنْهُمْ يَٰٓأَهْلَ يَثْرِبَ لَا مُقَامَ لَكُمْ فَٱرْجِعُوا۟ وَيَسْتَـْٔذِنُ فَرِيقٌ مِّنْهُمُ ٱلنَّبِىَّ يَقُولُونَ إِنَّ بُيُوتَنَا عَوْرَةٌ وَمَا هِىَ بِعَوْرَةٍ إِن يُرِيدُونَ إِلَّا فِرَارًا ﴾ 13 ﴿

Transliteration

व इज़् क़ालत्ताइ-फ़तुम् मिन्हुम् या अहू-ल यस्रि – ब ला मुक़ा-म लकुम् फर्जिअू व यस्तअ्ज़िनु फ़रीक़ुम् मिन्हुमुन्नबिय्-य यक़ूलू-न इन्-न बुयूतना औ़-रतुन्, व मा हि-य बिऔ़-रतिन्, इंय्युरीदू – न इल्ला फ़िरारा

हिंदी अनुवाद

और जब कहा उनके एक गिरोह नेः हे यस्रिब[1] वालो! कोई स्थान नहीं तुम्हारे लिए, अतः, लौट[2] चलो तथा अनुमति माँगने लगा उनमें से एक गिरोह नबी से, कहने लगाः हमारे घर खाली हैं, जबकि वह खाली न थे। वे तो बस निश्चय कर रहे थे भाग जाने का।
1. यह मदीने का प्राचीन नाम है। 2. अर्थात रणक्षेत्र से अपने घरों को।

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وَلَوْ دُخِلَتْ عَلَيْهِم مِّنْ أَقْطَارِهَا ثُمَّ سُئِلُوا۟ ٱلْفِتْنَةَ لَءَاتَوْهَا وَمَا تَلَبَّثُوا۟ بِهَآ إِلَّا يَسِيرًا ﴾ 14 ﴿

Transliteration

व लौ दुख़िलत् अ़लैहिम् मिन् अक़्तारिहा सुम्-म सुइलुल्- फ़ित्-न-त लआतौहा व मा तलब्बसू बिहा इल्ला यसीरा

हिंदी अनुवाद

और यदि प्रवेश कर जातीं उनपर मदीने के चारों ओर से (सेनायें), फिर उनसे माँग की जाती उपद्रव[1] की, तो अवश्य उपद्रव कर देते और उसमें तनिक भी देर नहीं करते।
1. अर्थात इस्लाम से फिर जाने तथा शिर्क करने की।

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وَلَقَدْ كَانُوا۟ عَٰهَدُوا۟ ٱللَّهَ مِن قَبْلُ لَا يُوَلُّونَ ٱلْأَدْبَٰرَ وَكَانَ عَهْدُ ٱللَّهِ مَسْـُٔولًا ﴾ 15 ﴿

Transliteration

व ल-क़द् कानू आ़-हदुल्ला-ह मिन् क़ब्लु ला युवल्लूनल्-अद्बा-र, व का-न अ़ह्दुल्लाहि मस्ऊला

हिंदी अनुवाद

जबकि उन्होंने वचन दिया था अल्लाह को इससे पूर्व कि पीछा नहीं दिखायेंगे और अल्लाह के वचन का प्रश्न अवश्य किया जायेगा।

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قُل لَّن يَنفَعَكُمُ ٱلْفِرَارُ إِن فَرَرْتُم مِّنَ ٱلْمَوْتِ أَوِ ٱلْقَتْلِ وَإِذًا لَّا تُمَتَّعُونَ إِلَّا قَلِيلًا ﴾ 16 ﴿

Transliteration

कुल लंय्यन्फ़-अ़कुमुल्-फ़िरारु इन् फ़रर्तुम् मिनल्-मौति अविल्-क़त्लि व इज़ल् ला तुमत्तअू-न इल्ला क़लीला

हिंदी अनुवाद

आप कह दें: कदापि लाभ नहीं पहुँचायेगा तुम्हें भागना, यदि तुम भाग जाओ मरण से और तब तुम थोड़ा ही[1] लाभ प्राप्त कर सकोगे।
1. अर्थात अपनी सीमित आयु तक जो परलोक की अपेक्षा बहुत थोड़ी है।

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قُلْ مَن ذَا ٱلَّذِى يَعْصِمُكُم مِّنَ ٱللَّهِ إِنْ أَرَادَ بِكُمْ سُوٓءًا أَوْ أَرَادَ بِكُمْ رَحْمَةً وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا ﴾ 17 ﴿

Transliteration

क़ुल मन् ज़ल्लज़ी यअ्सिमुकुम् मिनल्लाहि इन् अरा-द बिकुम् सूअन् औ अरा-द बिकुम् रह्म-तन्, व ला यजिदू-न लहुम् मिन् दूनिल्लाहि वलिय्यंव-व ला नसीरा

हिंदी अनुवाद

आप पूछिये कि वह कौन है, जो तुम्हें बचा सके अल्लाह से, यदि वह तुम्हारे साथ बुराई चाहे अथवा तुम्हारे साथ भलाई चाहे? और वह अपने लिए नहीं पायेंगे अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक और न कोई सहायक।

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قَدْ يَعْلَمُ ٱللَّهُ ٱلْمُعَوِّقِينَ مِنكُمْ وَٱلْقَآئِلِينَ لِإِخْوَٰنِهِمْ هَلُمَّ إِلَيْنَا وَلَا يَأْتُونَ ٱلْبَأْسَ إِلَّا قَلِيلًا ﴾ 18 ﴿

Transliteration

क़द् यअ्-लमुल्लाहुल्-मुअ़व्विक़ी न मिन्कुम् वल्क़ाइली-न लि-इख़्वानिहिम् हलुम्-म इलैना व ला यअ्तूनल्-बअ्-स इल्ला क़लीला

हिंदी अनुवाद

जानता है अल्लाह उन्हें, जो रोकने वाले हैं तुममें से तथा कहने वाले हैं अपने भाईयों से कि हमारे पास चले आओ तथा नहीं आते हैं युध्द में, परन्तु कभी-कभी।

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أَشِحَّةً عَلَيْكُمْ فَإِذَا جَآءَ ٱلْخَوْفُ رَأَيْتَهُمْ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ تَدُورُ أَعْيُنُهُمْ كَٱلَّذِى يُغْشَىٰ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْمَوْتِ فَإِذَا ذَهَبَ ٱلْخَوْفُ سَلَقُوكُم بِأَلْسِنَةٍ حِدَادٍ أَشِحَّةً عَلَى ٱلْخَيْرِ أُو۟لَٰٓئِكَ لَمْ يُؤْمِنُوا۟ فَأَحْبَطَ ٱللَّهُ أَعْمَٰلَهُمْ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرًا ﴾ 19 ﴿

Transliteration

अशिह्ह-तन् अ़लैकुम् फ़-इज़ा जा-अल्-ख़ौफ़ु रऐ-तहुम् यन्-ज़ुरू-न इलै-क तदूरु अअ्युनुहुम् कल्लज़ी युग़्शा अ़लैहि मिनल्- मौति फ़-इज़ा ज़-हबल्-ख़ौफ़ु स-लक़ूकुम् बि-अल्सि-नतिन् हिदादिन् अशिह्ह-तन् अ़लल्-ख़ैरि, उलाइ-क लम् युअ्मिनू फ़- अह्-बतल्लाहु अअ्मालहुम्, व का-न ज़ालि-क अ़लल्लाहि यसीरा

हिंदी अनुवाद

वह बड़े कंजूस हैं तुमपर। फिर जब आ जाये भय का[1] समय, तो आप उन्हें देखेंगे कि आपकी ओर तक रहे हैं, फिर रही हैं उनकी आँखें, उसके समान, जो मरणासन्न दशा में हो और जब दूर हो जाये भय, तो वह मिलेंगे तुमसे तेज़ ज़ुबानों[2] से, बड़े लोभी होकर धन के। वे ईमान नहीं लाये हैं। अतः, व्यर्थ कर दिये अल्लाह ने उनके सभी कर्म तथा ये अल्लाह पर अति सरल है।
1. अर्थात युध्द का समय। 2. अर्थात मर्म भेदी बातें करेंगे, और विजय में प्राप्त धन के लोभ में बातें बनायेंगे।

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يَحْسَبُونَ ٱلْأَحْزَابَ لَمْ يَذْهَبُوا۟ وَإِن يَأْتِ ٱلْأَحْزَابُ يَوَدُّوا۟ لَوْ أَنَّهُم بَادُونَ فِى ٱلْأَعْرَابِ يَسْـَٔلُونَ عَنْ أَنۢبَآئِكُمْ وَلَوْ كَانُوا۟ فِيكُم مَّا قَٰتَلُوٓا۟ إِلَّا قَلِيلًا ﴾ 20 ﴿

Transliteration

यह्सबूनल्-अह्ज़ा-ब लम् यज़्हबू व इंय्यस्तिल्-अह्ज़ाबु यवद्दू लौ अन्नहुम् बादू-न फ़िल्-अअ्-राबि यस्अलू-न अ़न् अम्बा-इकुम्, व लौ कानू फ़ीकुम् मा क़ा-तलू इल्ला क़लीला

हिंदी अनुवाद

वे समझते हैं कि जत्थे नहीं[1] गये और यदि आ जायें सेनायें, तो वे चाहेंगे कि वे गाँव में हों, गाँव वालों के बीच तथा पूछते रहें तुम्हारे समाचार और यदि तुममें होते भी, तो वे युध्द में कम ही भाग लेते।
1. अर्थात ये मुनाफ़िक़ इतने कायर हैं कि अब भी उन्हें सेनाओं का भय है।

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لَّقَدْ كَانَ لَكُمْ فِى رَسُولِ ٱللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِّمَن كَانَ يَرْجُوا۟ ٱللَّهَ وَٱلْيَوْمَ ٱلْءَاخِرَ وَذَكَرَ ٱللَّهَ كَثِيرًا ﴾ 21 ﴿

Transliteration

ल-क़द् का-न लकुम् फ़ी रसूलिल्लाहि उस्वतुन् ह स नतुल्-लिमन् का-न यर्जुल्ला-ह वल्यौमल्-आख़ि-र व ज़-करल्ला-ह कसीरा

हिंदी अनुवाद

तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में उत्तम[1] आदर्श है, उसके लिए, जो आशा रखता हो अल्लाह और अन्तिम दिन (प्रलय) की तथा याद करो अल्लाह को अत्यधिक।
1. अर्थात आप के सहन, साहस तथा वीरता में।

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وَلَمَّا رَءَا ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلْأَحْزَابَ قَالُوا۟ هَٰذَا مَا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَصَدَقَ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَمَا زَادَهُمْ إِلَّآ إِيمَٰنًا وَتَسْلِيمًا ﴾ 22 ﴿

Transliteration

व लम्मा र अल्-मुअ्मिनूनल् अह्ज़ा-ब क़ालू हाज़ा मा व-अ़-दनल्लाहु व रसूलुहू व स-दक़ल्लाहु व रसूलुहू व मा ज़ा-दहुम् इल्ला ईमानंव्-व तस्लीमा

हिंदी अनुवाद

और जब ईमान वालों ने सेनायें देखीं, तो कहाः यही है, जिसका वचन दिया था हमें अल्लाह और उसके रसूल ने और सच कहा अल्लाह और उसके रसूल ने और इसने अधिक नहीं किया, परन्तु (उनके) ईमान तथा स्वीकार को।

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مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ رِجَالٌ صَدَقُوا۟ مَا عَٰهَدُوا۟ ٱللَّهَ عَلَيْهِ فَمِنْهُم مَّن قَضَىٰ نَحْبَهُۥ وَمِنْهُم مَّن يَنتَظِرُ وَمَا بَدَّلُوا۟ تَبْدِيلًا ﴾ 23 ﴿

Transliteration

मिनल्-मुअ्मिनी-न रिजालुन् स-दक़ू मा आ़-हदुल्लाह अ़लैहि फ़मिन्हुम् मन् क़ज़ा नह्-बहू व मिन्हुम् मंय्यन्तज़िरु व मा बद्दलू तब्दीला

हिंदी अनुवाद

ईमान वालों में कुछ वे भी हैं, जिन्होंने सच कर दिखाया अल्लाह से किये हुए अपने वचन को। तो उनमें कुछ ने अपना वचन[1] पूरा कर दिया और उनमें से कुछ प्रतीक्षा कर रहे हैं और उन्होंने तनिक भी परिवर्तन नहीं किया।
1. अर्थात युध्द में शहीद कर दिये गये।

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لِّيَجْزِىَ ٱللَّهُ ٱلصَّٰدِقِينَ بِصِدْقِهِمْ وَيُعَذِّبَ ٱلْمُنَٰفِقِينَ إِن شَآءَ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا ﴾ 24 ﴿

Transliteration

लियज्ज़ि- यल्लाहुस्सादिक़ी-न बिसिद्क़िहिम् व युअ़ज़्ज़िबल् -मुनाफ़िक़ी-न इन् शा-अ औ यतू-ब अ़लैहिम्, इन्नल्ला-ह का-न ग़फ़ूरर्रहीमा

हिंदी अनुवाद

ताकि अल्लाह प्रतिफल प्रदान करे सचों को उनके सच का तथा यातना दे मुनाफ़िक़ों को अथवा उन्हें क्षमा कर दे। वास्तव में, अल्लाह अति क्षमाशील और दयावान् है।

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وَرَدَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِغَيْظِهِمْ لَمْ يَنَالُوا۟ خَيْرًا وَكَفَى ٱللَّهُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلْقِتَالَ وَكَانَ ٱللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزًا ﴾ 25 ﴿

Transliteration

व रद्दल्लाहुल्लज़ी-न क-फ़रू बिग़ैज़िहिम् लम् यनालू ख़ैरन्, व कफ़ल्लाहुल्- मुअ्मिनीनल्-क़िता-ल, व कानल्लाहु क़विय्यन् अ़ज़ीज़ा

हिंदी अनुवाद

तथा फेर दिया अल्लाह ने काफ़िरों को (मदीना से) उनके क्रोध के साथ। वे नहीं प्राप्त कर सके कोई भलाई और पर्याप्त हो गया अल्लाह ईमान वालों के लिए युध्द में और अल्लाह अति शक्तिशाली तथा प्रभुत्वशाली है।

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وَأَنزَلَ ٱلَّذِينَ ظَٰهَرُوهُم مِّنْ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ مِن صَيَاصِيهِمْ وَقَذَفَ فِى قُلُوبِهِمُ ٱلرُّعْبَ فَرِيقًا تَقْتُلُونَ وَتَأْسِرُونَ فَرِيقًا ﴾ 26 ﴿

Transliteration

व अन्ज़लल्लज़ी-न ज़ा-हरूहुम् मिन् अह्हिल-किताबि मिन् सयासीहिम् व क़-ज़-फ़ फ़ी क़ुलूबिहिमुर्-रुअ्-ब फ़रीक़न् तक़्तुलू-न व तअ्सिरू न फ़रीक़ा

हिंदी अनुवाद

और उतार दिया अल्लाह ने उन अह्ले किताब को, जिन्होंने सहायता की उन (सेनाओं) की, उनके दुर्गों से तथा डाल दिया उनके दिलों में भय।[1] उनके एक गिरोह को तुम वध कर रहे थे तथा बंदी बना रहे थे एक-दूसरे गिरोह को।
1. इस आयत में बनी क़ुरैज़ा के युध्द की ओर संकेत है। इस यहूदी क़बीले की नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ संधि थी। फिर भी उन्हों ने संधि भंग कर के खंदक़ के युध्द में क़ुरैश मक्का का साथ दिया। अतः युध्द समाप्त होते ही आप ने उन से युध्द की घोषण कर कर दी। और उन की घेरा बंदी कर ली गई। पच्चीस दिन के बाद उन्हों ने साद बिन मुआज़ को अपना मध्यस्त मान लिया। और उन के निर्णय के अनुसार उन के लड़ाकुओं को वध कर दिया गया। और बच्चों, बूढ़ों तथा स्त्रियों को बंदी बना लिया गया। इस प्रकार मदीना से इस आतंकवादी क़बीले को सदैव के लिये समाप्त कर दिया गया।

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وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَٰرَهُمْ وَأَمْوَٰلَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَـُٔوهَا وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرًا ﴾ 27 ﴿

Transliteration

व औ-र-सकुम् अर्-ज़हुम् व दिया-रहुम् व अम्वा-लहुम् व अर्ज़ल्-लम् त-तऊहा, व कानल्लाहु अ़ला कुल्लि शैइन् क़दीरा

हिंदी अनुवाद

और तुम्हारे अधिकार में दे दी उनकी भूमि तथा उनके घरों और धनों को और ऐसी धरती को, जिसपर तुमने पग नहीं रखे थे तथा अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ قُل لِّأَزْوَٰجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا ﴾ 28 ﴿

Transliteration

या अय्युहन्नबिय्यु क़ुल् लिअज़्वाजि-क इन् कुन्तुन्-न तुरिद्नल्- हयातद्दुन्या व ज़ीन-तहा फ़-तआ़लै-न उमत्तिअ्कुन्-न व उसर्रिह्कुन्-न सराहन् जमीला

हिंदी अनुवाद

हे नबी! आप अपनी पत्नियों से कह दो कि यदि तुम चाहती हो सांसारिक जीवन तथा उसकी शोभा, तो आओ, मैं तुम्हें कुछ दे दूँ तथा विदा कर दूँ, अच्छाई के साथ।

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وَإِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَٱلدَّارَ ٱلْءَاخِرَةَ فَإِنَّ ٱللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَٰتِ مِنكُنَّ أَجْرًا عَظِيمًا ﴾ 29 ﴿

Transliteration

व इन् कुन्तुन्-न तुरिद्नल्ला-ह व क रसूलहू वद्दारल्-आख़िर त फ़-इन्नल्ला-ह अ-अ़द्-द लिल्मुह्सिनाति मिन्कुन्-न अज्रन् अ़ज़ीमा

हिंदी अनुवाद

और यदि तुम चाहती हो अल्लाह और उसके रसूल तथा आख़िरत के घर को, तो अल्लाह ने तैयार कर रखा है तुममें से सदाचारिणियों के लिए भारी प्रतिफल।[1]
1. इस आयत में अल्लाह ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ये आदेश दिया है कि आप की पत्नियाँ जो आप से अपने ख़र्च अधिक करने की माँग कर रही हैं, तो आप उन्हें अपने साथ रहने या न रहने का अधिकार दे दें। और जब आप ने उन्हें अधिकार दिया तो सब ने आप के साथ रहने का निर्णय किया। इस को इस्लामी विधान में (तख़्यीर) कहा जाता है। अर्थात पत्नि को तलाक़ लेने का अधिकार दे देना। ह़दीस में है कि जब यह आयत उतरी तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी पत्नी आइशा से पहले कहा कि मैं तुम्हें एक बात बता रहा हूँ। तुम अपने माता-पिता से प्रामर्श किये बिना जल्दी न करना। फिर आप ने यह आयत सुनाई। तो आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहाः मैं इस के बारे में भी अपने माता-पिता से परामर्श करूँगी? मैं अल्लाह तथा उस के रसूल और आख़िरत के घर को चाहती हूँ। और फिर आप की दूसरी पत्नियों ने भी ऐसी ही किया। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4786)

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يَٰنِسَآءَ ٱلنَّبِىِّ مَن يَأْتِ مِنكُنَّ بِفَٰحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ يُضَٰعَفْ لَهَا ٱلْعَذَابُ ضِعْفَيْنِ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرًا ﴾ 30 ﴿

Transliteration

या निसाअन्नबिय्यि मंय्यअ्ति मिन्कुन्-न बिफ़ाहि-शतिम् मुबय्यि-नतिंय्-युज़ा-अ़फ़् ल-हल्-अ़ज़ाबु जिअ्फ़ैनि, व का-न ज़ालि-क अ़लल्लाहि यसीरा

हिंदी अनुवाद

हे नबी की पत्नियो! जो तुममें से खुला दुराचार करेगी उसके लिए दुगनी कर दी जायेगी यातना और ये अल्लाह पर अति सरल है।

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وَمَن يَقْنُتْ مِنكُنَّ لِلَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتَعْمَلْ صَٰلِحًا نُّؤْتِهَآ أَجْرَهَا مَرَّتَيْنِ وَأَعْتَدْنَا لَهَا رِزْقًا كَرِيمًا ﴾ 31 ﴿

Transliteration

व मंय्यक़्नुत् मिन्कुन्-न लिल्लाहि व रसूलिही व तअ्मल् सालिहन् नुअ्तिहा अजरहा मर्रतैनि व अअ्तद्ना लहा रिज़्क़न् करीमा

हिंदी अनुवाद

तथा जो मानेंगी तुममें से अल्लाह तथा उसके रसूल की बात और सदाचार करेंगी, हम उन्हें प्रदामन करेंगे उनका प्रतिफल दोहरा और हमने तैयार की है उनके लिए उत्तम जीविका।[1]
1. स्वर्ग में।

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يَٰنِسَآءَ ٱلنَّبِىِّ لَسْتُنَّ كَأَحَدٍ مِّنَ ٱلنِّسَآءِ إِنِ ٱتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِٱلْقَوْلِ فَيَطْمَعَ ٱلَّذِى فِى قَلْبِهِۦ مَرَضٌ وَقُلْنَ قَوْلًا مَّعْرُوفًا ﴾ 32 ﴿

Transliteration

या निसा-अन्नबिय्यि लस्तुन्-न क-अ-हदिम् मिनन्निसा-इ इनित्तक़ैतुन्-न फ़ला तख़्-ज़अ्-न बिल्क़ौलि फ़यत्म- अ़ल्लज़ी फ़ी क़ल्बिही म-रजुंव्-व क़ुल्-न क़ौलम् मअ्-रूफ़ा

हिंदी अनुवाद

हे नबी की पत्नियो! तुम नहीं हो अन्य स्त्रियों के समान। यदि तुम अल्लाह से डरती हो, तो कोमल भाव से बात न करो कि लोभ करने लगे वे, जिनके दिल में रोग हो और सभ्य बात बोलो।

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وَقَرْنَ فِى بُيُوتِكُنَّ وَلَا تَبَرَّجْنَ تَبَرُّجَ ٱلْجَٰهِلِيَّةِ ٱلْأُولَىٰ وَأَقِمْنَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتِينَ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِعْنَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنكُمُ ٱلرِّجْسَ أَهْلَ ٱلْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا ﴾ 33 ﴿

Transliteration

व क़र्-न फ़ी बुयूतिकुन्-न व ला त-बर्रज्-न त-बर्रुजल्-जाहिलिय्यतिल्- ऊला व अक़िम्नस्सला-त व आतीनज़्- ज़का-त व अतिअ्नल्ला-ह व रसूलहू, इन्नमा युरीदुल्लाहु लियुज़्हि-ब अ़न्कुमुर्- रिज्-स अह्लल्-बैति व यु-तह्हि रकुम् तत्हीरा

हिंदी अनुवाद

और रहो अपने घरों में और सौन्दर्य का प्रदर्शन न करो, प्रथम अज्ञान युग के प्रदर्शन के समान तथा नमाज़ की स्थापना करो, ज़कात दो तथा आज्ञा पालन करो अल्लाह और उसके रसूल की। अल्लाह चाहता है कि मलिनता को दूर कर दे तुमसे, हे नबी की घर वालियो! तथा तुम्हें पवित्र कर दे,, अति पवित्र।

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وَٱذْكُرْنَ مَا يُتْلَىٰ فِى بُيُوتِكُنَّ مِنْ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ وَٱلْحِكْمَةِ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ لَطِيفًا خَبِيرًا ﴾ 34 ﴿

Transliteration

वज़्कुर्-न मा युत्ला फ़ी बुयूतिकुन्- न मिन् आयातिल्लाहि वल्हिक्मति, इन्नल्ला-ह का- न लतीफ़न् ख़बीरा

हिंदी अनुवाद

तथा याद रखो उसे, जो पढ़ी जाती है तुम्हारे घरों में, अल्लाह की आयतों तथा हिक्मत में से।[1] वास्तव में अल्लाह सूक्ष्मदर्शी, सर्व सूचित है।
1. यहाँ ह़िक्मत से अभिप्राय ह़दीस है जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन, कर्म तथा वह काम है जो आप के सामने किया गया हो और आप ने उसे स्वीकार किया हो। वैसे तो अल्लाह की आयत भी ह़िक्मत है किन्तु जब दोनों का वर्णन एक साथ हो तो आयत का अर्थ अल्लाह की पुस्तक और ह़िक्मत का अर्थ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ह़दीस होती है।

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إِنَّ ٱلْمُسْلِمِينَ وَٱلْمُسْلِمَٰتِ وَٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَٱلْقَٰنِتِينَ وَٱلْقَٰنِتَٰتِ وَٱلصَّٰدِقِينَ وَٱلصَّٰدِقَٰتِ وَٱلصَّٰبِرِينَ وَٱلصَّٰبِرَٰتِ وَٱلْخَٰشِعِينَ وَٱلْخَٰشِعَٰتِ وَٱلْمُتَصَدِّقِينَ وَٱلْمُتَصَدِّقَٰتِ وَٱلصَّٰٓئِمِينَ وَٱلصَّٰٓئِمَٰتِ وَٱلْحَٰفِظِينَ فُرُوجَهُمْ وَٱلْحَٰفِظَٰتِ وَٱلذَّٰكِرِينَ ٱللَّهَ كَثِيرًا وَٱلذَّٰكِرَٰتِ أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُم مَّغْفِرَةً وَأَجْرًا عَظِيمًا ﴾ 35 ﴿

Transliteration

इन्नल्-मुस्लिमी-न वल्मुस्लिमाति वल्मुअ्मिनी-न वल्मुअ्मिनाति वल्क़ानिती-न वल्क़ानिताति वस्सादिक़ी-न वस्सादिक़ाति वस्साबिरी-न वस्साबिराति वल्ख़ाशिई -न वल्ख़ाशिआ़ति वल्मु-तसद्द़िक़ी न वल्मु-तसद्दिक़ाति वस्सा-इमी-न वस्सा-इमाति वल्हाफ़िज़ी-न फ़ुरू-जहुम् वल्हाफ़िज़ाति वज़्ज़ाकिरीनल्ला-ह कसीरंव् – वज़्ज़ाकिराति अ-अ़द्दल्लाहु लहुम् मग़्फ़ि-रतंव्-व अज्रन् अ़ज़ीमा

हिंदी अनुवाद

निःसंदेह, मुसलमान पुरुष और मुसलमान स्त्रियाँ, ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्रियाँ, आज्ञाकारी पुरुष और आज्ञाकारिणी स्त्रियाँ, सच्चे पुरुष तथा सच्ची स्त्रियाँ, सहनशील पुरुष और सहनशील स्त्रियाँ, विनीत पुरुष और विनीत स्त्रियाँ, दानशील पुरुष और दानशील स्त्रियाँ, रोज़ा रखने वाले पुरुष और रोज़ा रखने वाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले पुरुष तथा रक्षा करने वाली स्त्रियाँ तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करने वाले पुरुष और याद करने वाली स्त्रियाँ, तैयार कर रखा है अल्लाह ने इन्हीं के लिए क्षमा तथा महान प्रतिफल।[1]
1. इस आयत में मुसलमान पुरुष तथा स्त्री को समान अधिकार दिये गये हैं। विशेष रूप से अल्लाह की वंदना में तथा दोनों का प्रतिफल भी एक बताया गया है जो इस्लाम धर्म की विशेष्ताओं में से एक है।

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وَمَا كَانَ لِمُؤْمِنٍ وَلَا مُؤْمِنَةٍ إِذَا قَضَى ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥٓ أَمْرًا أَن يَكُونَ لَهُمُ ٱلْخِيَرَةُ مِنْ أَمْرِهِمْ وَمَن يَعْصِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَٰلًا مُّبِينًا ﴾ 36 ﴿

Transliteration

व मा का-न लिमुअ्मिनिंव्-व ला मुअ्मि-नतिन् इज़ा क़ज़ल्लाहु व रसूलुहू अम्रन् अंय्यकू-न लहुमुल्-ख़ि-य-रतु मिन् अम्रिहिम्, व मंय्यअ्सिल्ला-ह व रसूलहू फ़-क़द् ज़ल्-ल ज़लालम् – मुबीन

हिंदी अनुवाद

तथा किसी ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्री के लिए योग्य नहीं कि जब निर्णय कर दे अल्लाह तथा उसके रसूल किसी बात का, तो उनके लिए अधिकार रह जाये अपने विषय में और जो अवज्ञा करेगा अल्लाह एवं उसके रसूल की, तो वह खुले कुपथ में[1] पड़ गया।
1. ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मेरी पूरी उम्मत स्वर्ग में जायेगी किन्तु जो इन्कार करे। कहा गया कि कौन इन्कार करेगा, हे अल्लाह के रसूल? आप ने कहाः जिस ने मेरी बात मानी वह स्वर्ग में जायेगा और जिस ने नहीं मानी तो उस ने इन्कार किया। (सहीह़ बुखारीः 2780)

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وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِىٓ أَنْعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَٱتَّقِ ٱللَّهَ وَتُخْفِى فِى نَفْسِكَ مَا ٱللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى ٱلنَّاسَ وَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَىٰهُ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَرًا زَوَّجْنَٰكَهَا لِكَىْ لَا يَكُونَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِىٓ أَزْوَٰجِ أَدْعِيَآئِهِمْ إِذَا قَضَوْا۟ مِنْهُنَّ وَطَرًا وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ مَفْعُولًا ﴾ 37 ﴿

Transliteration

व इज़् तक़ूलु लिल्लज़ी अन्-अ़मल्लाहु अ़लैहि व अन्अ़म्-त अ़लैहि अम्सिक् अ़लै-क ज़ौ-ज-क वत्तक़िल्ला-ह व तुख़्फ़ी फ़ी नफ़्सि-क मल्लाहु मुब्दीहि व तख़्शन्ना-स वल्लाहु अ-हक़्क़ु अन् तख़्शाहु, फ़-लम्मा क़ज़ा ज़ैदुम्-मिन्हा व-तरन् ज़व्वज्ना-क-हा लिकैला यकू-न अ़लल्-मुअ्मिनी-न ह-रजुन् फ़ी अज़्वाजि अद्अिया-इहिम् इज़ा क़ज़ौ मिन्हुन्-न व-तरन्, व का-न अम्-रुल्लाहि मफ़्अूला

हिंदी अनुवाद

तथा (हे नबी!) आप वह समय याद करें, जब आप उससे कह रहे थे, उपकार किया अल्लाह ने जिसपर तथा आपने उपकार किया जिसपर, रोक ले अपनी पत्नी को तथा अल्लाह से डर और आप छुपा रहे थे अपने मन में जिसे, अल्लाह उजागर करने वाला[1] था तथा डर रहे थे तुम लोगों से, जबकि अल्लाह अधिक योग्य था कि उससे डरते, तो जब ज़ैद ने पूरी करली उस (स्त्री) से अपनी आवश्यक्ता, तो हमने विवाह दिया उसे आपसे, ताकि ईमान वालों पर कोई दोष न रहे, अपने मुँह बोले पुत्रों की पत्नियों कि विषय[2] में, जब वह पूरी करलें उनसे अपनी आवश्यक्ता तथा अल्लाह का आदेश पूरा होकर रहा।
1. ह़दीस में है कि यह आयत ज़ैनब बिन्ते जह्श तथा (उस के पति) ज़ैद बिन ह़ारिसा के बारे में उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्याः4787) ज़ैद बिन ह़ारिसा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दास थे। आप ने उन्हें मुक्त कर के अपना पुत्र बना लिया। और ज़ैनब से विवाह दिया। परन्तु दोनों में निभाव न हो सका। और ज़ैद ने अपनी पत्नी को तलाक़ दे दी। और जब मुँह बोले पुत्र की परम्परा को तोड़ दिया गया तो इसे पुर्ण्तः खण्डित करने के लिये आप को ज़ैनब से आकाशीय आदेश द्वारा विवाह दिया गया। इस आयत में उसी की ओर संकेत है। (इब्ने कसीर) 2. अर्थात उन से विवाह करने में जब वह उन्हें तलाक़ दे दें। क्यों कि जाहिली समय में मुँह बोले पुत्र की पत्नी से विवाह वैसे ही निषेध था जैसे सगे पुत्र की पत्नी से। अल्लाह ने इस नियम को तोड़ने के लिये नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का विवाह अपने मुँह बोले पुत्र की पत्नी से कराया। ताकि मुसलमानों को इस से शिक्षा मिले कि ऐसा करने में कोई दोष नहीं है।

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مَّا كَانَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ مِنْ حَرَجٍ فِيمَا فَرَضَ ٱللَّهُ لَهُۥ سُنَّةَ ٱللَّهِ فِى ٱلَّذِينَ خَلَوْا۟ مِن قَبْلُ وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ قَدَرًا مَّقْدُورًا ﴾ 38 ﴿

Transliteration

मा का-न अ़लन्नबिय्यि मिन् ह-रजिन् फीमा फ़-रज़ल्लाहु लहू, सुन्नतल्लाहि फिल्लज़ी-न ख़लौ मिन् क़ब्लु, व का-न अमूरुल्लाहि क़-दरम् मक़्दूरा

हिंदी अनुवाद

नहीं है नबी पर कोई तंगी उसमें जिसका आदेश दिया है अल्लाह ने उनके लिए।[1] अल्लाह का यही नियम रहा है उन नबियों में, जो हुए हैं आपसे पहले तथा अल्लाह का निश्चित किया आदेश पूरा होना ही है।
1. अर्थात अपने मुँह बोले पुत्र की पत्नी से उस के तलाक़ देने के पश्चात् विवाह करने में।

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ٱلَّذِينَ يُبَلِّغُونَ رِسَٰلَٰتِ ٱللَّهِ وَيَخْشَوْنَهُۥ وَلَا يَخْشَوْنَ أَحَدًا إِلَّا ٱللَّهَ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ حَسِيبًا ﴾ 39 ﴿

Transliteration

अल्लज़ी-न युबल्लिग़ू-न रिसालातिल्लाहि व यख़्शैनहू व ला यख़्शौ-न अ-हदन् इल्लल्ला-ह, व कफ़ा बिल्लाहि हसीबा

हिंदी अनुवाद

जो पहुँचाते हैं अल्लाह के आदेश तथा उससे डरते हैं, वे नहीं डरते हैं किसी से, उसके सिवा और पर्याप्त है अल्लाह ह़िसाब लेने के लिए।

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مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَآ أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ ٱللَّهِ وَخَاتَمَ ٱلنَّبِيِّۦنَ وَكَانَ ٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًا ﴾ 40 ﴿

Transliteration

मा का न मुहम्मदुन् अबा अ-हदिम्-मिर्रिजालिकुम् व लाकिर्रसूलल्लाहि व ख़ा-तमन्- नबिय्यी-न, व कानल्लाहु बिकुल्लि शैइन् अ़लीमा

हिंदी अनुवाद

मुह़म्मद तुम्हारे पुरुषों मेंसे किसी के पिता नहीं हैं। किन्तु, वे[1] अल्लाह के रसूल और सब नबियों में अन्तिम[2] हैं और अल्लाह प्रत्येक वस्तु का अति ज्ञानी है।
1. अर्थात आप ज़ैद के पिता नहीं हैं। उस के वास्तविक पिता ह़ारिसा हैं। 2. अर्थात अब आप के पश्चात् प्रलय तक कोई नबी नहीं आयेगा। आप ही संसार के अन्तिम रसूल हैं। ह़दीस में है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मेरी मिसाल तथा नबियों का उदाहरण ऐसा है जैसे किसी ने एक सुन्दर भवन बनाया। और एक ईंट की जगह छोड़ दी। तो उसे देख कर लोग आश्चर्य करने लगे कि इस में एक ईंट की जगह के सिवा कोई कमी नहीं थी। तो मैं वह ईंट हूँ। मैं ने उस ईंट की जगह भर दी। और भवन पूरा हो गया। और मेरे द्वारा नबियों की कड़ी का अन्त कर दिया गया। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्याः 3535, सह़ीह़ मुस्लिमः2286)

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا ﴾ 41 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनुज़्कुरुल्ला-ह ज़िक्रन् कसीरा

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! याद करते रहो अल्लाह को, अत्यधिक।[1]
1. अपने मुखों, कर्मों तथा दिलों से नमाज़ों के पश्चात् तथा अन्य समय में। ह़दीस में है कि जो अल्लाह को याद करता हो और जो याद न करता हो दोनों में वही अन्तर है जो जीवित तथा मरे हुये में है। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्याः 6407, मुस्लिमः 779)

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وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا ﴾ 42 ﴿

Transliteration

व सब्बिहूहु बुक्र-तंव्-व असीला

हिंदी अनुवाद

तथा पवित्रता बयान करते रहो उसकी प्रातः तथा संध्या।

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هُوَ ٱلَّذِى يُصَلِّى عَلَيْكُمْ وَمَلَٰٓئِكَتُهُۥ لِيُخْرِجَكُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ وَكَانَ بِٱلْمُؤْمِنِينَ رَحِيمًا ﴾ 43 ﴿

Transliteration

हुवल्लज़ी युसल्ली अ़लैकुम् व मलाइ कतुहू लियुख़् रि-जकुम् मिनज़्ज़ुलुमाति इलन्नूरि, व का-न बिल्मुअ्मिनी-न रहीमा

हिंदी अनुवाद

वही है, जो दया कर रहा है तुमपर तथा प्रार्थना कर रहे हैं (तुम्हारे लिए) उसके फ़रिश्ते। ताकि वह निकाल दे तुम्हें अंधेरों से, प्रकाश[1] की ओर तथा ईमान वालों पर अत्यंत दयावान् है।
1. अर्थात अज्ञानता तथा कुपथ से, इस्लाम के प्रकाश की ओर।

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تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُۥ سَلَٰمٌ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا ﴾ 44 ﴿

Transliteration

तहिय्यतुहुम् यौ-म यत्क़ौनहू सलामुन् व अ-अ़द्-द लहुम् अज्रन् करीमा

हिंदी अनुवाद

उनका स्वागत, जिस दिन उससे मिलेंगे, सलाम से होगा और उसने तैयार कर रखा है उनके लिए सम्मानित प्रतिफल।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِنَّآ أَرْسَلْنَٰكَ شَٰهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا ﴾ 45 ﴿

Transliteration

या अय्युहन्नबिय्यु इन्ना अर्सल्ना-क शाहिदंव्-व मुबश्शिरंव्-व नज़ीरा

हिंदी अनुवाद

हे नबी! हमने भेजा है आपको साक्षी,[1] शुभसूचक[2] और सचेतकर्ता[3] बनाकर।
1. अर्थात लोगों को अल्लाह का उपदेश पहुँचाने का साक्षी। (देखियेः सूरह बक़रा, आयतः 143, तथा सूरह निसा, आयतः 41) 2. अल्लाह की दया तथा स्वर्ग का, आज्ञाकारियों के लिये। 3. अल्लाह की यातना तथा नरक से, अवैज्ञाकारीयों के लिये।

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وَدَاعِيًا إِلَى ٱللَّهِ بِإِذْنِهِۦ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا ﴾ 46 ﴿

Transliteration

व दाअि-यन् इलल्लाहि बि-इज़्निही व सिराजम्-मुनीरा

हिंदी अनुवाद

तथा बुलाने वाला बनाकर अल्लाह की ओर उसकी अनुमति से तथा प्रकाशित प्रदीप बनाकर।[1]
1. इस आयत में यह संकेत है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दिव्य प्रदीप के समान पूरे मानव विश्व को सत्य के प्रकाश से जो एकेश्वरवाद तथा एक अल्लाह की इबादत (वंदना) है प्रकाशित करने के लिये आये हैं। और यही आप की विशेषता है कि आप किसी जाति या देश अथवा वर्ण-वर्ग के लिये नहीं आये हैं। और अब प्रलय तक सत्य का प्रकाश आप ही के अनुसरण से प्राप्त हो सकता है।

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وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ بِأَنَّ لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ فَضْلًا كَبِيرًا ﴾ 47 ﴿

Transliteration

व बश्शिरिल्-मुअ्मिनी-न बिअन्-न लहुम् मिनल्लाहि फ़ज़्लन् कबीरा

हिंदी अनुवाद

तथा आप शुभ सूचना सुना दें ईमान वालों को कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ा अनुग्रह है।

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وَلَا تُطِعِ ٱلْكَٰفِرِينَ وَٱلْمُنَٰفِقِينَ وَدَعْ أَذَىٰهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًا ﴾ 48 ﴿

Transliteration

व ला तुतिअिल्-काफ़िरी-न वल्-मुनाफ़िक़ी-न व दअ् अज़ाहुम् व तवक्कल् अ़लल्लाहि, व कफ़ा बिल्लाहि वकीला

हिंदी अनुवाद

तथा न बात मानें काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की तथा न चिन्ता करें उनके दुःख पहुँचाने की और भरोसा करें अल्लाह पर तथा पर्याप्त है अल्लाह काम बनाने के लिए।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نَكَحْتُمُ ٱلْمُؤْمِنَٰتِ ثُمَّ طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ فَمَا لَكُمْ عَلَيْهِنَّ مِنْ عِدَّةٍ تَعْتَدُّونَهَا فَمَتِّعُوهُنَّ وَسَرِّحُوهُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا ﴾ 49 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनू इज़ा नकह्तुमुल् मुअ्मिनाति सुम्-म तल्लक़्तुमूहुन्-न मिन् क़ब्लि अन् तमस्सूहुन्-न फ़मा लकुम् अ़लैहिन्-न मिन् अिद्दतिन् तअ्तद्दूनहा फ़-मत्तिअूहुन्-न व सर्रिहू- हुन्-न सराहन् जमीला

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! जब तुम विवाह करो ईमान वालियों से, फिर तलाक़ दो उन्हें, इससे पूर्व कि हाथ लगाओ उनको, तो नहीं है तुम्हारे लिए उनपर कोई इद्दत,[1] जिसकी तुम गणना करो। तो तुम उन्हें कुछ लाभ पहुँचाओ और उन्हें विदा करो भलाई के साथ।
1. अर्थात तलाक़ के पश्चात की निर्धारित अवधि जिस के भीतर दूसरे से विवाह करने की अनुमति नहीं है।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِنَّآ أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَٰجَكَ ٱلَّٰتِىٓ ءَاتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّآ أَفَآءَ ٱللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّٰتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَٰلَٰتِكَ ٱلَّٰتِى هَاجَرْنَ مَعَكَ وَٱمْرَأَةً مُّؤْمِنَةً إِن وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِىِّ إِنْ أَرَادَ ٱلنَّبِىُّ أَن يَسْتَنكِحَهَا خَالِصَةً لَّكَ مِن دُونِ ٱلْمُؤْمِنِينَ قَدْ عَلِمْنَا مَا فَرَضْنَا عَلَيْهِمْ فِىٓ أَزْوَٰجِهِمْ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُهُمْ لِكَيْلَا يَكُونَ عَلَيْكَ حَرَجٌ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ﴾ 50 ﴿

Transliteration

या अय्युहन्-नबिय्यु इन्ना अह्लल्ना ल-क अज़्वा-जकल्लाती आतै-त उजू-रहुन्-न व मा म-लकत् यमीनु-क मिम्मा अफ़ाअल्लाहु अ़लै-क व बनाति अ़म्मिक व बनाति अ़म्माति-क व बनाति ख़ालि-क व बनाति ख़ालातिकल्- लाती हाजर्-न म-अ़-क वम्-र-अतम् मुअ्मि नतन् इंव्व-हबत् नफ़्सहा लिन्नबिय्यि इन् अरादन्नबिय्यु अंय्यस्तन्कि-हहा, ख़ालि-सतल् ल-क मिन् दूनिल्-मुअ्मिनी-न, क़द् अ़लिम्ना मा फ़रज़्ना अ़लैहिम् फ़ी अज़्वाजिहिम् व मा म-लकत् ऐमानुहुम् लिकैला यकू-न अ़लै-क ह-रजुन्, व कानल्लाहु ग़फ़ूरर्-रहीमा

हिंदी अनुवाद

हे नबी! हमने ह़लाल (वैध) कर दिया है आपके लिए आपकी पत्नियों को, जिन्हें चुका दिया हो आपने उनका महर (विवाह उपहार) तथा जो आपके स्वामित्व में हो, उसमें से, जो प्रदान किया है अल्लाह ने आप[1] को तथा आपके चाचा की पुत्रियों, आपकी फूफी की पुत्रियों, आपके मामा की पुत्रियों तथा मौसी की पुत्रियों को, जिन्होंने हिजरत की है आपके साथ तथा किसी भी ईमान वाली नारी को, यदि वह स्वयं को दान कर दे नबी के लिए, यदि नबी चाहें कि उससे विवाह कर लें। ये विशेष है आपके लिए अन्य ईमान वालो को छोड़कर। हमें ज्ञान है उसका, जो हमने अनिवार्य किया है उनपर, उनकी पत्नियों तथा उनके स्वामित्व में आयी दासियों के सम्बंध[2] में। ताकि तुमपर कोई संकीर्णता (तंगी) न हो और अल्लाह अति क्षमी, दयावान् है।
1. अर्थात वह दासियाँ जो युध्द में आप के हाथ आई हों। 2. अर्थात यह कि चार पत्नियों से अधिक न रखो तथा महर (विवाह उपहार) और विवाह के समय दो साक्षी बनाना और दासियों के लिये चार का प्रतिबंध न होना एवं सब का भरण-पोषण और सब के साथ अच्छा व्यवहार करना इत्यादि।

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تُرْجِى مَن تَشَآءُ مِنْهُنَّ وَتُـْٔوِىٓ إِلَيْكَ مَن تَشَآءُ وَمَنِ ٱبْتَغَيْتَ مِمَّنْ عَزَلْتَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكَ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰٓ أَن تَقَرَّ أَعْيُنُهُنَّ وَلَا يَحْزَنَّ وَيَرْضَيْنَ بِمَآ ءَاتَيْتَهُنَّ كُلُّهُنَّ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ مَا فِى قُلُوبِكُمْ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَلِيمًا ﴾ 51 ﴿

Transliteration

तुर्जी मन् तशा-उ मिन्हुन्-न व तुअ्वी इलै-क मन् तशा-उ, व मनिब्तग़ै-त मिम्मन् अ़ज़ल्-त फ़ला जुना-ह अ़लै-क, ज़ालि-क अद्ना अन् तक़र्-र अअ्युनुहुन्-न व ला यह्ज़न्-न व यर्-ज़ै-न बिमा आतै-तहुन्-न कुल्लुहुन्न, वल्लाहु यअ्लमु मा फ़ी क़ुलूबिकुम्, व कानल्लाहु अ़लीमन् हलीमा

हिंदी अनुवाद

(आपको अधिकार है कि) जिसे आप चाहें, अलग रखें अपनी पत्नियों में से और अपने साथ रखें, जिसे चाहें और जिसे आप चाहें, बुला लें उनमें से, जिन्हें अलग किया है। आपपर कोई दोष नहीं है। इस प्रकार, अधिक आशा है कि उनकी आँखें शीतल हों और वे उदासीन न हों तथा प्रसन्न रहें उससे, जो आप उनसब को दें और अल्लाह जानता है जो तुम्हारे दिलों[1] में है और अल्लाह अति ज्ञानी, सहनशील[2] है।
1. अर्था किसी एक पत्नी में रूचि। 2. इसी लिये तुरंत यातना नहीं देता।

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لَّا يَحِلُّ لَكَ ٱلنِّسَآءُ مِنۢ بَعْدُ وَلَآ أَن تَبَدَّلَ بِهِنَّ مِنْ أَزْوَٰجٍ وَلَوْ أَعْجَبَكَ حُسْنُهُنَّ إِلَّا مَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ رَّقِيبًا ﴾ 52 ﴿

Transliteration

ला यहिल्लु लकन्निसा-उ मिम्बअ्दु व ला अन् तबद्द-ल बिहिन्-न मिन् अज़्वाजिंव्-व लौ अअ्-ज-ब-क हुस्नुहुन् न इल्ला मा म-लकत् यमीनु-क, व कानल्लाहु अ़ला कुल्लि शैइर्-रक़ीबा *

हिंदी अनुवाद

(हे नबी!) नहीं ह़लाल (वैध) हैं आपके लिए पत्नियाँ इसके पश्चात् और न ये कि आप बदलें उन्हें दूसरी पत्नियों[1] से, यद्यपि आपको भाये उनका सौन्दर्य। परन्तु, जो दासी आपके स्वामित्व में आ जाये तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु का पूर्ण रक्षक है।
1. अर्थात उन में से किसी को छोड़ कर उस के स्थान पर किसी दूसरी स्त्री से विवाह करें।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَدْخُلُوا۟ بُيُوتَ ٱلنَّبِىِّ إِلَّآ أَن يُؤْذَنَ لَكُمْ إِلَىٰ طَعَامٍ غَيْرَ نَٰظِرِينَ إِنَىٰهُ وَلَٰكِنْ إِذَا دُعِيتُمْ فَٱدْخُلُوا۟ فَإِذَا طَعِمْتُمْ فَٱنتَشِرُوا۟ وَلَا مُسْتَـْٔنِسِينَ لِحَدِيثٍ إِنَّ ذَٰلِكُمْ كَانَ يُؤْذِى ٱلنَّبِىَّ فَيَسْتَحْىِۦ مِنكُمْ وَٱللَّهُ لَا يَسْتَحْىِۦ مِنَ ٱلْحَقِّ وَإِذَا سَأَلْتُمُوهُنَّ مَتَٰعًا فَسْـَٔلُوهُنَّ مِن وَرَآءِ حِجَابٍ ذَٰلِكُمْ أَطْهَرُ لِقُلُوبِكُمْ وَقُلُوبِهِنَّ وَمَا كَانَ لَكُمْ أَن تُؤْذُوا۟ رَسُولَ ٱللَّهِ وَلَآ أَن تَنكِحُوٓا۟ أَزْوَٰجَهُۥ مِنۢ بَعْدِهِۦٓ أَبَدًا إِنَّ ذَٰلِكُمْ كَانَ عِندَ ٱللَّهِ عَظِيمًا ﴾ 53 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनू ला तद्ख़ुलू बुयूतन्नबिय्यि इल्ला अंय्युअ्-ज़-न लकुम् इला तआ़मिन् ग़ै-र नाज़िरी-न इनाहु व लाकिन् इज़ा दुअीतुम् फ़द्ख़ुलू फ़-इज़ा तअिम्तुम् फ़न्तशिरू व ला मुस्तअ्निसी-न लि-हदीसिन्, इन्-न ज़ालिकुम् का-न युअ्ज़िन्नबिय्-य फ़-यस्तह्यी मिन्कुम् वल्लाहु ला यस्तह्यी मिनल्-हक़्क़ि, व इज़ा सअल्तुमूहुन्-न मताअ़न् फ़स्अलूहुन्-न मिंव्वरा-इ हिजाबिन्, ज़ालिकुम् अत्हरु लिक़ुलूबिकुम् व क़ुलूबिहिन्-न, व मा का-न लकुम् अन् तुअ्ज़ू रसूलल्लाहि व ला अन् तन्किहू अज़्वाजहू मिम्बअ्दिही अ-बदन्, इन्- न ज़ालिकुम् का-न अिन्दल्लाहि अ़ज़ीमा

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! मत प्रवेश करो नबी के घरों में, परन्तु ये कि अनुमति दी जाये तुम्हें भोज के लिए, परन्तु, भोजन पकने की प्रतीक्षा न करते रहो। किन्तु, जब तुम बुलाये जाओ, तो प्रवेश करो, फिर जब भोजन करलो, तो निकल जाओ। लीन न रहो बातों में। वास्तव में, इससे नबी को दुःख होता है, अतः, वह तुमसे लजाते हैं और अल्लाह नहीं लजाता है सत्य[1] से तथा जबतुम नबी की पत्नियों से कुछ माँगो, तो पर्दे के पीछे से माँगो, ये अधिक पवित्रता का कारण है तुम्हारे दिलों तथा उनके दिलों के लिए और तुम्हारे लिए उचित नहीं है कि नबी को दुःख दो, न ये कि विवाह करो उनकी पत्नियों से, आपके पश्चात् कभी भी। वास्तव में, ये अल्लाह के समीप महा (पाप) है।
1. इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ सभ्य व्यवहार करने की शिक्षा दी जा रही है। हुआ यह है जब आप ने ज़ैनब से विवाह किया तो भोजन बनवाया और कुछ लोगों को आमंत्रित किया। कुछ लोग भोजन कर के वहीं बातें करने लगे जिस से आप को दुःख पहुँचा। इसी पर यह आयत उतरी। फिर पर्दे का आदेश दे दिया गया। (सह़ीह़ बुख़ारी ह़दीस संख्याः4792)

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إِن تُبْدُوا۟ شَيْـًٔا أَوْ تُخْفُوهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًا ﴾ 54 ﴿

Transliteration

इन् तुब्दू शैअन् औ तुख़्फ़ूहु फ़-इन्नल्ला-ह का-न बिकुल्लि शैइन् अ़लीमा

हिंदी अनुवाद

यदि तुम कुछ बोलो अथवा उसे मन में रखो, तो अल्लाह प्रत्येक वस्तु का अत्यंत ज्ञानी है।

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لَّا جُنَاحَ عَلَيْهِنَّ فِىٓ ءَابَآئِهِنَّ وَلَآ أَبْنَآئِهِنَّ وَلَآ إِخْوَٰنِهِنَّ وَلَآ أَبْنَآءِ إِخْوَٰنِهِنَّ وَلَآ أَبْنَآءِ أَخَوَٰتِهِنَّ وَلَا نِسَآئِهِنَّ وَلَا مَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُهُنَّ وَٱتَّقِينَ ٱللَّهَ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ شَهِيدًا ﴾ 55 ﴿

Transliteration

ला जुना-ह अ़लैहिन्-न फ़ी आबा- इहिन्-न व ला इख़्वानिहिन्-न व ला अब्ना-इ इख़्वानिहिन्-न व ला अब्ना-इ अ-ख़वातिहिन्-न व ला निसा-इहिन्-न व ला मा म-लकत् ऐमानुहुन् न वत्तक़ीनल्ला-ह, इन्नल्ला-ह का न अ़ला कुल्लि शैइन् शहीदा

हिंदी अनुवाद

कोई दोष नहीं है उन (स्त्रियों) पर अपने पिताओं, न अपने पुत्रों, न अपने भाईयों, न अपने भतीजों, न अपनी (मेल-जोल की) स्त्रियों और न अपने स्वामित्व (दासी तथा दास) के सामने होने में, यदि वे अल्लाह से डरती रहें। वास्तव में, अल्लाह प्रत्येक वस्तु पर साक्षी है।

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إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا ﴾ 56 ﴿

Transliteration

इन्नल्ला-ह व मलाइ-क-तहू युसल्लू-न अ़लन्नबिय्यि, या अय्युहल्लज़ी-न आमनू सल्लू अ़लैहि व सल्लिमू तस्लीमा

हिंदी अनुवाद

अल्लाह तथा उसके फ़रिश्ते दरूद[1] भेजते हैं नबी पर। हे ईमान वालो! उनपर दरूद तथा बहुत सलाम भेजो।
1. अल्लाह के दरूद भेजने का अर्थ यह है कि फ़रिश्तों के समक्ष आप की प्रशंसा करता है। तथा आप पर अपनी दया भेजता है। और फ़रिश्तों के दरूद भेजने का अर्थ यह है कि वह आप के लिये अल्लाह से दया की प्रार्थना करते हैं। ह़दीस में आता है कि आप से प्रश्न किया गया कि हम सलाम तो जानते हैं पर आप पर दरूद कैसे भेजें? तो आप ने फ़रमायाः यह कहोः ((अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुह़म्मद व अला आलि मुह़म्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीम, व अला आलि इब्राहीम, इन्नका ह़मीदुम मजीद। अल्लाहुम्मा बारिक अला मुह़म्मद व अला आलि मुह़म्मद, कमा बारकता अला इब्राहीम, व अला आलि इब्राहीम, इन्नका ह़मीदुम मजीद।)) (सह़ीह़ वुख़ारीः4797) दूसरी ह़दीस में है किः जो मुझ पर एक बार दरूद भेजेगा अल्लाह उस पर दस बार दया भेजता है। (सह़ीह़ मुस्लिमः408)

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إِنَّ ٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُّهِينًا ﴾ 57 ﴿

Transliteration

इन्नल्लज़ी-न युअ्जूनल्ला-ह व रसूलहू ल-अ़-नहुमुल्लाहु फ़िद्-दुन्या वल्-आख़िरति व अ-अ़द्-द लहुम् अ़ज़ाबम् – मुहीना

हिंदी अनुवाद

जो लोग दुःख देते हैं अल्लाह तथा उसके रसूल को, तो अल्लाह ने उन्हें धिक्कार दिया है लोक तथा परलोक में और तैयार की है उनके लिए अपमानकारी यातना।

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وَٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ بِغَيْرِ مَا ٱكْتَسَبُوا۟ فَقَدِ ٱحْتَمَلُوا۟ بُهْتَٰنًا وَإِثْمًا مُّبِينًا ﴾ 58 ﴿

Transliteration

वल्लज़ी-न युअ्ज़ूनल्-मुअ्मिनी-न वल्मुअ्मिनाति बिग़ैरि मक्त-सबू फ़-क़दिस्त-मलू बुह्तानंव्-व इस्मम्-मुबीना

हिंदी अनुवाद

और जो दुःख देते हैं ईमान वालों तथा ईमान वालियों को, बिना किसी दोष के, जो उन्होंने किया हो, तो उन्होंने लाद लिया आरोप तथा खुले पाप को।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ قُل لِّأَزْوَٰجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَآءِ ٱلْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَٰبِيبِهِنَّ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰٓ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ﴾ 59 ﴿

Transliteration

या अय्युहन्नबिय्यु क़ुल् लि-अज़्वाजि-क व बनाति-क व निसाइल्-मुअ्मिनी-न युद्नी-न अ़लैहिन्-न मिन् जलाबीबिहिन्-न, ज़ालि-क अद्ना अंय्युअ्-रफ़्-न फ़ला युअ्ज़ै-न, व कानल्लाहु ग़फ़ूरर्रहीमा

हिंदी अनुवाद

हे नबी! कह दो अपनी पत्नियों, अपनी पुत्रियों और ईमान वालों की स्त्रियों से कि डाल लिया करें अपने ऊपर अपनी चादरें। ये अधिक समीप है कि वे पहचान ली जायें। फिर उन्हें दुःख न दिया[1] जाये और अल्लाह अति क्षमि, दयावान् है।
1. इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नियों तथा पुत्रियों और साधारण मुस्लिम महिलाओं को यह आदेश दिया गया है कि घर से निकलें तो पर्दे के साथ निकलें। जिस का लाभ यह है कि इस से एक सम्मानित तथा सभ्य महिला की असभ्य तथा कुकर्मी महिला से पहचान होगी और कोई उस से छेड़ छाड़ का साहस नहीं करेगा।

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لَّئِن لَّمْ يَنتَهِ ٱلْمُنَٰفِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْمُرْجِفُونَ فِى ٱلْمَدِينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ فِيهَآ إِلَّا قَلِيلًا ﴾ 60 ﴿

Transliteration

ल- इल्लम् यन्तहिल्- मुनाफ़िक़ू-न वल्लज़ी-न फ़ी क़ुलूबिहिम् म- रजुंव्वल्- मुर्जिफ़ू-न फ़िल्मदी-नति ल-नुग़्रियन्न-क सुम्-म ला युजाविरू-न-क फ़ीहा इल्ला क़लीला

हिंदी अनुवाद

यदि न रुके मुनाफ़िक़[1] तथा जिनके दिलों में रोग है और मदीना में अफ़्वाह फैलाने वाले, तो हम आपको भड़का देंगे उनपर। फिर वे आपके साथ नहीं रह सकेंगे उसमें, परन्तु कुछ ही दिन।
1. मुश्रिक (द्विधावादी) मुसलमानों को हताश करने के लिये कभी मुसलमानों की पराजय और कभी किसी भारी सेना के आक्रमण की अफ़्वाह मदीना में फैला दिया करते थे। जिस के दुष्परिणाम से उन्हें सावधान किया गया है।

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مَّلْعُونِينَ أَيْنَمَا ثُقِفُوٓا۟ أُخِذُوا۟ وَقُتِّلُوا۟ تَقْتِيلًا ﴾ 61 ﴿

Transliteration

मल्अूनी-न ऐ-नमा सुक़िफ़ू उख़िज़ू व क़ुत्तिलू तक़्तीला

हिंदी अनुवाद

धिक्कारे हुए। वे जहाँ पाये जायें, पकड़ लिए जायेंगे तथा जान से मार दिये जायेंगे।

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سُنَّةَ ٱللَّهِ فِى ٱلَّذِينَ خَلَوْا۟ مِن قَبْلُ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ ٱللَّهِ تَبْدِيلًا ﴾ 62 ﴿

Transliteration

सुन्नतल्लाहि फ़िल्लज़ी-न ख़लौ मिन् क़ब्लु व लन् तजि-द लिसुन्नतिल्लाहि तब्दीला

हिंदी अनुवाद

यही अल्लाह का नियम रहा है उनमें, जो इनसे पूर्व रहे तथा आप कदापि नहीं पायेंगे अल्लाह के नियम में कोई परिवर्तन।

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يَسْـَٔلُكَ ٱلنَّاسُ عَنِ ٱلسَّاعَةِ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ ٱللَّهِ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ ٱلسَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا ﴾ 63 ﴿

Transliteration

यस् अलुकन्नासु अ़निस्सा-अ़ति, क़ुल् इन्नमा अिल्मुहा अिन्दल्लाहि, व मा युद्री-क लअ़ल्लस्- सा-अ़-त तकूनु क़रीबा

हिंदी अनुवाद

प्रश्न करते हैं आपसे लोग[1] प्रलय विषय में। तो आप कह दें कि उसका ज्ञान तो अल्लाह ही को है। संभव है कि प्रलय समीप हो।
1. यह प्रश्न उपहास स्वरूप किया करते थे। इस लिये उस की दशा का चित्रण किया गया है।

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إِنَّ ٱللَّهَ لَعَنَ ٱلْكَٰفِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا ﴾ 64 ﴿

Transliteration

इन्नल्लाहा लअनल काफिरीना व अअद्दा लहुम सईरा

हिंदी अनुवाद

अल्लाह ने धिक्कार दिया है काफ़िरों को और तैयार कर रखी है, उनके लिए, दहकती अग्नि।

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خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًا لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا ﴾ 65 ﴿

Transliteration

ख़ालिदी-न फ़ीहा अ-बदन् ला यजिदू-न वलिय्यंव्-व ला नसीरा

हिंदी अनुवाद

वे सदावासी होंगे उसमें। नहीं पायेंगे कोई रक्षक और न कोई सहायक।

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يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِى ٱلنَّارِ يَقُولُونَ يَٰلَيْتَنَآ أَطَعْنَا ٱللَّهَ وَأَطَعْنَا ٱلرَّسُولَا۠ ﴾ 66 ﴿

Transliteration

यौ-म तुक़ल्लबु वुजूहुहुम् फ़िन्नारि यक़ूलू-न या लै-तना अतअ्नल्ला-ह व अतअ्नर्रसूला

हिंदी अनुवाद

जिस दिन उलट-पलट किये जायेंगे उनके मुख अग्नि में, वे कहेंगेः हमारे लिए क्या ही अच्छा होता कि हम कहा मानते अल्लाह का तथा कहा मानते रसूल का!

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وَقَالُوا۟ رَبَّنَآ إِنَّآ أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَآءَنَا فَأَضَلُّونَا ٱلسَّبِيلَا۠ ﴾ 67 ﴿

Transliteration

व क़ालू रब्बना इन्ना अतअ्ना सा-द-तना व कु-बरा-अना फ़-अज़ल्लूनस् – सबीला

हिंदी अनुवाद

तथा कहेंगेः हमारे पालनहार! हमने कहा माना अपने प्रमुखों एवं बड़ों का। तो उन्होंने हमें कुपथ कर दिया, सुपथ से।

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رَبَّنَآ ءَاتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ ٱلْعَذَابِ وَٱلْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا ﴾ 68 ﴿

Transliteration

रब्बना आतिहिम् ज़िअ्फ़ैनि मिनल्-अ़ज़ाबि वल्अ़न्हुम् लअ्नन् कबीरा

हिंदी अनुवाद

हमारे पालनहार! उन्हें दुगुनी यातना दे तथा उन्हें धिक्कार दे, बड़ी धिक्कार।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَكُونُوا۟ كَٱلَّذِينَ ءَاذَوْا۟ مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ ٱللَّهُ مِمَّا قَالُوا۟ وَكَانَ عِندَ ٱللَّهِ وَجِيهًا ﴾ 69 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनू ला तकूनू कल्लज़ी-न आज़ौ मूसा फ़-बर्र-अहुल्लाहु मिम्मा क़ालू, व का-न अिन्दल्लाहि वजीहा

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! न हो जाओ उनके समान जिन्होंने मूसा को दुःख दिया, तो अल्लाह ने निर्दोष कर दिया[1] उसे उनकी बनाई बातों से और वह था अल्लाह के समक्ष सम्मानित।
1. ह़दीस में आया है कि मूसा (अलैहिस्सलाम) बड़े लज्जशील थे। प्रत्येक समय वस्त्र धारण किये रहते थे। जिस से लोग समझने लगे कि संभवतः उन में कुछ रोग है। परन्तु अल्लाह ने एक बार उन्हें नग्न अवस्था में लोगों को दिखा दिया और संदेह दूर हो गया। (सह़ीह़ बुख़ारीः3404, मुस्लिमः 155)

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَقُولُوا۟ قَوْلًا سَدِيدًا ﴾ 70 ﴿

Transliteration

या अय्युहल्लज़ी-न आमनुत्तक़ुल्ला-ह व क़ूलू क़ौलन् सदीदा

हिंदी अनुवाद

हे ईमान वालो! अल्लाह से डरो तथा सही और सीधी बात बोलो।

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يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَٰلَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا ﴾ 71 ﴿

Transliteration

युस्लिहू लकुम् अअ्मा-लकुम् व यग़्फ़िर् लकुम् ज़ुनू-बकुम्, व मंय्युतिअिल्ला-ह व रसूलहू फ़-क़द् फ़ा-ज़ फ़ौज़न् अ़ज़ीमा

हिंदी अनुवाद

वह सुधार देगा तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्मों को तथा क्षमा कर देगा तुम्हारे पापों को और जो अनुपालन करेगा अल्लाह तथा उसके रसूल का, तो उसने बड़ी सफलता प्राप्त कर ली।

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إِنَّا عَرَضْنَا ٱلْأَمَانَةَ عَلَى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَٱلْجِبَالِ فَأَبَيْنَ أَن يَحْمِلْنَهَا وَأَشْفَقْنَ مِنْهَا وَحَمَلَهَا ٱلْإِنسَٰنُ إِنَّهُۥ كَانَ ظَلُومًا جَهُولًا ﴾ 72 ﴿

Transliteration

इन्ना अ़रज़्नल्-अमान-त अ़लस्-समावाति वल्अर्ज़ि वल्जिबालि फ़-अबै-न अंय्यह्मिल्नहा व अश्फ़क़ु-न मिन्हा व ह-म-लहल्-इन्सानु, इन्नहू का-न ज़लूमन् जहूला

हिंदी अनुवाद

हमने प्रस्तुत किया अमानत[1] को आकाशों, धरती एवं पर्वतों पर, तो उनसबने इन्कार कर दिया उसका भार उठाने से तथा डर गये उससे। किन्तु, उसका भार ले लिया मनुष्य ने। वास्तव में, वह बड़ा अत्याचारी,[2] अज्ञान है।
1. अमानत से अभिप्राय, धार्मिक नियम हैं जिन के पालन का दायित्व तथा भार अल्लाह ने मनुष्य पर रखा है। और उस में उन का पालन करने की योग्यता रखी है जो योग्यता आकाशों तथा धरती और पर्वतों को नहीं दी है। 2. अर्थात इस अमानत का भार ले कर भी अपने दायित्व को पूरा न कर के स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करता है।

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لِّيُعَذِّبَ ٱللَّهُ ٱلْمُنَٰفِقِينَ وَٱلْمُنَٰفِقَٰتِ وَٱلْمُشْرِكِينَ وَٱلْمُشْرِكَٰتِ وَيَتُوبَ ٱللَّهُ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَٰتِ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًۢا ﴾ 73 ﴿

Transliteration

लि-युअ़ज़्ज़िबल्लाहुल्-मुनाफ़िक़ी-न वल्-मुनाफ़िक़ाति वल्- मुश्रिकी-न वल्-मुश्रिकाति व यतूबल्लाहु अ़लल्-मुअ्मिनी-न वल्-मुअ्मिनाति, व कानल्लाहु ग़फ़ूरर्-रहीमा

हिंदी अनुवाद

( ये अमानत का भार इसलिए लिया है) ताकि अल्लाह दण्ड दे मुनाफ़िक़ पुरुष तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियों को और मुश्रिक पुरुष तथा स्त्रियों को तथा क्षमा कर दे अल्लाह ईमान वालों तथा ईमान वालियों को और अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।

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