सूरह तारिक के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है, इस में 17 आयतें हैं।
- इस के आरंभ में ((तारिक)) शब्द आया है जिस का अर्थ ((तारा)) है। इसी लिये इस का यह नाम रखा गया है। [1]
- इस की आयत 1 से 4 तक में आकाश तथा तारों की इस बात पर गवाही प्रस्तुत की गई है कि प्रत्येक व्यक्ति की निगरानी हो रही है और एक दिन उस को हिसाब के लिये लाया जायेगा।
- आयत 5 से 8 तक मनुष्य की उत्पत्ति को उस के दोबारा पैदा किये जाने का प्रमाण बनाया गया है। और आयत 9 से 10 तक में यह वर्णन है कि उस दिन सब भेद परखे जायेंगे और मनुष्य विवश और असहाय होगा।
- आयत 11 से 14 तक में इस बात पर आकाश तथा धरती की गवाही प्रस्तुत की गई है कि कुन जो प्रतिफल के दिन की सूचना दे रहा है वह अकाट्य है।
- अन्त में काफिरों को चेतावनी देते हुये नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दिलासा दी गई है कि उन की चालें एक दिन उन्हीं के लिये उलटी पड़ेंगी। उन्हें कुछ अवसर दे दो। उन का परिणाम सामने आने में देर नहीं।
सूरह अत-तारिक | Surah Tariq in Hindi
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम
अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।
وَالسَّمَاءِ وَالطَّارِقِ ﴾ 1 ﴿
वस समाइ वत तारिक
शपथ है आकाश तथा रात में "प्रकाश प्रदान करने वाले" की!
وَمَا أَدْرَاكَ مَا الطَّارِقُ ﴾ 2 ﴿
वमा अद राका मत तारिक
और तुम क्या जानो कि वह "रात में प्रकाश प्रदान करने वाला" क्या है?
إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ ﴾ 4 ﴿
इन कुल्लु नफ्सिल लम्मा अलैहा हाफ़िज़
प्रत्येक प्राणी पर एक रक्षक है।[1] 1. (1-4) इन में आकाश के तारों को इस बात की गवाही में लाया गया है कि विश्व की कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो एक रक्षक के बिना अपने स्थान पर स्थित रह सकती है, और वह रक्षक स्वयं अल्लाह है।
فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ مِمَّ خُلِقَ ﴾ 5 ﴿
फ़ल यनज़ुरिल इंसानु मिम्म खुलिक़
इन्सान, ये तो विचार करे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है?
خُلِقَ مِن مَّاءٍ دَافِقٍ ﴾ 6 ﴿
खुलिक़ा मिम माइन दाफ़िक़
उछलते पानी (वीर्य) से पैदा किया गया है।
يَخْرُجُ مِن بَيْنِ الصُّلْبِ وَالتَّرَائِبِ ﴾ 7 ﴿
यख़रुजू मिम बैनिस सुल्बि वत तरा..इब
जो पीठ तथा सीने के पंजरों के मध्स से निकलता है।
إِنَّهُ عَلَىٰ رَجْعِهِ لَقَادِرٌ ﴾ 8 ﴿
इन्नहू अला रजइही लक़ादिर
निश्चय वह, उसे लौटाने की शक्ति रखता है।[1] 1. (5-8) इन आयतों में इन्सान का ध्यान उस के अस्तित्व की ओर आकर्षित किया गया है कि वह विचार तो करे कि कैसे पैदा किया गया है वीर्य से? फिर उस की निरन्तर रक्षा कर रहा है। फिर वही उसे मृत्यु के पश्चात पुनः पैदा करने की शक्ति भी रखता है।
يَوْمَ تُبْلَى السَّرَائِرُ ﴾ 9 ﴿
यौमा तुब्लस सराइर
जिस दिन मन के भेद परखे जायेंगे।
فَمَا لَهُ مِن قُوَّةٍ وَلَا نَاصِرٍ ﴾ 10 ﴿
फ़मा लहू मिन क़ुव्वतिव वला नासिर
तो उसे न कोई बल होगा और न उसका कोई सहायक।[1] 1. (9-10) इन आयतों में यह बताया गया है कि फिर से पैदाइश इस लिये होगी ताकि इन्सान के सभी भेदों की जाँच की जाये जिन पर संसार में पर्दा पड़ा रह गया था और सब का बदला न्याय के साथ दिया जाये।
وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الرَّجْعِ ﴾ 11 ﴿
वस समाइ जातिर रजइ
शपथ है आकाश की, जो बरसता है!
وَالْأَرْضِ ذَاتِ الصَّدْعِ ﴾ 12 ﴿
वल अरदि जातिस सदअ
तथा फटने वाली धरती की।
إِنَّهُ لَقَوْلٌ فَصْلٌ ﴾ 13 ﴿
इन्नहू लक़ौलुन फ़स्ल
वास्तव में, ये (क़ुर्आन) दो-टूक निर्णय (फ़ैसला) करने वाला है।
وَمَا هُوَ بِالْهَزْلِ ﴾ 14 ﴿
वमा हुवा बिल हज्ल
हँसी की बात नहीं।[1] 1. (11-14) इन आयतों में बताया गया है कि आकाश से वर्षा का होना तथा धरती से पेड़ पौधों का उपजना कोई खेल नहीं एक गंभीर कर्म है। इसी प्रकार क़ुर्आन में जो तथ्य बताये गये हैं वह भी हँसी उपहास नहीं हैं पक्की और अडिग बातें हैं। काफ़िर (विश्वासहीन) इस भ्रम में न रहें कि उन की चालें इस क़ुर्आन की आमंत्रण को विफल कर देंगी। अल्लाह भी एक उपाय में लगा है जिस के आगे इन की चालें धरी रह जायेंगी।
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا ﴾ 15 ﴿
इन्नहुम यकीदूना कैदा
वह चाल बाज़ी करते हैं।
وَأَكِيدُ كَيْدًا ﴾ 16 ﴿
व अकीदु कैदा
मैं भी चाल बाज़ी कर रहा हूँ।
فَمَهِّلِ الْكَافِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًا ﴾ 17 ﴿
फ़मह हिलिल काफ़िरीना अमहिल हुम रुवैदा
अतः, काफ़िरों को कुछ थोड़ा अवसर दे दो।[1] 1. (15-17) इन आयतों में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सांत्वना तथा अधर्मियों को यह धमकी दे कर बात पूरी कर दी गई है कि आप तनिक सहन करें और विश्वासहीन को मनमानी कर लेने दें, कुछ ही देर होगी कि इन्हें अपने दुष्परिणाम का ज्ञान हो जायेगा। और इक्कीस वर्ष ही बीते थे कि पूरे मक्का और अरब द्वीप में इस्लाम का ध्वज लहराने लगा।