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कुरआन मजीद

Quran in Hindi

78. सूरह अल-नबा – 1-40

सूरह नबा के संक्षिप्त विषय

यह सूरह मक्की है. इस में 40 आयते हैं।

  • इस सूरह का नाम ((नबा)) है जिस का अर्थ हैः महत्व पूर्ण सूचना । जिस से अभिप्राय प्रलय तथा फिर से जीवित किये जाने की सूचना है। [1]
  • इस की आयत 1 से 5 तक में उन को चेतावनी दी गई है जो व्यामत का उपहास करते है कि वह समय दूर नहीं जब वह आ जायेगी और वह आवाह के सामने उपस्थित होंगे।
  • आयत 6 से 16 तक में अल्लाह की शक्ति की निशानियों बताई गई है। जो मरण के पश्चात् जीवन के होने का प्रमाण है और गवाही देती है
  • 1 इस सूरह में प्रलय (क्यामत) तथा परलोक (आखिरत) के विश्वास पर बल दिया गया है। तथा इन पर विश्वास करने और न करने का परिणाम बताया गया है। मक्का के बासी इस की हँसी उड़ाते थे। कोई कहता कि यह हो ही नहीं सकता। किसी को संदेह था। किसी का विचार था कि यदि ऐसा हुआ तो भी हमारे देवी देवता हमारी अभिस्तावना कर देंगे, जैसा कि आगामी आयतों से विद्धित होता है।
    “भारी सूचना” का अर्थः कुन द्वारा दी गई प्रलय और परलोक की सूचना है। प्रलय और परलोक पर विश्वास सत्य धर्म की मूल आस्था है। यदि प्रलय और परलोक पर विश्वास न हो तो धर्म का कोई महत्व नहीं रह जाता। क्योंकि जब कर्म का कोई फल ही न हो, और न कोई न्याय और प्रतिकार का दिन हो तो फिर सभी अपने स्वार्थ के लिये मनमानी करने के लिये आज़ाद होंगे, और अत्याचार तथा अन्याय के कारण पूरा मानव संसार नरक बन जायेगा।इन प्रश्नात्मक वाक्यों में प्रकृति द्वारा मानव जाति के प्रतिपालन जीवन रक्षा और सुख सुविधा की जिस व्यवस्था की चचर्चा की गई है उस पर विचार किया जाये तो इस का उत्तर यही होगा कि यह व्यवस्थापक के बिना नहीं हो सकती। और पूरी प्रकृति एक निर्धारित नियमानुसार काम कर रही है। तो जिस के लिये यह सब हो रहा है उस का भी कोई स्वाभाविक कर्तव्य अवश्य होगा जिस की पूछ होगी। जिस के लिये न्याय और प्रतिकार का दिन होना चाहिये जिस में सब को न्याय पूर्वक प्रतिकार दिया जाये। और जिस शक्ति ने यह सारी व्यवस्था की है उस दिन को निर्धारित करना भी उसी का काम है।कि प्रतिफल का दिन अनिवार्य है।
  • आयत 17 से 20 तक में बताया गया है कि प्रतिफल का दिन निश्चित समय पर होगा। उस दिन आकाश तथा धरती की व्यवस्था में भारी परिवर्तन हो जायेगा और सब मनुष्य अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।
  • आयत 21 से 36 तक में दुराचारियों के दुष्परिणाम तथा सदाचारियों के शुभपरिणाम को बताया है।
  • अन्तिम आयतों में अल्लाह के न्यायालय में उपस्थिति का चित्र दिखाया गया है और यह बताया गया है कि सिफारिश के बल पर कोई जवाबदेही से नहीं बच सकेगा।

सूरह अल-नबा | Surah Naba in Hindi

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम

अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है।

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عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ ﴾ 1 ﴿

Transliteration

अम्मा यतासा अ लून◌

हिंदी अनुवाद

वे आपस में किस विषय में प्रश्न कर रहे हैं?

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عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ ﴾ 2 ﴿

Transliteration

अनिन नबाअिल अज़ीम◌

हिंदी अनुवाद

बहुत बड़ी सूचना के विषय में।

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الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ ‎ ﴾ 3 ﴿

Transliteration

अल्लज़ी हुम फीहि मुख्तलिफून◌

हिंदी अनुवाद

जिसमें मतभेद कर रहे हैं।

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كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ﴾ 4 ﴿

Transliteration

कल्ला सा यअ ल मून◌

हिंदी अनुवाद

निश्चय वे जान लेंगे।

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ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ‎ ﴾ 5 ﴿

Transliteration

सुम्मा कल्ला सा यअ ल मून◌

हिंदी अनुवाद

फिर निश्चय वे जान लेंगे।[1] 1. (1-5) इन आयतों में उन को धिक्कारा गया है, जो प्रलय की हँसी उड़ाते हैं। जैसे उन के लिये प्रलय की सूचना किसी गंभीर चिन्ता के योग्य नहीं। परन्तु वह दिन दूर नहीं जब प्रलय उन के आगे आ जायेगी और वे विश्व विधाता के सामने उत्तरदायित्व के लिये उपस्थित होंगे।

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أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا ﴾ 6 ﴿

Transliteration

अलम यज अलिल अर्दा मिहादा◌

हिंदी अनुवाद

क्या हमने धरती को पालना नहीं बनाया?

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وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا ﴾ 7 ﴿

Transliteration

वल ज़िबाला औतादा◌

हिंदी अनुवाद

और पर्वतों को मेख?

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‏ وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا ‎ ﴾ 8 ﴿

Transliteration

व् खलक़ ना कुम अज़ वाजा◌

हिंदी अनुवाद

तथा तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।

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وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا ‎ ﴾ 9 ﴿

Transliteration

वजा अलना नौ म कुम सुबाता◌

हिंदी अनुवाद

तथा तुम्हारी निद्रा को स्थिरता (आराम) बनाया।

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وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ لِبَاسًا ﴾ 10 ﴿

Transliteration

वजा अल्नल लै ल लिबासा◌

हिंदी अनुवाद

और रात को वस्त्र बनाया।

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وَجَعَلْنَا النَّهَارَ مَعَاشًا ‎ ﴾ 11 ﴿

Transliteration

वजा अल्नन नहा र म आशा◌

हिंदी अनुवाद

और दिन को कमाने के लिए बनाया।

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وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا ﴾ 12 ﴿

Transliteration

वबा नैइ ना फौ क़ कुम सब अन शिदादा◌

हिंदी अनुवाद

तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात दृढ़ आकाश बनाये।

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‏ وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا ﴾ 13 ﴿

Transliteration

वजा अलना सिरजौं वह्हाजा◌

हिंदी अनुवाद

और एक दमकता दीप (सूर्य) बनाया।

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وَأَنزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا ‎ ﴾ 14 ﴿

Transliteration

व अन्जलना मिनल मु अ सिराति मा अन सज्जाजा◌

हिंदी अनुवाद

और बादलों से मूसलाधार वर्षा की।

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‏ لِّنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا ‎ ﴾ 15 ﴿

Transliteration

लिनुखरिज़ा बिही हब्बऔ व नबाता◌

हिंदी अनुवाद

ताकि उससे अन्न और वनस्पति उपजायें।

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وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا ﴾ 16 ﴿

Transliteration

व जन्नातिन अल्फाफा◌

हिंदी अनुवाद

और घने-घने बाग़।[1] 1. (6-16) इन आयतों में अल्लाह की शक्ति प्रतिपालन (रूबूबिय्यत) और प्रज्ञा के लक्षण दर्शाये गये हैं जो यह साक्ष्य देते हैं कि प्रतिकार (बदले) का दिन आवश्यक है, क्योंकि जिस के लिये इतनी बड़ी व्यवस्था की गई हो और उसे कर्मों के अधिकार भी दिये गये हों तो उस के कर्मों का पुरस्कार या दण्ड तो मिलना ही चाहिये।

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إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا ‎ ﴾ 17 ﴿

Transliteration

इन्ना यौमल फसलि का न मी क़ाता◌

हिंदी अनुवाद

निश्चय निर्णय (फ़ैसले) का दिन निश्चित है।

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يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا ‎ ﴾ 18 ﴿

Transliteration

यौमा युन् फखु फिस सूरि फतअ तूना अफ् वाजा◌

हिंदी अनुवाद

जिस दिन सूर में फूँका जायेगा। फिर तुम दलों ही दलों में चले आओगे।

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‏ وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا ﴾ 19 ﴿

Transliteration

व फुतिहतिस् समाउ फ कानत अब् वाबा◌

हिंदी अनुवाद

और आकाश खोल दिया जायेगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जायेंगे।

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‏ وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا ‎ ﴾ 20 ﴿

Transliteration

व सुय्यीरतिल जिबालु फ कानत सराबा◌

हिंदी अनुवाद

और पर्वत चला दिये जायेंगे, तो वे मरिचिका बन जायेंगे।[1] 1. (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल पुथल होगी। इस के लिये सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिस की सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जायेगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिये अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।

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إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا ‎ ﴾ 21 ﴿

Transliteration

इन्ना जहान्नमा कानत मिर सादा◌

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, नरक घात में है।

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لِّلطَّاغِينَ مَآبًا ﴾ 22 ﴿

Transliteration

लित् त्वागीना म आबा◌

हिंदी अनुवाद

जो दुराचारियों का स्थान है।

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لَّابِثِينَ فِيهَا أَحْقَابًا ﴾ 23 ﴿

Transliteration

ला बिसीना फी हा अह क़ाबा◌

हिंदी अनुवाद

जिसमें वे असंख्य वर्षों तक रहेंगे।

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لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا ﴾ 24 ﴿

Transliteration

ला यजू कूना फीहा बरदौं वला शराबा◌

हिंदी अनुवाद

उसमें ठणडी तथा पेय (पीने की चीज़) नहीं चखेंगे।

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‏ إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا ‎ ﴾ 25 ﴿

Transliteration

इल्ला हमीमौओं व गस्साक़ा◌

हिंदी अनुवाद

सिवाये गर्म पानी और पीप रक्त के।

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جَزَاءً وِفَاقًا ‎ ﴾ 26 ﴿

Transliteration

जजा औं वि फाक़ा◌

हिंदी अनुवाद

ये पूरा-पूरा प्रतिफल है।

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إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا ﴾ 27 ﴿

Transliteration

इन्नहुम कानू ला यर्जूना हिसाबा◌

हिंदी अनुवाद

निःसंदेह वे ह़िसाब की आशा नहीं रखते थे।

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وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا ﴾ 28 ﴿

Transliteration

व कज्ज़बू बि आयातिना किज़्ज़ाबा◌

हिंदी अनुवाद

तथा वे हमारी आयतों को झुठलाते थे।

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وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا ﴾ 29 ﴿

Transliteration

व कुल्ला शैइन अह सैइनाहू किताबा◌

हिंदी अनुवाद

और हमने सब विषय लिखकर सुरक्षित कर लिये हैं।

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فَذُوقُوا فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا ﴾ 30 ﴿

Transliteration

फ ज़ूकू फ लन नजी’दकुम इल्ला अजाबा

हिंदी अनुवाद

तो चखो, हम तुम्हारी यातना अधिक ही करते रहेंगे।[1] 1. (21-30) इन आयतों में बताया गया है कि जो ह़िसाब की आशा नहीं रखते और हमारी आयतों को नहीं मानते हम ने उन के एक एक कर्तूत को गिन कर अपने यहाँ लिख रखा है। और उन की ख़बर लेने के लिये नरक घात लगाये तैयार है, जहाँ उन के कुकर्मों का भरपूर बदला दिया जायेगा।

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إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا ﴾ 31 ﴿

Transliteration

इन्ना लिल मुत्तकीना मफाज़ा◌

हिंदी अनुवाद

वास्तव में, जो डरते हैं उन्हीं के लिए सफलता है।

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حَدَائِقَ وَأَعْنَابًا ﴾ 32 ﴿

Transliteration

हदाइका व अअ् नाबा◌

हिंदी अनुवाद

बाग़ तथा अँगूर हैं।

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وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا ﴾ 33 ﴿

Transliteration

व कवाइबा अतराबा◌

हिंदी अनुवाद

और नवयुवति कुमारियाँ।

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‏ وَكَأْسًا دِهَاقًا ‎ ﴾ 34 ﴿

Transliteration

व कअ्सन दिहाक़ा◌

हिंदी अनुवाद

और छलकते प्याले।

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لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا ﴾ 35 ﴿

Transliteration

ला यस मऊना फीहा लग वौ वला किज़्ज़ाबा◌

हिंदी अनुवाद

उसमें बकवास और मिथ्या बातें नहीं सुनेंगे।

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جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا ﴾ 36 ﴿

Transliteration

जज़ाअम मिर् रब्बिका अता अन हिसाबा◌

हिंदी अनुवाद

ये तुम्हारे पालनहार की ओर से भरपूर पुरस्कार है।

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رَّبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا ﴾ 37 ﴿

Transliteration

रब्बिस् समावाती वल अर्दी वमा बै’नहुमर् रहमानि ला यम्लिकूना मिन्हु खिताबा◌

हिंदी अनुवाद

जो आकाश, धरती तथा जो उनके बीच है, सबका अति करुणामय पालनहार है। जिससे बात करने का वे साहस नहीं कर सकेंगे।

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يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا ﴾ 38 ﴿

Transliteration

यौमा यकूमुर् रुहु वल् मलाइकतु सफ्फा, ला यता कल्लामूना इल्ला मन अजि न लहुर् रहमानु व क़ाला सवाबा◌

हिंदी अनुवाद

जिस दिन रूह़ (जिब्रील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और सह़ीह़ बात करेगा।

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ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا ﴾ 39 ﴿

Transliteration

ज़ालिकल यौमुल हक्क़, फ मन शा’अत् त ख ज इला रब्बिही म आबा◌

हिंदी अनुवाद

वह दिन निःसंदेह होना ही है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने का) ठिकाना बना ले।[1] 1. (37-39) इन आयतों में अल्लाह के न्यायालय में उपस्थिति (ह़ाज़िरी) का चित्र दिखाया गया है। और जो इस भ्रम में पड़े हैं कि उन के देवी देवता आदि अभिस्तावना करेंगे उन को सावधान किया गया है कि उस दिन कोई बिना उस की आज्ञा के मुँह नहीं खोलेगा और अल्लाह की आज्ञा से अभिस्तावना भी करेगा तो उसी के लिये जो संसार में सत्य वचन "ला इलाहा इल्लल्लाह" को मानता हो। अल्लाह के द्रोही और सत्य के विरोधी किसी अभिस्तावना के योग्य नगीं होंगे।

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‏ إِنَّا أَنذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنتُ تُرَابًا ﴾ 40 ﴿

Transliteration

इन्ना अंज़र ना कुम अज़ाबन क़रीब, यौ म यंजुरुल मर उ मा कद् दमत यदाहु व यकूलुल् काफिरु या लैतनी कुन्तु तुराबा◌

हिंदी अनुवाद

हमने तुम्हें समीप यातना से सावधान कर दिया, जिस दिन इन्सान अपना करतूत देखेगा और काफ़िर (विश्वासहीन) कहेगा कि काश मैं मिट्टी हो जाता![1] 1. (40) बात को इस चेतावनी पर समाप्त किया गया है कि जिस दिन के आने की सूचना दी जा रही है, उस का आना सत्य है, उसे दूर न समझो। अब जिस का दिल चाहे इसे मान कर अपने पालनहार की ओर मार्ग बना ले। परन्तु इस चेतावनी के होते जो इन्कार करेगा उस का किया धरा सामने आयेगा तो पछता-पछता कर यह कामना करेगा कि मैं संसार में पैदा ही न होता। उस समय इस संसार के बारे में उस का यह विचार होगा जिस के प्रेम में आज वह परलोक से अंधा बना हुआ है।

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